सतना,सामाजिक समन्वय का सर्वश्रेष्ठ माध्यम महायज्ञ श्री सनकादिक ब्रम्हचारी महराज
यज्ञ केवल अध्यात्मिक और धार्मिक अनुष्ठान ही नही बल्कि सामाजिक एकजुटता और समन्वय का अद्वितीय माध्यम भी है। सनातन भारतीय समाज यज्ञो की पुनीत भावना और यज्ञ फल के रूप मे समाज में व्याप्त होने वाली सह अस्तित्व और परस्पर प्रेम की भावना से जुड़ कर यहां तक पहुँचा है। यह बाते देश के सुविख्यात परम तपस्वी राष्ट्र संत श्री सनकादिक ब्रम्हचारी जी महराज ने पत्रकारो से चर्चा के दौरान कही। सतना मे 28 नवम्बर से 06 दिसम्बर तक होने जा रहे विराट अध्यात्मिक अनुष्ठान 1111 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ के आयोजन के पूर्व पत्रकारो से चर्चा करते हुए महराज श्री ने कहा कि सनातन का एक एक सोपान और कालखण्ड यज्ञो से ही ओतप्रोत रहा है। उन्होनें कहा कि यज्ञो मे श्रीराम महायज्ञ अति पावन और श्रेष्ठ माना जाता है। इस अवसर पर यज्ञ के दौरान आयोजित विराट संत सम्मेलन के बारे मे जानकारी देते हुए महराज श्री ने कहा कि समूचे देश से संत, महंत और अनेक सिद्ध साधु इस आयोजन में आकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देंगे। प्रतिदिन एक जगतगुरू और 10 महामडलेश्वरो के साथ अनेक महंत, श्रीमहंत और साधुजन यज्ञ मे शामिल होंगे। 8 दिनो तक की अवधि मे कुल 12 जगतगुरू एवं 100 से भी अधिक महाडलेश्वर अपनी उपस्थिति दर्ज करायेंगे। इसके अलावा 1200 के करीब महंत, श्रीमहंत एवं अन्य साधु संत यज्ञ स्थल पर दर्शन देंगे। यह क्षण न केवल सतना वरन समूचे मध्य भारत के लिए एक अति पुण्य प्रदायक साबित होंगा।
इसके अलावा यज्ञ स्थल पर ही प्रतिदिन देश के नामी कलाकारो द्वारा रामलीला एवं कृष्णलीला का जीवन्त मंचन भी किया जायेगा। यह पहला पावन सुअवसर होंगा जब विन्ध्य की धरती पर 1111 हवन कुण्डों में लगभग 4450 श्रद्धालुओं द्वारा एक साथ हब्ब की आहूतियां दी जायेंगी। इस अवसर पर सनकादिक भक्त मण्डल ने सभी सनातनी श्रद्धालुओं से यज्ञ मे शामिल होना का आग्रह किया है। यज्ञ का समापन विशाल भण्डारे के साथ यज्ञ की पूर्णआहूति के बाद होंगा।
INS संतोषी माता मंदिर के बगल मे निर्मित हो रहे विशाल यज्ञशाला के निर्माण मे राजस्थान से आये विशेषज्ञ कारीगर बीते 40 दिनो से जुटे हुए है। महायज्ञ प्रारंभ होते तक यज्ञ स्थल पर एक विशाल महाकुंभ की तरह का दृश्य निर्मित हो जायेगा।