एनएचआरसी के विशेष मॉनिटर श्री बालकृष्णन गोयल ने कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास और केंद्रीय जेल रीवा का किया निरीक्षण.
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राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के विशेष मॉनिटर श्री बालकृष्णन गोयल ने शिक्षा विभाग द्वारा संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास बेलवा पैकान, विकासखण्ड रायपुर कर्चुलियान तथा केंद्रीय जेल रीवा का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान नोडल अधिकारी नयन सिंह जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास, सहायक संचालक जीवेन्द्र सिंह, शिक्षा विभाग तथा जेल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास के निरीक्षण के दौरान पाया गया कि 6वीं से 10वीं कक्षा तक की बालिकाओं के लिए 200 बेड की क्षमता के विरुद्ध 196 बालिकाएं निवासरत हैं। श्री गोयल ने छात्राओं से सामूहिक चर्चा की तथा किचन शेड, रहवास, भोजन और पानी की गुणवत्ता का विधिवत जायजा लिया। बालिकाओं ने व्यवस्थाओं और भोजन की स्थिति पर संतोष व्यक्त किया। चर्चा के दौरान कई छात्राओं ने भविष्य में आईएएस, आईपीएस, शिक्षक तथा प्रोफेसर बनने की अपनी आकांक्षाएं साझा कीं, जिस पर श्री गोयल ने अधीक्षिका को बालिकाओं के लिए जूडो-कराटे और करियर काउंसलिंग की अतिरिक्त व्यवस्था कराने के निर्देश दिए। निरीक्षण में वर्तमान भवन की स्थिति असंतोषजनक पाई गई। पास ही बन रहा नया भवन पिछले तीन वर्षों से अपूर्ण है और वर्तमान में केवल एक चौकीदार कार्यरत है। इस पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को तत्काल दो अतिरिक्त चौकीदारों की व्यवस्था करने तथा अपूर्ण भवन का कार्य पूर्ण कराकर बालिकाओं को नवीन छात्रावास में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए।
इसके पश्चात श्री गोयल ने केंद्रीय जेल रीवा का निरीक्षण किया। जेल में 50 व्यक्तियों की टीम द्वारा 2,315 कैदियों के लिए दो शिफ्टों में गुणवत्तापूर्ण भोजन तैयार किया जाता है। किचन निरीक्षण के दौरान उन्होंने फायर सेफ्टी की जानकारी ली और उप जेल अधीक्षक को संबंधित स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिलाने के निर्देश दिए। जेल में कैदियों की संख्या के अनुपात में बैरक कम होने पर एसओपी तैयार करने और जिला स्तरीय अधिकारियों के नियमित निरीक्षण की समीक्षा की गई। स्वास्थ्य व्यवस्था के तहत जेल में स्थायी चिकित्सक न होने तथा जिला अस्पताल के डॉक्टरों पर निर्भरता को आपत्तिजनक मानते हुए तुरंत स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
महिला कैदियों से चर्चा के दौरान उन्हें शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने पर जोर दिया गया। शिक्षित महिला कैदियों को अन्य महिलाओं को साक्षर करने के लिए प्रेरित किया गया, जिस पर उन्होंने सहमति जताई। इसके साथ ही महिला अधिकारी को निर्देश दिए गए कि महिलाओं के समूह बनाकर उन्हें सिलाई, अचार, पापड़ और बरी बनाने हेतु सामग्री उपलब्ध कराई जाए तथा उनके विक्रय की व्यवस्था की जाए। इन सामग्रियों का क्रय स्वयं जेल प्रशासन द्वारा भी कैदियों के भोजन हेतु किया जा सकता है। महिला कैदियों ने स्पष्ट किया कि जेल प्रशासन द्वारा भोजन, रहवास या व्यवहार में कोई भेदभाव नहीं किया जाता।
निरीक्षण के दौरान महिला कैदियों के साथ 6 से 7 वर्ष के कुल 13 बच्चे भी पाए गए, जिनके लिए पृथक क्रैच और प्री-स्कूल एजुकेशन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन को नवाचार के रूप में तत्काल पृथक प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण से संबंधित सभी दस्तावेजों को पृथक से संरक्षित कर लिया गया है। श्री गोयल द्वारा अगले दिन 23 अगस्त को बाल सम्प्रेक्षण गृह रीवा का निरीक्षण किया जाएगा।
CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Department Of Women Child Development, Madhya Pradesh Jansampark Madhya Pradesh
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