🚨जवानों के बीच पहुंचे CM धामी, अपने हाथों से मिठाई खिलाकर मनाई दीपावली, साझा कीं सैनिक परिवार की यादें
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को गढ़ीकैंट स्थित गढ़वाल ग्रीन्स प्रशिक्षण मैदान में आयोजित दीपावली मिलन कार्यक्रम में वीर जवानों के साथ त्योहार की खुशियां साझा कीं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने जवानों को अपने हाथों से मिठाई खिलाई और दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए देश की सुरक्षा में उनके अदम्य साहस, शौर्य और समर्पण के प्रति आभार जताया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने जवानों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने कहा कि गढ़वाल रेजीमेंट के वीर जवानों के बीच पहुंचकर उन्हें अपने परिवार के साथ दीपावली मनाने जैसा अनुभव हो रहा है। सैनिक उनके लिए परिवार का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि जब देशवासी अपने घरों में दीप जलाकर त्योहार मनाते हैं, तब हमारे जवान सीमाओं पर तैनात रहकर देश की सुरक्षा का जिम्मा संभालते हैं। हमारे घरों में जलने वाले दीपों के पीछे सैनिकों का त्याग और उनके परिवारों का समर्पण भी शामिल है।
मुख्यमंत्री ने अपने सैनिक परिवार से जुड़ी यादें साझा करते हुए बताया कि उनका जन्म एक सैनिक परिवार में हुआ है। उनके पिता ने सेना में रहते हुए उन्हें देशसेवा, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के संस्कार दिए। पिता अक्सर गढ़वाल रेजीमेंट के वीर सैनिकों की शौर्यगाथाएं सुनाया करते थे। इनमें महावीर चक्र विजेता अमर शहीद जसवंत सिंह रावत की वीरता और बलिदान का विशेष उल्लेख होता था। वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध में नूरानांग मोर्चे पर उनके अदम्य साहस को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उसी गौरवशाली रेजीमेंट के जवानों के बीच पहुंचकर उन्हें अपने पिता की बातें याद आ रही हैं। यह उनके लिए गर्व और भावुकता का क्षण है।
मुख्यमंत्री ने अमर शहीद जसवंत सिंह रावत सहित देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी वीर सैनिकों को नमन किया। उन्होंने कहा कि गढ़वाल रेजीमेंट का इतिहास वीरता, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की गौरवशाली परंपरा से जुड़ा है। प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर आजादी के बाद हुए विभिन्न युद्धों और सैन्य अभियानों तक रेजीमेंट के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सैन्य शक्ति और सामरिक क्षमता लगातार मजबूत हो रही है। सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, सेनाओं के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा उपकरणों के निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है। वहीं सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों, पुलों, सुरंगों और आधुनिक संचार सुविधाओं का विस्तार भी किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों का सम्मान एवं कल्याण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी क्रम में शहीद सैनिकों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की गई है। शहीद सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में नौकरी देने की व्यवस्था के तहत अनेक आश्रितों को रोजगार भी दिया गया है। इसके लिए आवेदन की समय-सीमा दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष की गई है।
उन्होंने बताया कि देहरादून में निर्माणाधीन सैन्यधाम का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है। सैन्यधाम देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के शौर्य और त्याग का प्रतीक बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सैनिक परिवारों की समस्याओं के समाधान और उनके कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिक सिर्फ देश की सीमाओं के प्रहरी नहीं, बल्कि करोड़ों देशवासियों के सुरक्षित जीवन और खुशियों के रक्षक भी हैं। उन्होंने वीर जवानों के साथ उनके परिवारों के योगदान को भी नमन किया और सभी के सुख, समृद्धि एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
इस अवसर पर उत्तराखण्ड सब एरिया के डिप्टी जीओसी ब्रिगेडियर राम सिंह थापा, कर्नल प्रतुल थपलियाल, लेफ्टिनेंट कर्नल रवि मोहन बिष्ट, लेफ्टिनेंट कर्नल मोहित जोशी, मेजर के.डी. सिंह और सूबेदार मेजर रघुवीर सिंह भण्डारी सहित कई सैन्य अधिकारी एवं जवान मौजूद रहे।