#भरतपुर। बयाना के मुख्य गुरुद्वारा में रविवार को श्री गुरु सिंह सभा के तत्वावधान में धन-धन साहिब श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज का 422वां प्रकाश पर्व बड़े ही श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर गुरुद्वारा परिसर में भव्य कीर्तन दरबार सजाया गया, जहां आगरा से पधारे भाई हरजिंदर सिंह और बीवी कशलीन कौर के रागी जत्थे ने मधुर शबद-कीर्तन के जरिए गुरु महिमा का गुणगान किया। गुरुबाणी की पावन धुनों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया और बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेककर सुख-शांति की अरदास की। कार्यक्रम के दौरान ज्ञानी भाई हरबेल सिंह ने प्रकाश पर्व के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 30 अगस्त 1604 को सचखंड श्री हरमंदिर साहिब, अमृतसर में इसका पहला प्रकाश हुआ था। पांचवें गुरु श्री गुरु अर्जुन देव जी द्वारा संपादित इस पवित्र ग्रंथ में छह गुरुओं और 18 सूफी संतों की वाणी शामिल है, जिसे वर्ष 1708 में दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने पूर्ण गुरु की उपाधि दी थी। वक्ताओं ने गुरु ग्रंथ साहिब को इंसानियत और समानता की अनमोल धरोहर बताते हुए संगत से इसकी शिक्षाओं को जीवन में ढालने और समाज में भाईचारा बनाए रखने का आह्वान किया। कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।