रांची: छात्र आंदोलन में स्याही फेंकने की घटना पर रिया तुलिका पिंगुआ की प्रतिक्रिया, कहा- अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी
रांची: जेपीएससी–जेएसएससी भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच स्याही फेंकने की घटना पर रिया तुलिका पिंगुआ ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जब जंतर-मंतर पर पूरे देश से लोग जुड़े, तब आंदोलन को सफलता मिली और इस्तीफे जैसी कार्रवाई हुई। हालांकि, उनका मानना है कि केवल इस्तीफा किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, बल्कि इससे सरकारी कामकाज में अस्थिरता भी पैदा हो सकती है।
रिया तुलिका पिंगुआ ने कहा कि नेहा बोरा ने छात्र-छात्राओं के आंदोलन को मजबूती देने का प्रयास किया, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की। उन्होंने महिला नेताओं पर स्याही फेंकने की घटना की निंदा करते हुए कहा कि झारखंड जैसी क्रांतिकारी धरती पर महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि एक ओर समाज में "अतिथि देवो भव:" की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर आंदोलन का समर्थन करने आई महिला पर स्याही फेंकना गलत संदेश देता है। रिया ने इस घटना की तुलना उन ऐतिहासिक घटनाओं से की, जब महिलाओं की शिक्षा के लिए संघर्ष करने वालों का विरोध इस तरह किया जाता था।
रिया तुलिका पिंगुआ ने आगे कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भी कभी बागी कहा गया था, लेकिन उन्होंने संघर्ष जारी रखा और समाज में बदलाव लाया। उन्होंने कहा कि स्याही से दागदार अपने कपड़े को वह संभालकर रखेंगी, ताकि आने वाली पीढ़ियों को यह याद रहे कि अधिकारों की लड़ाई संघर्ष से ही हासिल होती है।
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