माननीय मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी के नशा मुक्त हरियाणा के सपने को साकार करने के लिए हरियाणा पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) श्री अजय सिंघल की प्रेरणा और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) कानून एवं व्यवस्था श्री संजय कुमार के मार्गदर्शन में स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो तथा जिला पुलिस के सानिध्य में ओजोन दिवस के अवसर पर इंडियन आॅयल पानीपत के सहयोग से पानीपत पुलिस के सानिध्य में आयोजित नशा विरोधी जागरूकता कार्यक्रम के तहत दो सत्रों में ‘‘प्रकृति रक्षा शिक्षक शिविर एवं नशा मुक्त समाज में नागरिक दायित्व विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में मुख्य अतिथि अश्विन शैणवी, आई पी एस, पुलिस महानिरीक्षक करनाल रंेज कहा कि प्रकृति शिक्षा शिविर में नशा मुक्ति की बातचीत एक नैसर्गिक दायित्व की तरह है। उन्होंने कहा कि प्रकृति का विनाश भी एक नकारात्मक नशा ही है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए जो अपने समय के समकालीन प्रश्नों के समाधान का मार्ग तलाशे।
विशिष्ट अतिथि पुलिस अधीक्षक पानीपत श्रीमती मेधा भूषण आई पी एस ने कहा कि पानीपत के लिए प्रकृति संरक्षण बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक नगरी पानीपत में औद्योगिक विकास के साथ प्राकृतिक संरचना की संरक्षण के लिए राज और समाज दोनों को मिलकर संयुक्त पहल करनी होगी।
इस अवसर पर एस पी नारकोटिक्स श्री आयुष यादव, आई पी एस ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए नशा का नाश जरूरी है।
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए श्री एम एल धारिया, ई डी रीफाइनरी ने कहा कि
पुलिस विभाग द्वारा सामाजिक उत्थान के लिए किये जा रहे प्रत्येक कार्य में इंडियन ऑयल पूरी शिदद्त के साथ सहयोग करता है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष सामाजिक दायित्व योजना के तहत पानीपत के पुलिस लाईन में निर्मित लाईब्रेरी में भी इंडियन ऑयल पूरी तरह सहयोगी रहा, भविष्य में भी इंडियन ऑयल संस्थान सहयोगी रहेगा।
कार्यशाला के प्रथम सत्र में विशिष्ट अतिथि दीपक पाटिल आई एफ एस ने कहा कि प्रकृति की रक्षा नहीं होगी तो जीवन प्रवाह कैसे होगा।
मुख्य वक्ता डा. वी के सिंह, सी ई ओ, पाॅवर सैक्टर स्किल काउन्सिल ने कहा कि हमारे समकालीन भारत में सबसे ज्यादा कार्बन ऊर्जा उत्सर्जन से होता है अब हम नये भारत में सबने मिलकर निर्णय लिया है कि 2070 तक कार्बन का उत्सर्जन शून्य होगा। इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए वर्तमान समय में 52 प्रतिशत ऊर्जा उत्सर्जन का स्रोत सौर उर्जा, वायु और पानी पर आधारित हो गया है।