नीतीश के उद्घाटन वाले अस्पताल में कारनामा! फ्रैक्चर पर POP की जगह बांध दिया कूट का कार्टून।
बेगूसराय में स्वास्थ्य व्यवस्था शर्मसार, मरीज के पैर में प्लास्टर की जगह कूट का कार्टून, वीडियो वायरल।
करोड़ों का अस्पताल, डॉक्टर-ड्रेसर गायब! घायल के पैर में कार्टून लपेटकर किया रेफर।
बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत दिखाता एक शर्मनाक वीडियो बेगूसराय से सामने आया है। यह वीडियो किसी प्राइवेट क्लीनिक का नहीं, बल्कि उस अनुमंडलीय अस्पताल का है जिसका उद्घाटन खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने करोड़ों की लागत से किया था।
मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल में सड़क हादसे में घायल युवक के फ्रैक्चर पैर में प्लास्टर ऑफ पेरिस की जगह कूट के कार्टून के टुकड़े लगाकर बैंडेज कर दिया गया और फिर उसे सदर अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन ने इसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया।
पीड़ित युवक नावकोठी के महेशवाड़ा का रहने वाला कुणाल कुमार है, जो 3 अगस्त की शाम हरसाइन पुल के पास बाइक हादसे में घायल हो गया था।
जब इस पर अस्पताल प्रभारी डॉ. अभिनव प्रियदर्शी से सवाल किया गया तो उन्होंने इसे गलत नहीं माना। उनका कहना था कि उस वक्त ऑर्थो डॉक्टर और ड्रेसर मौजूद नहीं थे, जान बचाने के लिए इम्मोबिलाइजेशन जरूरी था, मेडिकल साइंस में ऐसा होता है। उन्होंने स्टाफ की भारी कमी की बात भी स्वीकारी।
वहीं सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने कहा है कि वीडियो संज्ञान में है, जांच कराई जाएगी, दोषी पर कार्रवाई होगी, हालांकि प्राथमिक उपचार में ऐसा किया जाता है।
सवाल बड़ा है — जब करोड़ों के अस्पताल में रात में एक फ्रैक्चर का इलाज नहीं हो सकता, तो गरीब मरीज कहां जाएं?
बेगूसराय में स्वास्थ्य विभाग की खुली पोल, फ्रैक्चर मरीज के पैर में प्लास्टर की जगह बांधा कूट का कार्टून
बेगूसराय (बिहार)। बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था का एक हैरान करने वाला वीडियो बेगूसराय जिले के मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल से वायरल हो रहा है। सड़क हादसे में घायल युवक के टूटे पैर पर प्लास्टर करने की जगह डॉक्टरों ने कूट (अनाज रखने वाली बोरी) के कार्टून को काटकर बैंडेज बांध दिया।
यह वही मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल है जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था।
*क्या है पूरा मामला:*
3 अगस्त की शाम नावकोठी थाना क्षेत्र के महेशवाड़ा गांव निवासी कुणाल कुमार बाइक से जा रहे थे, तभी हरसाइन पुल के पास हादसे का शिकार हो गए। उनका पैर फ्रैक्चर हो गया। परिजन उन्हें मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल लेकर पहुंचे। आरोप है कि वहां मौजूद डॉक्टर ने समुचित इलाज की जगह दोनों तरफ कार्टून लगाकर पट्टी कर दी और बेगूसराय सदर अस्पताल रेफर कर दिया।
*प्रभारी का अजीब तर्क:*
अस्पताल प्रभारी डॉ. अभिनव प्रियदर्शी ने कहा - "उस समय ऑर्थो डॉक्टर और ड्रेसर उपलब्ध नहीं थे। ब्लीडिंग रोकने और इम्मोबिलाइज करने के लिए कार्टून लगाना मेडिकल साइंस में गलत नहीं है। अस्पताल में स्टाफ की कमी है, जिसके लिए कई बार विभाग को लिखा गया है। दिन में काम चल जाता है, रात में दिक्कत होती है।"
*सिविल सर्जन बोले - जांच होगी:*
बेगूसराय सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है, वीडियो की जांच कराई जा रही है। अगर लापरवाही पाई गई तो कार्रवाई होगी।
इस घटना ने एक बार फिर करोड़ों की लागत से बने सरकारी अस्पतालों की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है।
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