बीमार मरीज को डंडी-कंडी से 12 किमी का सफर, सड़क के इंतजार में लिवाड़ी के ग्रामीण!!
बारिश, जंगल और उफनती नदी के बीच मरीज को कंधों पर ढोकर जखोल पहुंचाने को मजबूर ग्रामीण, आजादी के दशकों बाद भी सड़क सुविधा से महरूम गांव
उत्तरकाशी के मोरी ब्लॉक के सुदूरवर्ती लिवाड़ी गांव से सिस्टम की बदहाल तस्वीर सामने आई है। गांव में नवीन पुत्र चैन सिंह की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को डंडी-कंडी का सहारा लेना पड़ा। भारी बारिश के बीच ग्रामीणों ने बेहद दुर्गम और खतरनाक पैदल रास्ते से करीब 12 किलोमीटर तक मरीज को कंधों पर ढोकर जखोल गांव पहुंचाया।
मरीज को डंडी-कंडी पर बैठाकर ग्रामीण जंगल के बीच कठिन रास्तों से आगे बढ़े। रास्ते में उफनती नदी को लकड़ी के सहारे पार करना पड़ा। बारिश, फिसलन और जोखिम के बावजूद ग्रामीण मरीज को सुरक्षित जखोल तक पहुंचाने में जुटे रहे। सामने आई तस्वीरें पहाड़ के उन गांवों की हकीकत बयां कर रही हैं, जहां आज भी गंभीर स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के दशकों बाद भी लिवाड़ी गांव सड़क सुविधा से वंचित है। वर्ष 2013 से गांव को सड़क से जोड़ने की मांग लगातार उठाई जा रही है, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक अब तक धरातल पर स्थिति में कोई ठोस बदलाव नहीं आया है। सड़क सुविधा न होने के कारण गांव तक पहुंचने वाला पैदल रास्ता ही आवागमन का मुख्य जरिया है, जो कई स्थानों पर जर्जर और बेहद जोखिमभरा बना हुआ है।
सबसे बड़ी परेशानी तब खड़ी होती है, जब गांव में कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों के पास मरीज को डंडी-कंडी में बैठाकर कई किलोमीटर पैदल ले जाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता। बरसात के मौसम में यह चुनौती और गंभीर हो जाती है।
ग्रामीणों ने वीडियो जारी कर शासन-प्रशासन से लिवाड़ी को सड़क सुविधा से जोड़ने तथा गांव में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की मांग की है। बारिश में नदी पार कर 12 किलोमीटर तक मरीज को कंधों पर ढोने की यह तस्वीर विकास के दावों के बीच दुर्गम गांवों की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करती है।