पितृपक्ष मेला 2026 से पहले गया नगर निगम की बड़ी तैयारी, 15 दिन नहीं, सालों भर दिखेगा विष्णुधाम का वैभव: पितृपक्ष से पहले गया नगर निगम ने झोंकी ताकत, घाट से लेकर सड़क-पानी तक बदली व्यवस्था
गया। पितृपक्ष मेला-2026 में देश-दुनिया से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए गया नगर निगम ने इस बार व्यापक स्तर पर तैयारी की है। गुरुवार की शाम नगर निगम की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में मेयर गणेश पासवान और पूर्व डिप्टी मेयर सह स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य मोहन श्रीवास्तव ने मेला क्षेत्र में कराए जा रहे कार्यों और श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गया जी की पहचान केवल 15 दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष मेले से नहीं, बल्कि भगवान विष्णु की चरणस्थली और मोक्षधाम के रूप में सालभर बनी रहती है। इसी सोच के साथ इस बार व्यवस्थाओं को मेला अवधि से आगे स्थायी रूप देने पर जोर दिया गया है।
मेयर गणेश पासवान और मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि गया जी को देश-दुनिया में विशेष धार्मिक पहचान प्राप्त है। एक तरफ बोधगया भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली है तो दूसरी तरफ गया जी भगवान विष्णु की चरणस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। यहां पितृपक्ष के दौरान लाखों श्रद्धालु पिंडदान और तर्पण के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में नगर निगम की जिम्मेदारी केवल मेला के दौरान सफाई कराने तक सीमित नहीं हो सकती। गया जी के धार्मिक महत्व के अनुरूप सालभर बेहतर व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में काम किया जा रहा है।
पांच जोन में बंटा मेला क्षेत्र, रात में भी होगी सफाई
नगर निगम ने मेला क्षेत्र को सफाई व्यवस्था के लिहाज से पांच जोन में बांटकर काम शुरू किया है। सात प्रमुख घाटों, 17 प्रमुख वेदियों, पिंडवेदियों और तालाबों की विशेष सफाई कराई गई है। मेला क्षेत्र में आने वाले आवासन स्थलों पर भी सफाई की व्यवस्था की गई है। प्रमुख मार्गों और उन इलाकों में जहां सामान्य सफाई व्यवस्था के दौरान कम ध्यान जाता था, वहां मैकेनिकल स्वीपिंग की व्यवस्था की गई है। रात में भी सफाई कराई जा रही है, ताकि सुबह श्रद्धालुओं को स्वच्छ वातावरण मिल सके। नगर निगम के अनुसार शहरी क्षेत्र में मेला क्षेत्र की सैकड़ों टूटी-फूटी सड़कों, गलियों और नालियों की मरम्मत एवं निर्माण कराया गया है। इन कार्यों पर करीब तीन से चार करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। पिंडवेदियों और प्रमुख स्थलों की रंगाई-पुताई भी कराई गई है। टूटे प्याऊ, टाइल्स और अन्य नागरिक सुविधाओं को भी दुरुस्त किया गया है।
25 जगह प्याऊ, 17 स्थानों पर वाटर एटीएम
श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था को नगर निगम ने प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा है। करीब 25 स्थानों पर प्याऊ और आरओ वाटर की व्यवस्था की गई है। वहीं 17 स्थानों पर वाटर एटीएम और चिलर लगाने की योजना है। इनमें अधिकांश स्थानों पर काम पूरा हो चुका है और शेष जगहों पर काम जारी है। विष्णुपद मंदिर, श्मशान घाट के आसपास सहित प्रमुख स्थानों पर श्रद्धालुओं को शुद्ध और ठंडा पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा मेला क्षेत्र में डीलक्स शौचालय, बायो टॉयलेट और मोबाइल शौचालय भी लगाए गए हैं।
फाल्गु नदी से लेकर घाट-तालाब तक विशेष सफाई
फाल्गु नदी में जमा कचरा और गंदगी हटाने के लिए क्लीनिंग बोट का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रमुख घाटों और तालाबों की रगड़कर सफाई कराई गई है। नगर निगम का कहना है कि श्रद्धालुओं को पिंडदान और तर्पण के दौरान स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए घाटों की सफाई पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रेस वार्ता में सार्वजनिक सुविधाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया। बताया गया कि पूर्व में शौचालयों के टाइल्स, नल और अन्य सामान चोरी या क्षतिग्रस्त किए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा और निगरानी को लेकर भी विशेष व्यवस्था की जा रही है।
विष्णुपद और सीताकुंड में दिखेगा गया जी का इतिहास
इस बार नगर निगम की योजना सिर्फ सफाई और मूलभूत सुविधाओं तक सीमित नहीं है। विष्णुपद, सीताकुंड और देवघाट जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को सालभर आकर्षण का केंद्र बनाने के लिए लेजर लाइट एंड साउंड शो की योजना पर काम किया जा रहा है। लाइट एंड साउंड के माध्यम से भगवान विष्णु के चरण, गया जी में पिंडदान की परंपरा, माता सीता से जुड़ी धार्मिक कथा और गया जी के धार्मिक महत्व को दृश्य एवं श्रव्य माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। उद्देश्य है कि देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालु गया जी के इतिहास और धार्मिक महत्व को आधुनिक तकनीक के माध्यम से देख और समझ सकें। मेयर गणेश पासवान ने कहा कि भगवान विष्णु की चरणस्थली का महत्व केवल पितृपक्ष के 15 दिनों तक सीमित नहीं होना चाहिए। जिस तरह अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों की पहचान सालभर बनी रहती है, उसी तरह गया जी को भी स्थायी धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की जरूरत है।
विकास के लिए सभी का सहयोग जरूरी मेयर गणेश पासवान ने कहा कि गया जी को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों के साथ नगर निगम के पदाधिकारी, कर्मचारी और सफाई कर्मी लगातार काम कर रहे हैं। बारिश और अन्य चुनौतियों के बावजूद कर्मचारी दिन-रात मेला क्षेत्र की तैयारियों में जुटे हैं। उन्होंने आम लोगों और श्रद्धालुओं से भी अपील की कि मेला क्षेत्र में गंदगी नहीं फैलाएं और नगर निगम की ओर से बनाई गई सार्वजनिक सुविधाओं को नुकसान न पहुंचाएं। उनका कहना है कि गया जी की पहचान केवल नगर निगम या प्रशासन से नहीं, बल्कि यहां रहने वाले हर नागरिक से जुड़ी है। सभी के सहयोग से ही पितृपक्ष मेला-2026 में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा और गया जी को देश-दुनिया के सामने एक स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित धार्मिक नगरी के रूप में प्रस्तुत किया जा सकेगा।