*‘समझदारों’ ने परिवार ओर समाज तोड़े, ‘पागलों’ ने परमात्मा को पाया है-आचार्य रामदयालजी महाराज*
*एक हाथ में शस्त्र ओर एक हाथ में शास्त्र ये हमारी संस्कृति*
*माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में दैनिक चातुर्मासिक सत्संग*
भीलवाड़ा :निलेश काठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार ),23 अगस्त दुनिया कंचन कामिनी के लिए पागल है पर जो भक्त होता है वह परमात्मा के लिए पागल होता है। देशभक्त दिवाने राष्ट्र के लिए पागल होते है। ऐसे पागल समझदारों से ज्यादा अच्छे होते है। समझदारों ने तो परिवार ओर समाज तोड़े, पागलों ने परमात्मा को पाया है।
ध्रुव, प्रहलाद, मीरा दुनिया की नजरों में पागल बने हुए थे। ऐसा पागलपन किसी के संकल्प से नहीं कई जन्मों के पुण्यों से सौभाग्यशाली को मिलता है। अपने लक्ष्य को प्राप्त करने को ही पागलपन कहते है।
ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने रविवार को ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत दैनिक सत्संग में प्रेम भक्ति के स्वरूप की व्याख्या करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि भक्ति की मस्ती जिसके जीवन में आ गई उसे कोई ठुकरा नहीं पाया सारा संसार उनको नमन करता है। भक्ति की ऐसी मस्ती किसी लोकलाज की परवाह नहीं करती। भक्ति दिल को छू लेने वाली होती है। एक हाथ में शस्त्र ओर एक हाथ में शास्त्र ये हमारी संस्कृति है।
आचार्यश्री ने कहा कि भक्त के बुलाने पर भगवान आते है यहीं प्रेम है। कितना भी कष्ट हो जहां सामने प्रेम होता है वहां जाने का मन करता है ओर कहीं कंचन की बारिश हो रही हो पर प्रेम व सम्मान नहीं हो तो जाने का मन नहीं करेगा। एक बार प्रेम से पुकार लो परमात्मा दौड़े चला आएगा। उन्होंने कहा कि प्रेम भक्ति अलौकिक एवं विलक्षण होती है। शबरी के प्रेम के कारण ही राम उसके झूठे बैर खाते है। जीवन समाप्त हो सकता पर प्रेम भक्ति समाप्त नहीं हो सकती।
संसार में कई लोग अपने दुःख से नहीं बल्कि दूसरों के सुख से दुःखी रहते है उनके जीवन में प्रेम भक्ति नहीं होती है।
आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि भक्ति में प्रेम होना चाहिए, प्रेम के बिना भक्ति अपूर्ण होती है। प्रेम के बिना आत्मानंद नहीं मिल सकता। जहां अहम प्रस्फुटित होता है वहां परम्पराओं में टकराव चलेगा ओर जहां प्रेम प्रकट हो गया वहां समन्वय व सद्भाव होता है। प्रेम भक्ति से गुरू के पास बैठकर परम आनंद की प्राप्ति होती है। पत्नी का पति से प्यार नहीं प्रेम होता है जिसमें भक्ति का भाव होता है ओर प्रेम में कोई व्यापार या छुपाव नहीं होता है।
*चातुर्मास में 25 से 27 सितम्बर तक होंगे विशेष आयोजन*
आचार्यश्री ने बताया कि चातुर्मास के तहत आगामी 25 से 27 सितम्बर तक विशेष आयोजन होंगे। इसके तहत 25 सितम्बर को संध्या आरती के बाद सार्वजनिक,सामूहिक भक्ति संध्या का आयोजन होगा।जिसमें संप्रदाय की परंपरा के भजन भक्तजनों द्वारा सामूहिक रूप से गाए जाएंगे
26 सितंबर को प्रवचन के साथ ही आचार्य श्री के अवतरण दिवस पर आनंदोत्सव का दिव्य ,भव्य आयोजन होगा
27 सितम्बर को आचार्य श्री के सानिध्य में संत सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा जिसमें विभिन्न स्थानों से संत पधार कर अपना प्रवचन ओर मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।
आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी राम जी राम आलोट ने मानस पर प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई।
एकादशी के उपलक्ष में दोपहर 3 से 4 बजे तक संप्रदाय के प्रथम आचार्य श्री रामजन्न जी महाराज की वाणी का पाठ,छन्द भुजंगी एवं भजन ओर साथ ही 4 से 5 बजे तक राम साधना मंडल द्वारा श्वासों श्वास राम नाम साधना शिविर आयोजित किया गया जिसमें अनेक भक्त जन उपस्थित रहे
सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। चातुर्मास में दैनिक सत्संग का समय सुबह 9 से 10 बजे तक है। रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती एवं रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस जी ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।