मुख्यमंत्री के सख्त आदेश भी बेअसर! जमीन पर दबंगई के आगे बेबस जिम्मेदार, न्याय की आस में दर-दर भटक रहा पीड़ित भाजपा बूथ अध्यक्ष
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#हरदोई: प्रदेश सरकार द्वारा अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई और भूमि विवादों के त्वरित निस्तारण के लगातार दिए जा रहे निर्देश जमीनी स्तर पर कितने प्रभावी हैं, इसका एक और उदाहरण हरदोई जनपद के कोतवाली बेनीगंज क्षेत्र के ग्राम जमुनिया, पोस्ट चठिया से सामने आया है। यहां वर्षों से पैतृक भूमि के विवाद में उलझा एक परिवार न्याय की आस लगाए दर-दर भटकने को मजबूर है। पीड़ित का आरोप है कि राजस्व विभाग द्वारा नाप कर उसके हिस्से की भूमि सुपुर्द किए जाने के बावजूद विपक्षियों ने रातों-रात खेत जोतकर उसमें खरीफ की फसल बो दी और पुलिस भी अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सकी।
पीड़ित रामस्वरूप पुत्र शिवराम, जो भारतीय जनता पार्टी के बूथ संख्या 05 झरोइया से बूथ अध्यक्ष भी हैं, ने कोतवाली बेनीगंज में दिए गए शिकायती पत्र में बताया कि उनके रिश्ते के भाई रामकुमार पुत्र स्वर्गीय गनेश, राजेंद्र व राजू पुत्र स्वर्गीय रामदयाल तथा सर्वेश पुत्र स्वर्गीय रामदीन के साथ पैतृक सामलाती भूमि के बंटवारे को लेकर वर्षों से विवाद चला आ रहा है। सभी लोग गाटा संख्या 505, 506 सहित अन्य भूमि के सह-खातेदार हैं।
रामस्वरूप के अनुसार, विपक्षी बिना विधिवत पैमाइश और बंटवारे के ही जमीन पर मनमाने ढंग से कब्जा करने लगे थे। इसको लेकर उन्होंने 16 जुलाई 2026 को पुलिस चौकी प्रताप नगर में प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई थी। इसके बाद 29 जुलाई 2026 को क्षेत्रीय लेखपाल एवं राजस्व टीम ने मौके पर पहुंचकर भूमि की पैमाइश की और उनके हिस्से की जमीन चिन्हित कर उन्हें सुपुर्द कर दी।
लेकिन पीड़ित का आरोप है कि अगले ही दिन जब वह अपने हिस्से की भूमि की जुताई करने पहुंचे तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। रातों-रात विपक्षियों ने उनके हिस्से की भूमि पर ट्रैक्टर चलवाकर जुताई करा दी और खरीफ की फसल, जिसमें तिल्ली की बुवाई भी शामिल है, कर दी। उनका कहना है कि यह सब राजस्व विभाग की पैमाइश को खुलेआम चुनौती देने और प्रशासनिक व्यवस्था को ठेंगा दिखाने जैसा है।
रामस्वरूप का आरोप है कि विपक्षी दबंगई के बल पर लगातार उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कोतवाली में शिकायत देने के बावजूद पुलिस की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे विपक्षियों के हौसले और बुलंद हो गए हैं। उनका दावा है कि अब विपक्षी उन्हें धमकाने के साथ-साथ हमलावर होने का भी प्रयास कर रहे हैं, जिससे उनका परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन बिताने को विवश है।
यह मामला एक बार फिर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। जब राजस्व विभाग स्वयं भूमि की पैमाइश कर किसी पक्ष को उसका हिस्सा सौंप देता है, तब भी यदि दबंग तत्व रातों-रात कब्जा कर फसल बो दें और पीड़ित न्याय के लिए थाने से लेकर अधिकारियों के चक्कर लगाने को मजबूर हो जाए, तो शासन की मंशा और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर साफ दिखाई देता है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेकर निष्पक्ष जांच कराता है और पीड़ित को न्याय दिलाने के साथ अवैध कब्जे के आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है। फिलहाल, न्याय की उम्मीद में भटक रहे पीड़ित की आंखें प्रशासन की ओर टिकी हैं।
#रिपोर्ट: पुनीत मिश्रा/बेनीगंज
Hardoi, Hardoi | Aug 6, 2026