➡️ वंदे मातरम महज गीत नहीं, राष्ट्र चेतना का उद्घोष है" - विधायक श्री शैलेंद्र जैन
➡️ युवाओं को भारत के गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेनी चाहिए - कुलगुरु प्रो. विनोद मिश्र
➡️ राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण से ही भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर होगा - सुनील देव
➡️ शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में 'वंदे मातरम' पर आयोजित हुआ राष्ट्रीय सेमिनार
वंदे मातरम् के 150वें जयंती वर्ष के अवसर पर भारत के स्वाधीनता आंदोलन एवं राष्ट्रीय एकीकरण में वंदे मातरम् की भूमिका और महत्व से युवाओं को अवगत कराने के उद्देश्य से शासकीय कला एवं वाणिज्य अग्रणी महाविद्यालय, सागर में 'पीएम उषा' सॉफ्ट कंपोनेंट परियोजना के अंतर्गत "जनमानस का केंद्र बिंदु: वंदे मातरम" विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य आयोजन सागर विधायक शैलेंद्र कुमार जैन के मुख्य आतिथ्य व रानी अवंतीबाई राजकीय विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. विनोद कुमार मिश्र की अध्यक्षता में किया गया।
प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता के निर्देशन में आयोजित इस सेमिनार श्री राम दरबार मंदिर, मकरोनिया के महंत श्री केशवगिरी जी महाराज, उच्च शिक्षा विभाग के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक डॉ. आर.के. गोस्वामी तथा सामाजिक समरसता संघ के क्षेत्रीय संयोजक श्री सुनील देव एवं पीएम उषा प्रभारी डॉ. इमराना सिद्दीकी मंचासीन रहे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में आमंत्रित अतिथियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर सेमिनार का विधिवत शुभारंभ किया। तत्पश्चात, छात्र-छात्राओं द्वारा सुमधुर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। महाविद्यालय परिवार द्वारा मुख्य अतिथि, अध्यक्ष एवं विशिष्ट अतिथियों का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्रम तथा स्मृति चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर भावभीना स्वागत एवं सम्मान किया गया।
स्वतंत्रता संग्राम की ऊर्जा और राष्ट्र भक्ति का प्रतीक है 'वंदे मातरम': शैलेंद्र जैन
मुख्य अतिथि विधायक शैलेंद्र कुमार जैन ने अपने संबोधन में वंदे मातरम के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वंदे मातरम महज एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता की पावन स्तुति और हमारी राष्ट्र चेतना का मुख्य उद्घोष है। उन्होंने कहा कि "भारत भूमि हमारे लिए केवल माटी का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और जीवंत भारत माता का स्वरूप है। स्वतंत्रता संग्राम के दौर में वंदे मातरम विचारों, कोईसंदेशों और अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम बना। देश के महान क्रांतिकारियों ने इसी उद्घोष के साथ राष्ट्र को आजादी दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि "राष्ट्र की जय चेतना का नाम वंदे मातरम, राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा का गान वंदे मातरम है। उन्होंने उपस्थित युवाओं व विद्यार्थियों से आह्वान किया कि नियमित पाठ्यक्रम की पढ़ाई के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक को राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' पूरी निष्ठा के साथ कंठस्थ होना चाहिए और यही संकल्प लेकर यहाँ से जाना चाहिए।
➡️ इतिहास ही राष्ट्र की वास्तविक नींव: प्रो. मिश्र
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो. विनोद कुमार मिश्र ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की नींव उसका इतिहास होता है। युवाओं को भारत के गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ को स्वाभिमान और एकात्मभाव की अभिव्यक्ति बताते हुए कहा कि बंग-भंग आंदोलन में इस गीत ने राष्ट्रीय एकता को मजबूती दी। इसे कंठस्थ करना और गाना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है।
अतिथियों के प्रति स्वागत उद्बोधन देते हुए प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने महाविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों और सेमिनार की रूपरेखा रखते हुए सभी का आभार व स्वागत व्यक्त किया। आयोजन की औचित्यता पर प्रकाश डालते हुए पीएम उषा परियोजना की संयोजक डॉ. इमराना सिद्दीकी ने सॉफ्ट कंपोनेंट योजना के अंतर्गत युवाओं में राष्ट्रीय मूल्यों, सांस्कृतिक चेतना और वैचारिक संवर्धन के महत्व को रेखांकित किया।
संगोष्ठी के संयोजक एवं उद्घाटन सत्र के संचालक डॉ. अमर कुमार जैन ने संगोष्ठी के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए वंदे मातरम् को राष्ट्रीय उद्घोष तथा विदेशी दासता से मुक्ति की ललकार बताया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के प्रत्येक चरण में वंदे मातरम् ने जनसैलाब को आंदोलन से जोड़ने और जनचेतना जागृत करने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
बुजुर्गों के अनुभव से भविष्य संवारें युवा: महंत केशवगिरी
श्री राम दरबार मंदिर के महंत केशवगिरी जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में युवाओं को अपने कर्तव्यों पर आत्ममंथन करने की सलाह दी। उन्होंने 'जैसी संगत, वैसी बरकत' का उल्लेख करते हुए युवाओं को वरिष्ठजनों के अनुभवों से मार्गदर्शन लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
स्वाधीनता संग्राम की मुख्य प्रेरणा शक्ति रहा 'वंदे मातरम्': सुनील देव
मुख्य वक्ता एवं सामाजिक समरसता संघ के क्षेत्रीय संयोजक श्री सुनील देव ने 'वंदे मातरम्' के ऐतिहासिक संदर्भों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 1896 के कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार इसका सार्वजनिक गायन हुआ था, जिसके बाद 1905 के बंग-भंग व स्वदेशी आंदोलन में इसने जन-जागरण का काम किया। वन्देमातरम् क्रांति की चेतना का मंत्र बना । बंगभंग आंदोलन के समय ये अधिक प्रतिष्ठित हुआ तथा अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में इस गीत ने महामंत्र का कार्य किया ।उन्होंने कहा कि राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण से ही भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर होगा।
कार्यक्रम के दौरान राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा एकात्म मानव दर्शन विकसित : भारत 2047 विषय पर पिछले दिनों आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार पर आधारित पुस्तक का विमोचन तथा स्वतंत्रता दिवस की जिला स्तरीय परेड में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम एवं द्वितीय स्थान हासिल करने वाले छात्र एवं छात्राओं की एनसीसी यूनिट्स को मुख्य अतिथि विधायक शैलेंद्र कुमार जैन एवं कुलगुरू प्रो. विनोद कुमार मिश्र सम्मानित किया गया। साथ ही वंदे मातरम् कार्यक्रम के अंतर्गत महाविद्यालय में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया।
विभिन्न सत्रों में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार के प्रथम वैचारिक सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जी.एस. चौबे ने की। उन्होंने शहीदों के संस्मरण सुनाते हुए स्वतंत्रता सेनानियों की वंदे मातरम् के प्रति आत्मीयता और राष्ट्रसमर्पण की भावना का उल्लेख किया। सारस्वत वक्ता डॉ. कमलेश दुबे ने वंदे मातरम् गीत की प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किए। विशिष्ट अतिथि डॉ. नीलिमा पिंपलापुरे ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रगीत राष्ट्रभक्ति एवं देश के प्रति समर्पण की भावना उत्पन्न करता है। डॉ. शोभा सराफ ने भी वंदे मातरम् के विभिन्न आयामों पर अपने विचार व्यक्त किए। इस सत्र का संचालन डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. अभिलाषा जैन ने किया।
द्वितीय वैचारिक सत्र का विषय ‘वंदे मातरम् : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा शक्ति’ तथा कवि सम्मेलन के रूप में रहा। इस सत्र के अध्यक्ष प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक एवं साहित्यकार पं. शुकदेव प्रसाद तिवारी ने कहा कि अंग्रेजी शासनकाल में लाठियांबरसती थीं, गोलियां चलती थीं, लोग जेल में बंद होते थे और वंदेमातरम कहते जाते थे। इस मंत्र ने पराधीन भारत में प्राण जागृत किये। यातनाएं सहकर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने वंदे मातरम का उद्घोष नहीं छोड़ा। बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित आनंदमठ का यह गीत स्वतंत्रता संग्राम का प्राण बना। उन्होंने कहा कि 'मदर इज ग्रेटर दैन गॉड'—माँ का दर्जा ईश्वर से भी ऊँचा है और हमने अपने देश को भारत माता मानकर उसकी वंदना की है। अपने विद्यार्थी जीवन के संस्मरण साझा करते हुए उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में वंदे मातरम् का उद्घोष करना भी अंग्रेजी शासन के विरुद्ध प्रतिरोध का प्रतीक माना जाता था। सैकड़ों कथाकारों ,लेखकों, साहित्यकारों ने राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आज हम वंदे मातरम् का उत्सव मना रहे हैं, क्योंकि यह हमारे राष्ट्रीय सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक है।
इस सत्र में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। प्रसिद्ध शायर अशोक मिज़ाज़ एवं आदर्श दुबे ने अपनी शायरी से सभागार को आह्लादित किया। इसी क्रम में पुष्पेंद्र दुबे, नलिन जैन, ऊषा वर्मन, शशि दीक्षित, रितु त्रिपाठी, डॉ. शुचिता अग्रवाल तथा एम.एससी. गणित की छात्रा प्रतिमा दांगी ने अपनी रचनाओं की प्रभावपूर्ण प्रस्तुति दी।
सेमिनार के समापन सत्र की मुख्य अतिथि एवं वुमन राइट्स संस्था की प्रदेश अध्यक्ष अनुश्री शैलेंद्र जैन ने अपने संबोधन में कहा कि जन्मभूमि जननी से भी बढ़कर होती है। इसी उदात्त भावना को ध्यान में रखते हुए आजादी की लड़ाई के दौर में 'वंदे मातरम' गीत की रचना की गई थी, जो आज भी भारत के प्रत्येक नागरिक का स्वाभिमान और गौरव है। उन्होंने वंदे मातरम गीत से संबंधित क्विज प्रतियोगिता के माध्यम से छात्र-छात्राओं से प्रश्न पूछ कर जवाब मांगे तथा सही जवाब देने वाले विद्यार्थियों को स्वयं की ओर से लाए गए उपहार भेंट कर सम्मानित किया। सत्र का संचालन डॉ. अमर कुमार जैन तथा आभार डॉ. प्रज्ञा दुबे ने व्यक्त किया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ गोपा जैन, डॉ. विनय कुमार शर्मा, डॉ संगीता मुखर्जी, डॉ प्रतिभा जैन, डॉ अभिलाषा जैन, डॉ शुचिता अग्रवाल, डॉ संगीता कुंभारे, डॉ. संदीप सबलोक, डॉ. अंकुर गौतम, डॉ. संदीप तिवारी, डॉ. नीलम सिंह, वसुंधरा गुप्ता एवं लेफ्टिनेंट डॉ जय नारायण यादव सहित महाविद्यालय के प्राध्यापकों, कर्मचारियों, एनसीसी कैडेट्स एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की सहभागिता रही। कार्यक्रम ने युवाओं में राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता, स्वाभिमान एवं अपने गौरवशाली स्वतंत्रता इतिहास के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने का प्रभावी संदेश दिया।
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Sagar, Madhya Pradesh | Sep 3, 2026