आज का सवाल सिर्फ पाकिस्तान से नहीं है...
सवाल आपके मोबाइल से है।
क्योंकि जासूसी का तरीका बदल रहा है।
अब जरूरी नहीं कि कोई संदिग्ध व्यक्ति सीमा पार से आए...
वह आपके मोबाइल की स्क्रीन पर भी दिखाई दे सकता है।
एक अनजान WhatsApp मैसेज...
एक सोशल मीडिया फ्रेंड रिक्वेस्ट...
घर बैठे हजारों रुपये कमाने का ऑफर...पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) और पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव्स (PIO) भारतीय युवाओं को ठगने, अपने जाल में फंसाने और संवेदनशील जानकारियां चुराने के लिए नित नए डिजिटल पैंतरे अपना रहे हैं।
किन-किन तरीकों से युवाओं को निशाना बना रहे हैं PIO एजेंट?
* धार्मिक और मजहबी भावनाओं का दुरुपयोग: पाकिस्तान के एजेंट अक्सर धर्म और मजहब का सहारा लेकर युवाओं का माइंडवॉश (ब्रेनवॉश) करते हैं। उन्हें धार्मिक रूप से भड़काकर, झूठी कट्टरपंथी बातों में उलझाकर और उकसाकर अपने ही देश के खिलाफ जासूसी करने के लिए तैयार किया जाता है।
* +92 कोड से फर्जी कॉल्स और मैसेज: +92 (पाकिस्तान का कंट्री कोड) या अन्य अंतरराष्ट्रीय नंबरों से युवाओं को कॉल्स और WhatsApp मैसेज आ रहे हैं। इनमें केबीसी (KBC), लॉटरी, कार जीतने या भारी कैश प्राइज का लालच दिया जाता है। इनाम की रकम क्लेम करने के नाम पर प्रोसेसिंग फीस मांगी जाती है या फर्जी लिंक पर क्लिक करवाकर मोबाइल हैक कर लिया जाता है।
* सोशल मीडिया पर हनीट्रैप (Honeytrap): संदिग्ध एजेंट फेक प्रोफाइल (खासकर महिलाओं के नाम से) बनाकर Facebook, Instagram, Telegram पर दोस्ती करते हैं। धीरे-धीरे भावनात्मक या अश्लील बातचीत के जरिए युवाओं को ब्लैकमेल करने लायक सामग्री जुटा लेते हैं।
* पार्ट-टाइम जॉब और ऑनलाइन अर्निंग का लालच: युवाओं को वर्क-फ्रॉम-होम, डेटा एंट्री, या टेलीग्राम टास्क के नाम पर पैसों का लालच दिया जाता है। बाद में उनसे छोटी-मोटी जासूसी, फोटो या लोकेशन शेयर करने को कहा जाता है।
* फर्जी लोन और बेटिंग ऐप्स: अवैध ऐप्स के जरिए युवाओं को कर्ज या सट्टेबाजी के जाल में फंसाया जाता है और बाद में ब्लैकमेल किया जाता है।
PIO के चक्कर में फंसने से युवाओं को क्या नुकसान हो रहे हैं?
* कैरियर और भविष्य पूरी तरह बर्बाद: देशविरोधी या जासूसी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (OSA) के तहत सख्त कार्रवाई होती है। जेल जाने के साथ ही सरकारी नौकरी, पासपोर्ट और विदेश जाने के सारे रास्ते हमेशा के लिए बंद हो जाते हैं।
* बड़ा आर्थिक नुकसान और ब्लैकमेलिंग: लॉटरी के लालच में युवा अपनी या परिवार की जमा पूंजी गंवा बैठते हैं। एक बार जाल में फंसने पर एजेंट निजी फोटो/वीडियो के दम पर लगातार ब्लैकमेल करते हैं।
* मानसिक तनाव और सामाजिक बदनामी: ठगी और ब्लैकमेलिंग का शिकार होने के बाद युवा डिप्रेशन में चले जाते हैं। मामला सामने आने पर परिवार को भी भारी सामाजिक अपमान झेलना पड़ता है।
* राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा: जाने-अनजाने में शेयर की गई छोटी से छोटी जानकारी भी देश और सेना की सुरक्षा के लिए घातक साबित हो सकती है।
सुरक्षा एजेंसियों की युवाओं से अपील
* धार्मिक बहकावे से बचें: किसी भी व्यक्ति, संगठन या सोशल मीडिया ग्रुप के धार्मिक और उन्मादी भड़कावे में न आएं। देश की अखंडता और सुरक्षा सबसे पहले है।
* +92 नंबरों से रहें सावधान: +92 कोड से आने वाली किसी भी अनजानी कॉल, लॉटरी वाले मैसेज या WhatsApp लिंक को तुरंत इग्नोर, ब्लॉक और रिपोर्ट करें।
* लॉटरी या मुफ्त इनाम के झांसे में न आएं: बिना किसी प्रतियोगिता में भाग लिए कोई लॉटरी नहीं लगती। किसी को भी लॉटरी के नाम पर पैसे न ट्रांसफर करें।
* अज्ञात फ्रेंड रिक्वेस्ट न स्वीकारें: सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती और संवेदनशील फोटो/वीडियो शेयर करने से बचें।
*