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Golden Kiran News

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कुरुक्षेत्र अनाज मंडी में धान की आवक हुई शुरू,सचिव बोले-मंडी में सीजन को लेकर तैयारियां लगभग पूरी,किसानों को नहीं आने दी जाएगी कोई भी समस्या
भकियू नेता पहुचे कुरुक्षेत्र अनाज मंडी,बोले-सीजन को लेकर नही कोई तैयारी,सुने क्या कहा..
बंदी सिखों की रिहाई के लिए HSGMC के प्रधान जगदीश सिंह झींडा बैठे धरने पर,रिहाई की मांग,जेल भरो आंदोलन की दी चेतवानी
हरियाणा के पूर्व मंत्री के बेटे ने गगनजोत सिंह संधू ने सुसाइड कियाः चंडीगढ़ में फार्म हाउस पर खुद को गोली मारी; कुरुक्षेत्र के गांव गुमथला गढू से सरपंच रह चुके
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कुरुक्षेत्र में निजी बस की रफ्तार का कहर,16 वर्षीय शिवानी टायर तले कुचली,अधमरी लड़की को छोड़कर चालक हुआ फरार
न खाऊंगा न खांने ढूंगा, चेयरमैन करनराज सिंह तूर
किसानो के पैदल रोष मार्च करने से पहले ही DC विश्राम मीणा पहुचे किसानों की महापंचायत में,बोले-मांगो पर उच्च अधिकारियों से चल रही है बातचीत..
कुरुक्षेत्र में इकलौते भाई की हुई मौ.त... बहन ने आश्रम से कहा- “आप ही कर दो संस्कार, मेरे पास समय नहीं है”मौ.त के बाद भी नसीब नहीं हुआ अपनों का कंधा!
<nis:link nis:type=tag nis:id=शाहाबाद nis:value=शाहाबाद nis:enabled=true nis:link/> के गांव नलवी में किसान <nis:link nis:type=tag nis:id=जागरूकता nis:value=जागरूकता nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=कार्यक्रम nis:value=कार्यक्रम nis:enabled=true nis:link/> का हुआ आयोजन
<nis:link nis:type=tag nis:id=समस्या nis:value=समस्या nis:enabled=true nis:link/> को सुनते ही तुरंत <nis:link nis:type=tag nis:id=प्रभाव nis:value=प्रभाव nis:enabled=true nis:link/> से लिया अनाज मंडी का <nis:link nis:type=tag nis:id=जायजा nis:value=जायजा nis:enabled=true nis:link/>
HSGMC सदस्य गुरतेज सिंह का कमेटी के हेड आफिस के बारह धरना चौथे दिन भी रहा जारी,सीनियर मीत प्रधान बोले- अगर झींडा को कुर्सी इतनी प्यारी है तो वह कुर्सी उठाकर ले जाएं अपने घर
पिहोवा अनाज मंडी में 10 किसान संगठनों से हजारों किसान हुए इकट्ठा,महापंचायत हुई शुरू,15 सितंबर से धान की खरीद की मांग,ले सकते है बड़ा फैसला
कुरुक्षेत्र के गांव दौलतपुर के आशीष की मौ.. पर बवाल,परिजनों ने दोस्तो पर लगाए ह.त्या के आरोप,SP से मिले परिजन, CIA जांच की मांग
गुरु तेग बहादुर जी के समय के जत्थेदार भाई गलोरा मसंद के वंशज आज बदहाल,भाई गलोरा मसंद की पीढ़ी बोली-आज गुरु घर मे कुत्ते की इज्जत है लेकिन उनकी नही,200 एकड़ जमीन दान में देने वाले परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट
कुरुक्षेत्र जिले के झांसा के गोरखा गांव में पोल्ट्री फार्म के बाहर खेल रहे 19 माह के बच्चे को जहरीले सांप ने डंस लिया।
कुरुक्षेत्र में HSGMC के सदस्य गुरतेज सिंह का हेड ऑफिस के बाहर तीसरे दिन भी धरना रहा जारी,लगातार मिल रहा है समर्थन, प्रधान झींडा के इस्तीफे की मांग
<nis:link nis:type=tag nis:id=शाहाबाद nis:value=शाहाबाद nis:enabled=true nis:link/> से मार्किट कमेटी <nis:link nis:type=tag nis:id=चेयरमैन nis:value=चेयरमैन nis:enabled=true nis:link/> से धान की फ़सल को लेकर <nis:link nis:type=tag nis:id=खास nis:value=खास nis:enabled=true nis:link/> बातचीत
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लाडवा में Grand i10 कार के अंदर युवक का मिला श..व,ड्राइवर सीट पर युवक बेसुध हालत में मिला
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साझा नागरिकता: राष्ट्र निर्माण में भारतीय मुसलमानों की भूमिका

भारत विश्व के सबसे विविधतापूर्ण देशों में से एक है, जहाँ विभिन्न धर्मों, भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं के लोग रहते हैं। यह विविधता सदियों से विकसित हुई है, जिसमें विभिन्न समुदायों ने देश के सामाजिक, आर्थिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक जीवन में योगदान दिया है। भारतीय मुसलमान इस इतिहास का अभिन्न अंग हैं। वास्तुकला, साहित्य, व्यापार, शिक्षा, लोक प्रशासन और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को देखा जा सकता है। जैसे-जैसे भारत एक विकसित राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर हो रहा है, प्रश्न केवल यह नहीं है कि भारतीय मुसलमान देश के भविष्य में किस प्रकार समाहित होंगे, बल्कि यह है कि वे एक सशक्त, समावेशी और समृद्ध भारत के निर्माण में और अधिक योगदान कैसे दे सकते हैं।

साझा नागरिकता का विचार इस ज़िम्मेदारी को देखने का एक महत्वपूर्ण तरीका प्रदान करता है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक नागरिक, चाहे वह किसी भी धर्म, भाषा, जाति या क्षेत्र का हो, समान अधिकारों के साथ-साथ समान ज़िम्मेदारियाँ भी रखता है। नागरिकता केवल अधिकारों का आनंद लेने तक सीमित नहीं है। यह समाज में भागीदारी करने, दूसरों की सेवा करने और देश की प्रगति में योगदान देने से भी संबंधित है। भारतीय मुसलमानों के लिए, इसका अर्थ है शिक्षा, आर्थिक विकास, सामाजिक सेवा, सार्वजनिक जीवन और सामुदायिक कल्याण में सक्रिय भूमिका निभाना।

शिक्षा उन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है जिनमें समुदाय योगदान दे सकता है। आज के भारत में, बेहतर रोज़गार, आर्थिक अवसर और नेतृत्व के लिए शिक्षा अत्यावश्यक है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, वैज्ञानिक सोच, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों और तकनीकी कौशल पर अधिक ज़ोर देने से युवाओं को बेहतर भविष्य बनाने में मदद मिल सकती है। मुस्लिम समुदाय के शिक्षक, शोधकर्ता, विद्वान और पेशेवर भी भारत के बौद्धिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इसलिए, शिक्षा का समर्थन करना न केवल व्यक्तियों और परिवारों को बल्कि पूरे समाज को लाभ पहुँचाता है।

आर्थिक भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। मुस्लिम उद्यमी, कारीगर, व्यापारी, पेशेवर और श्रमिक देश भर की स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं में योगदान देते हैं। उद्यमिता, नई तकनीक, नवाचार और आधुनिक कौशल को अधिक समर्थन देने से रोजगार और आर्थिक अवसरों का सृजन हो सकता है। युवाओं को ऐसे व्यवसाय और उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है जो उनके समुदायों की सेवा करने के साथ-साथ व्यापक अर्थव्यवस्था में भी योगदान दें। आर्थिक मजबूती लोगों को सार्वजनिक और सामाजिक जीवन में अधिक आत्मविश्वास से भाग लेने में सक्षम बनाती है।

सामाजिक सेवा भी योगदान का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। दान और जरूरतमंदों की मदद करना इस्लामी शिक्षाओं में एक मजबूत स्थान रखता है, और कई व्यक्ति और संगठन पहले से ही शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और कल्याण के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। ऐसे प्रयास तब और भी अधिक प्रभावी हो सकते हैं जब वे समुदाय की सीमाओं से परे लोगों तक पहुँचें। छात्रवृत्तियाँ, स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम, कौशल प्रशिक्षण और वंचित परिवारों के लिए सहायता समाज के विभिन्न वर्गों के बीच विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देने में सहायक हो सकते हैं। समाज की सेवा तब अधिक सार्थक हो जाती है जब वह धार्मिक या सामाजिक मतभेदों के बजाय करुणा से प्रेरित हो।समावेशी भारत के लिए विविध समुदायों के बीच अधिक मेलजोल आवश्यक है। बहुलवाद का अर्थ केवल विभिन्न समुदायों का साथ-साथ रहना ही नहीं है। इसका अर्थ एक-दूसरे से संवाद करना, मिलकर काम करना और एक-दूसरे से सीखना भी है। भारतीय मुसलमान लंबे समय से भारत के साझा सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन का अभिन्न अंग रहे हैं। इस परंपरा को संवाद और मोहल्लों, विद्यालयों, कार्यस्थलों और नागरिक संस्थानों में नियमित मेलजोल के माध्यम से मजबूत किया जा सकता है। सामाजिक सद्भाव तभी बढ़ता है जब लोग एक-दूसरे को अलग-अलग समूहों के बजाय सह-नागरिक के रूप में देखते हैं।

संविधान स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुत्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के माध्यम से इस साझा नागरिकता के लिए एक समान आधार प्रदान करता है। ये मूल्य दैनिक व्यवहार के माध्यम से सार्थक बनते हैं। दूसरों की गरिमा का सम्मान करना, कानून का पालन करना, पूर्वाग्रहों को त्यागना और लोकतांत्रिक जीवन में रचनात्मक रूप से भाग लेना सभी नागरिकों का साझा दायित्व है। भारतीय मुसलमान, अन्य सभी समुदायों की तरह, नागरिक गतिविधियों में भाग लेकर, संवाद को प्रोत्साहित करके और युवाओं में जिम्मेदार नागरिकता को बढ़ावा देकर लोकतांत्रिक संस्कृति को मजबूत कर सकते हैं। डिजिटल युग ने नागरिकता में एक नया आयाम जोड़ दिया है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने लोगों के लिए संवाद करना और सूचनाओं का आदान-प्रदान करना आसान बना दिया है। साथ ही, गलत सूचना, रूढ़िवादिता और विभाजनकारी सामग्री ऑनलाइन तेजी से फैल सकती है। इसलिए सोशल मीडिया का जिम्मेदार उपयोग महत्वपूर्ण है। नागरिकों को जानकारी साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करनी चाहिए, अपमानजनक या भड़काऊ सामग्री से बचना चाहिए और सम्मानजनक चर्चाओं में भाग लेना चाहिए।

साझा नागरिकता का विचार अंततः एक सरल सिद्धांत पर आधारित है:

किसी भी समुदाय की प्रगति देश की समग्र प्रगति से गहराई से जुड़ी होती है। भारतीय मुसलमानों की समृद्ध विरासत है और भारत के विकास में उनका लंबा योगदान रहा है। शिक्षा, उद्यमशीलता, महिलाओं की भागीदारी, सामाजिक सेवा, सामुदायिक संबंध और संवैधानिक मूल्यों पर अधिक ध्यान देकर वे देश के भविष्य में और भी सशक्त योगदान दे सकते हैं। यह भागीदारी समान नागरिकता की स्वाभाविक अभिव्यक्ति है। समावेशी भारत का निर्माण केवल सरकारों द्वारा नहीं किया जा सकता। इसके लिए ऐसे नागरिकों की आवश्यकता है जो यह समझते हों कि उनकी अपनी प्रगति देश की प्रगति से जुड़ी है। लक्ष्य एक ऐसा समाज होना चाहिए जिसमें विविधता का सम्मान हो और प्रत्येक नागरिक को गरिमा, अवसर और भारत के साझा भविष्य में योगदान देने का उचित मौका मिले।

अल्ताफ मीर

जामिया मिलिया इस्लामिया से पीएच.डी.
पिहोवा पुलिस ने बुलेट से पटाखे बजाने वाले चालक पर कसा शिकंजा, काटा ₹30,500 का चालान
कुरुक्षेत्र में HSGMC के हेड आफिस के बाहर धरने पर बैठे सदस्य गुरतेज सिंह के समर्थन में आए केमटी के 7 सदस्य,प्रधान झींडा के इस्तीफे की मांग,बोले-प्रधान पूरी तरह हुआ नाकाम
वो 4 साल का बच्चा… जिसे साल 2006 में बोरवेल में गिरने के बाद पूरा देश देख रहा था, आज फिर आपके सामने है।

कुरुक्षेत्र के गांव हलदेडी का प्रिंस, जिसने बचपन में जिंदगी और मौत के बीच एक लंबी जंग लड़ी थी, आज बड़ा होकर आपके सामने है।

🙏 हौसले, जिंदगी और उम्मीद की एक ऐसी कहानी जिसे देश कभी नहीं भूल सकता।

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