51 लाख श्रद्धालुओं की सेवा करने वाले सफाई योद्धाओं को सलाम, सम्मान समारोह में बरसे फूल
हरिदास सेमिनरी में नगर निगम ने सफाईकर्मियों, समाजसेवियों और एनजीओ को किया सम्मानित; जितेंद्र मांझी और रंजीत मांझी को 5100-5100 रुपये की प्रोत्साहन राशि
गयाजी। पितृपक्ष मेला महासंगम-2026 के सफल आयोजन के बाद गया नगर निगम ने बुधवार को हरिदास सेमिनरी के ऑडिटोरियम में भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया। समारोह में देश-विदेश से पहुंचे करीब 51 लाख श्रद्धालुओं की सेवा में दिन-रात जुटे नगर निगम के सफाई योद्धाओं, कर्मचारियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, एनजीओ और समाजसेवियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर निगम की सशक्त स्थायी समिति के सदस्य सह पूर्व डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव ने की। मुख्य अतिथि के रूप में एसएसपी सुशील कुमार, सिटी एसपी अभिनव कुमार और डीडीसी मौजूद रहे। मेयर गणेश पासवान ने अतिथियों का गुलदस्ता और शॉल देकर स्वागत किया।
सेवा करने वालों को प्रशस्ति पत्र और अंगवस्त्र
पितृपक्ष मेले के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले लोगों को नगर निगम की ओर से प्रशस्ति पत्र और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मान पाने वालों में नगर निगम के कर्मचारी, सफाईकर्मी, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि और समाजसेवी शामिल रहे। सम्मान समारोह के बाद सभी के लिए भोज का भी आयोजन किया गया।
मेयर गणेश पासवान ने कहा कि पितृपक्ष मेला महासंगम को सफल बनाने में हर वर्ग का योगदान सराहनीय रहा। नगर निगम के कर्मचारियों ने दिन-रात मेहनत कर शहर को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी निभाई, जबकि समाजसेवियों ने निःशुल्क चिकित्सा शिविर, भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराईं। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, पार्षदों, मीडिया और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग के बिना इतने बड़े आयोजन को सफल बनाना संभव नहीं था।
श्रद्धालु का सोना लौटाने वाले दो कर्मचारियों को इनाम
नगर निगम ने बेहतर कार्य करने वाले कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए विशेष प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था की थी। इसी क्रम में तीर्थयात्री का सोना रबर डैम में गिर जाने के बाद उसे खोजकर सुरक्षित लौटाने वाले जितेंद्र मांझी और रामजी मांझी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। नगर आयुक्त ने दोनों कर्मचारियों को 5100-5100 रुपये की इनामी राशि, प्रशस्ति पत्र और शॉल प्रदान किया।
मेयर गणेश पासवान ने कहा कि कर्मचारियों की मेहनत, ईमानदारी और समर्पण ही किसी भी बड़े आयोजन की सफलता का आधार है। उन्होंने कहा कि जितेंद्र मांझी और रामजी मांझी ने ईमानदारी की मिसाल पेश की है। ऐसे कर्मचारियों का सम्मान अन्य लोगों को भी प्रेरणा देता है। उन्होंने भरोसा जताया कि दशहरा, दीपावली और छठ जैसे आगामी पर्वों में भी नगर निगम के कर्मचारी इसी उत्साह और जिम्मेदारी के साथ काम करेंगे।
सड़कों, नालियों, पेयजल और रोशनी पर रहा विशेष जोर
पूर्व डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि पितृपक्ष मेले की तैयारियां कई महीने पहले शुरू कर दी गई थीं। शहर की सड़कों और गलियों की मरम्मत, नालियों की सफाई, क्षतिग्रस्त ढक्कनों को बदलने, पेयजल और जलापूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने सहित कई कार्य कराए गए। मेला क्षेत्र में साफ-सफाई और रोशनी की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।
उन्होंने बताया कि लाइट एंड साउंड के माध्यम से गया की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता को देश-दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। विष्णुपद मंदिर के सामने भगवान विष्णु के चरण का अष्टधातु निर्मित सेल्फी प्वाइंट भी स्थापित किया गया, जो श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र रहा। मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न विभागों ने आपसी समन्वय के साथ काम किया।
सिर्फ 15 दिन नहीं, सालभर सुंदर बनेगा गयाजी
मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि भगवान विष्णु की पावन नगरी गयाजी में पितृपक्ष के दौरान लाखों श्रद्धालु पिंडदान करने आते हैं। वहीं, बोधगया भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली होने के कारण देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है। ऐसे में गया को केवल पितृपक्ष मेले के 15 दिनों तक ही नहीं, बल्कि पूरे साल स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने नगर निगम के कर्मचारियों, सफाई योद्धाओं, पार्षदों, एनजीओ, समाजसेवियों, युवाओं और मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयास से ही गया की पहचान को और बेहतर बनाया जा सकता है।
सम्मान समारोह के जरिए नगर निगम ने उन सभी लोगों के योगदान को सलाम किया, जिन्होंने सेवा भाव, मेहनत और समर्पण के साथ पितृपक्ष मेले को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। समारोह में यह संदेश भी स्पष्ट रहा कि किसी भी बड़े धार्मिक आयोजन की सफलता केवल प्रशासनिक व्यवस्था से नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी से सुनिश्चित होती है।
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