महडौरा प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था बेपटरी ! स्कूल पहुंचकर लौट गए बच्चे, शिक्षक-शिक्षिकाएं नदारद; जिम्मेदारों की कार्यशैली पर उठे सवाल
हरदोई: परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था सुधारने और बच्चों को
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विकासखंड कोथावां के महडौरा प्राथमिक विद्यालय में आज शिक्षकों की गैरमौजूदगी का मामला सामने आया। विद्यालय में पढ़ने की उम्मीद लेकर पहुंचे नौनिहालों को कथित तौर पर बिना पढ़ाई किए ही वापस घर लौटना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम ने विद्यालय की शैक्षिक व्यवस्था और जिम्मेदार शिक्षकों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार विद्यालय की इंचार्ज प्रधानाध्यापिका दीक्षा शुक्ला, सहायक अध्यापिका राधा और रेखा तथा शिक्षामित्र स्नेहलता व काशीराम विद्यालय में मौजूद नहीं थे। मौके पर मौजूद शिक्षामित्र रंजना ने बताया कि मौसम खराब होने के कारण विद्यालय पहुंचे बच्चों को वापस घर भेज दिया गया है। साथ ही उन्होंने अन्य अध्यापकों के छुट्टी पर होने की बात कही।
हालांकि, विद्यालय परिसर में भोजन के लिए किचन शेड का निर्माण कर रहे श्रमिकों ने अलग ही स्थिति बयां की। श्रमिकों के मुताबिक शिक्षामित्र रंजना भी लगभग दोपहर 12 बजे विद्यालय पहुंची थीं। इससे पहले विद्यालय में उनकी भी मौजूदगी नहीं थी। श्रमिकों के इस बयान के बाद विद्यालय के संचालन और शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।
मामले को लेकर खंड शिक्षा अधिकारी कोथावां कृष्ण कुमार से फोन पर वार्ता की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें प्रकरण की जानकारी है। इस संबंध में उन्होंने अपने कार्यालय के कर्मचारियों को संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया के लिए आदेशित कर दिया है।
बड़ा सवाल यह है कि आखिर बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी किसकी है? क्या मौसम खराब होने का हवाला देकर विद्यालय पहुंच चुके बच्चों को बिना पढ़ाई कराए वापस भेज देना उचित है? यदि शिक्षक अवकाश पर थे तो क्या नियमानुसार वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी? और यदि विद्यालय में शिक्षकों की अनुपस्थिति रही तो बच्चों की पढ़ाई की भरपाई कौन करेगा?
सरकार जहां परिषदीय शिक्षा को मजबूत बनाने, विद्यालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं इस तरह के मामले सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर करते हैं।
अब देखना यह होगा कि खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी किए जाने वाले कारण बताओ नोटिस के बाद केवल कागजी कार्रवाई होती है या फिर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करते हुए ठोस कार्रवाई भी की जाती है। फिलहाल महडौरा प्राथमिक विद्यालय का यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
Hardoi, Hardoi | Nov 1, 2026