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छतरपुर में विधायक ललिता यादव के तत्वावधान में विशाल मटकी फोड़ कार्यक्रम और शोभायात्रा निकाली गई हजारों श्रद्धालु सामिल हुए
श्रमजीवी पत्रकार संघ के मंच पर एसपी रजत सकलेचा ने की पत्रकारों कि सराहना..
विधायक ललिता यादव के तत्वावधान में विशाल मटकी फोड़ कार्यक्रम और शोभा यात्रा समिति हजारों श्रद्धालुओं की भीड़
VIP कल्चर खत्म करने की बात, फिर हूटर का भौकाल क्यों?

छतरपुर में नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति चौरसिया की गाड़ी पर हूटर को लेकर फिर सवाल, 2024 में भी कट चुका है चालान

छतरपुर। देश में VIP कल्चर खत्म करने की बात जब हुई थी, तब उम्मीद थी कि नेता जनता के बीच जाएंगे तो आम आदमी की तरह जाएंगे। गाड़ी से लाल-पीली बत्ती हटेगी, रुतबा कम होगा और जनता को यह एहसास होगा कि नेता भी उसी सड़क पर चलते हैं, जिस सड़क पर आम जनता चलती है।

लेकिन छतरपुर में सवाल फिर वही है—VIP कल्चर गया कहां? बस लाल बत्ती गई और उसकी जगह हूटर ने ले ली?

19 अप्रैल 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने सभी श्रेणी के वाहनों पर बीकन लाइट हटाने का फैसला किया था। सरकार ने साफ कहा था कि ऐसी बत्तियां VIP कल्चर का प्रतीक मानी जाती हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में इनका कोई स्थान नहीं होना चाहिए। हालांकि आपातकालीन सेवाओं को नियमों के तहत छूट दी गई थी।

अब बात आती है हूटर और सायरन की।

मध्य प्रदेश में हूटर लगाना हर जनप्रतिनिधि का अधिकार नहीं है। मध्य प्रदेश विधानसभा में जुलाई 2026 में परिवहन मंत्री ने बताया कि केंद्रीय मोटरयान नियम 1989 के नियम 119 और मध्यप्रदेश मोटरयान नियम 1994 के नियम 185 के अनुसार केवल पात्र वाहनों पर हूटर लगाने की अनुमति है। अपात्र वाहनों पर कार्रवाई का प्रावधान भी है।

यानी सवाल सीधा है—

नगर पालिका अध्यक्ष का पद क्या अपने आप हूटर का परमिट बन जाता है?

अगर नहीं, तो फिर गाड़ी पर हूटर क्यों?

और अगर अनुमति है, तो किस नियम के तहत? किस अधिकारी ने अनुमति दी? और अनुमति की अवधि कितनी है?

यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि छतरपुर नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति चौरसिया की सरकारी गाड़ी पर हूटर को लेकर जून 2024 में कार्रवाई की खबर सामने आ चुकी है। उस समय मजिस्ट्रेट चेकिंग के दौरान उनकी गाड़ी पर लगे हूटर का चालान काटे जाने की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी।

अब जरा रोस्टिंग समझिए—

जनता: मैडम, सड़क पर जगह नहीं है।

VIP गाड़ी: हटो... हूटर बज रहा है!

जनता: मैडम, सड़क में गड्ढे हैं।

VIP गाड़ी: पहले हूटर की आवाज सुनो, गड्ढे बाद में देखना!

जनता: मैडम, हम भी इसी शहर के नागरिक हैं।

हूटर: लेकिन पहचान तो VIP की होनी चाहिए!

मुद्दा मजाक का नहीं, नियम और बराबरी का है।

जब प्रधानमंत्री स्तर से VIP कल्चर खत्म करने की बात कही गई, जब सरकारें लगातार अनधिकृत हूटर पर चालान की कार्रवाई कर रही हैं, तो फिर किसी जनप्रतिनिधि के वाहन पर हूटर दिखाई देता है तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठेंगे।

और सबसे बड़ा सवाल प्रशासन से—

अगर हूटर वैध है तो उसकी अनुमति सार्वजनिक क्यों नहीं होती?

और अगर हूटर अवैध है तो कार्रवाई कब होगी?

क्योंकि लोकतंत्र में पद बड़ा हो सकता है, लेकिन कानून उससे बड़ा होता है।

जनता को सड़क पर यह महसूस नहीं होना चाहिए कि कोई गाड़ी हूटर बजाते हुए निकल रही है तो रास्ता इसलिए खाली करना है क्योंकि उसमें कोई नेता बैठा है।

VIP कल्चर खत्म करने की बात 2017 में हुई थी...
अब सवाल यह है कि छतरपुर में 2026 तक उसका असर कितना पहुंचा?

हूटर से भौकाल बनता है या सिर्फ नियमों पर सवाल खड़े होते हैं—यह फैसला अब प्रशासन और जनता को करना है।
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लाकेपिटल में श्रमजीवी पत्रकार संघ का सम्मेलन
*निर्मोही अखाड़ा के महंत पर हमला मारपीट और गोलीबारी का आरोप* 

 *चार लोगों पर जान से मारने का आरोप, महाराजपुर पुलिस ने मामला दर्ज कर तलाश शुरू की* 

 *सिंहपुर चरण पादुका  बुंदेलखंड के जलियांवाला बाग की घटना* 

महाराजपुर/सिंहपुर। छतरपुर जिले के महाराजपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम सिंहपुर स्थित प्रसिद्ध चरण पादुका हनुमान मंदिर में बीती रात महंत के साथ मारपीट और गोलीबारी किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई।

जानकारी के अनुसार, चरण पादुका स्थित श्री श्री 1008 हनुमान मंदिर, निर्मोही अखाड़ा के सदस्य एवं चरण सेवक महंत रामचरण दास के आश्रम में बीती रात करीब 12 बजे चार लोग पहुंचे। आरोप है कि सिंहपुर निवासी सुरेश दास मिश्रा, हंसपुरा निवासी बृजेश रिछरिया अपने दो अन्य साथियों के साथ आश्रम पहुंचे और महंत रामचरण दास के साथ मारपीट की। महंत ने इस दौरान अंधाधुंध गोलीबारी किए जाने का भी आरोप लगाया है।

 *मंदिर की जमीन को लेकर विवाद का आरोप* 

महंत रामचरण दास ने बताया कि उनका आरोपियों के साथ किसी प्रकार का व्यक्तिगत विवाद नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग मंदिर एवं आश्रम की जमीन पर लंबे समय से नजर रखे हुए हैं और करीब 25 एकड़ जमीन को लेकर पूर्व में भी विवाद की स्थिति बनती रही है।

महंत का आरोप है कि पूर्व में आश्रम के महंत के साथ भी मारपीट कर दबाव बनाने का प्रयास किया गया था। इसी विवाद के चलते आरोपित रात में आश्रम पहुंचे और उन्हें जान से मारने की नीयत से हमला किया। महंत के अनुसार, घटना के दौरान गोलीबारी की गई और मौके पर कारतूस के खोखे भी मिले हैं।

 *गंभीर हालत में अस्पताल रेफर* 

घटना के बाद महंत रामचरण दास किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से निकले। बाद में उन्हें उपचार के लिए महाराजपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां चिकित्सक डॉ. आलोक चौरसिया ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत को देखते हुए जिला अस्पताल छतरपुर रेफर कर दिया।

घटना की सूचना सुबह महाराजपुर थाना पुलिस को दी गई। महंत की शिकायत पर पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण, कथित कारतूस के खोखों सहित अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

फिलहाल घटना के पीछे का वास्तविक कारण क्या है, गोलीबारी किस हथियार से की गई और आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
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छतरपुर में 12 सितंबर को विशाल मटकी फोड़ कार्यक्रम और शोभायात्रा की तैयारी तेज, मोनू यादव ने क्षेत्रवासियों को किया आमंत्रित

छतरपुर। शहर के मेला ग्राउंड में विधायक ललिता यादव के तत्वावधान में आयोजित होने वाले विशाल मटकी फोड़ कार्यक्रम एवं भव्य शोभायात्रा को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है।

कार्यक्रम की तैयारियों के बीच मोनू यादव ने क्षेत्र की जनता से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में शामिल होने की अपील करते हुए आमंत्रित किया है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन शहर और क्षेत्र के लोगों के लिए उत्साह एवं उमंग का अवसर है।

आयोजकों द्वारा कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मेला ग्राउंड में होने वाले इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

विधायक ललिता यादव के तत्वावधान में होने वाले इस आयोजन को लेकर कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में खासा उत्साह नजर आ रहा है।
मंदिर विवाद में झूठी रिपोर्ट का आरोप, एसपी से निष्पक्ष जांच की मांग

छतरपुर। महाराजपुर थाना क्षेत्र के ग्राम सिंहपुर स्थित रामजानकी मंदिर को लेकर चल रहे विवाद में अब एक नया मोड़ सामने आया है। मंदिर से जुड़े सुरेश दास ने पुलिस अधीक्षक छतरपुर को आवेदन देकर रामचरन दास द्वारा उनके खिलाफ 10 सितंबर 2026 को महाराजपुर थाने में दर्ज कराई गई मारपीट की शिकायत को झूठा बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

सुरेश दास का आरोप है कि वह करीब डेढ़ माह से सिंहपुर गांव में नहीं रह रहे हैं। उनका कहना है कि मंदिर को लेकर पहले से विवाद चल रहा है और इसी विवाद के चलते उन्हें दबाव में लेने के उद्देश्य से उनके खिलाफ कथित तौर पर झूठी शिकायत कराई गई है।

आवेदन में सुरेश दास ने दावा किया है कि उनके गुरु महंत शिवलोचन दास सिंहपुर स्थित रामजानकी मंदिर के महंत थे और उन्होंने अपने जीवनकाल में मंदिर संबंधी वसीयत उनके नाम की थी तथा परंपरा के अनुसार उन्हें महंत घोषित किया था। सुरेश दास के अनुसार मंदिर के स्वामित्व से संबंधित मामला न्यायालय में भी विचाराधीन है।

सुरेश दास ने आरोप लगाया कि रामचरन दास ने छतरपुर के जानराय टौरिया के महंत भगवानदास श्रृंगारी के साथ मिलकर मंदिर पर कब्जा किया और अब उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराकर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

आवेदन में सुरेश दास ने यह भी कहा है कि जिस समय रामचरन दास द्वारा कथित घटना होने की बात कही जा रही है, उस समय वह अपने गांव के हेमंत तिवारी से मोबाइल पर बातचीत कर रहे थे। उन्होंने पुलिस से मोबाइल रिकॉर्ड और लोकेशन की जांच कर घटना के समय अपनी मौजूदगी की पुष्टि करने की मांग की है।

सुरेश दास ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की जांच एसडीओपी खजुराहो से कराने और निष्पक्ष जांच के आधार पर उन्हें न्याय दिलाने की मांग की है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस जांच में दोनों पक्षों के दावों में कितनी सच्चाई सामने आती है और मंदिर विवाद से जुड़े इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।
ब्रेकिंग न्यूज़। छतरपुर 
बस स्टैंड पर गरीब मजदूर पल्लेदार विजय पाल को पीटने का विडियो वायरल आरोप एक बार पहले भी अपहरण कर चुका है।।
सिटी कोतवाली पुलिस जांच में जुटी।।
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Video 14
वायरल ऑडियो को लेकर बड़ा मामला: पैसे मांगने के आरोप के बाद ग्राम पंचायत सचिव निलंबित

छतरपुर। जिले की कदवा ग्राम पंचायत से जुड़ा एक कथित वायरल ऑडियो इन दिनों चर्चा में है। ऑडियो में कथित तौर पर पैसे की मांग किए जाने की बात सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है।

जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत कदवा के सचिव सज्जन सिंह के खिलाफ जनसुनवाई के दौरान पैसे मांगने से संबंधित शिकायत सामने आई थी। शिकायत और वायरल ऑडियो के आधार पर मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) द्वारा सचिव सज्जन सिंह को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है।

हालांकि वायरल ऑडियो की वास्तविकता और उसमें मौजूद आवाज किसकी है, इसकी आधिकारिक तकनीकी पुष्टि की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। ऐसे में ऑडियो में लगाए जा रहे आरोपों को जांच के बाद ही अंतिम रूप से सही माना जा सकेगा।

इस कार्रवाई के बाद पंचायत विभाग में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। अब सवाल यह है कि वायरल ऑडियो और शिकायत की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और संबंधित अधिकारी मामले में आगे क्या कार्रवाई करते हैं।

नोट: वायरल ऑडियो के आधार पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान सामने आने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।
लवकुशनगर में मारपीट और धमकी के आरोप, पीड़ित ने पुलिस-प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार

छतरपुर। जिले के लवकुशनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम टहानगा, चौकी अक्टोहा निवासी ठाकुरदास अहिरवार के साथ कथित मारपीट, जातिसूचक गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी का मामला सामने आया है। पीड़ित पक्ष ने पुलिस और जिला प्रशासन से मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पीड़ित के अनुसार, घटना में दुष्यंत रावत उर्फ पुट्टी रावत निवासी ग्राम पीरा, शैलेश रिछारिया उर्फ शीलू रिछारिया निवासी ग्राम टहानगा और मायाराम यादव निवासी ग्राम सुरा के शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि घटना के बाद भी उसे लगातार धमकियां दी जा रही हैं और आरोपी कथित तौर पर कानून का भय नहीं मान रहे हैं। मामले को लेकर पुलिस एवं प्रशासन से आरोपियों के खिलाफ जांच कर एससी/एसटी एक्ट सहित संबंधित धाराओं में कार्रवाई की मांग की गई है।

साथ ही पीड़ित ठाकुरदास अहिरवार की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की मांग भी उठाई गई है। शिकायतकर्ता पक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो जनता के साथ सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया जा सकता है।

फिलहाल मामले में पुलिस की ओर से क्या कार्रवाई की गई है और लगाए गए आरोपों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, यह स्पष्ट होना बाकी है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और आरोपी पक्ष का बयान सामने आना भी बाकी है।

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करणी सेना के लिए क्या कहा आरडी प्रजापति ने पूरे पाॅडकास्ट को सुनें...

आर डी प्रजापति ने क्यों कहा हम आरक्षण कि लड़ाई हम क्यों लड़ें....
 
आर डी प्रजापति ने कथावाचक महाराज को जबरन मूत्र और गोबर खिलाने कि क्यों कहा..

एक घंटे के पाॅडकास्ट का इंतजार करें जल्द आने वाला है....
छतरपुर। लगातार वर्षा होने गरीब मजदूर परिवार का कच्चा घर अचानक डहडहा कर गिर गया जिससे दो माह और 15 साल कि दबने से मौत हो गई और मां गंभीर रूप से घायल हो गई।

लगभग 15 साल से ज्यादा आवास योजना को लागू हुए हो गया लेकिन सरपंचों और सचिवों के मतभेद के चलते वास्तविक लाभार्थी गरीबों को आवास योजना का लाभ नहीं मिलता जिसका खामियाजा इस परिवार को भुगतना पड़ गया।

मनरेगा मजदूर योजना का लाभ इस परिवार को मिलता तो शायद दो माह बच्ची को छोड़कर गरीब बाप को परदेश मजदूरी करने नहीं जाना पड़ता।

सिस्टम ने इस परिवार को खा लिया। संवेदना व्यक्त करने से क्या परिवार कि खुशियों को वापस लाया जा सकता है। क्या गरीबी हट जाएगी।
आवास योजना के दावों के बीच कच्चा घर बना मौत का मलबा!

छतरपुर में दो मासूमों की मौत के बाद सिस्टम से बड़ा सवाल—आखिर गरीबों के पक्के घर कब बनेंगे?

छतरपुर, मध्य प्रदेश।
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य था कि गरीब परिवारों को सिर पर पक्की छत मिले, ताकि बारिश, आंधी और प्राकृतिक आपदा में उनका परिवार सुरक्षित रह सके। लेकिन छतरपुर जिले से सामने आया दर्दनाक मामला इस पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

हिनौता थाना क्षेत्र की हथवा पंचायत के क्वटा गांव में लगातार बारिश के बीच एक गरीब मजदूर परिवार का कच्चा मकान रात करीब 3 बजे अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे में मलबे में दबने से दो माह की मासूम शिवांशी और 15 वर्षीय रचना केवट की मौत हो गई, जबकि परिवार की महिला हेमकुमारी गंभीर रूप से घायल बताई जा रही हैं और उनका जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।

अब सवाल सिर्फ इस हादसे का नहीं है...
सवाल उस सिस्टम का है, जो गरीबों के लिए पक्के मकान की योजनाएं चलाने का दावा करता है।

बताया जा रहा है कि मृतक मासूम शिवांशी के पिता रामरतन केवट दिल्ली में मजदूरी करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि उन्हें रोजी-रोटी के लिए घर से दूर रहना पड़ता है।

जनसुनवाई में आवास की शिकायतें... फिर भी गरीबों की छत कच्ची क्यों?

छतरपुर कलेक्ट्रेट में हर मंगलवार होने वाली जनसुनवाई में आवास योजना को लेकर लगातार शिकायतें आने का दावा किया जाता है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पात्र गरीब परिवार योजना के लाभ से वंचित हैं, जबकि अपात्र लोगों को लाभ मिलने की शिकायतें भी सामने आती रहती हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग आरोप लगाते हैं कि आवास योजना का लाभ पात्रता के बजाय पहचान, पहुंच और प्रभाव के आधार पर मिल रहा है। कुछ शिकायतों में रिश्वत मांगने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए जाते हैं।

लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल है—
अगर ये शिकायतें लगातार जनसुनवाई में पहुंच रही हैं तो इनका निराकरण कितनी गंभीरता से होता है?

और अगर पात्र परिवार वास्तव में योजना से वंचित हैं, तो उनकी पात्रता की जांच कौन कर रहा है?

कागजों में पक्के मकान, जमीन पर कच्ची दीवारें?

सरकार की योजनाओं का असली मकसद तभी पूरा होगा, जब उसका लाभ उस परिवार तक पहुंचे जिसके घर की छत सच में खतरे में है।

क्वटा गांव की घटना के बाद प्रशासन से पूछा जाना जरूरी है—

क्या इस परिवार का प्रधानमंत्री आवास योजना में नाम था?
अगर नाम था तो आवास क्यों नहीं मिला?
अगर नाम नहीं था तो पात्रता की जांच किसने की?
क्या पंचायत स्तर पर परिवार का सर्वे हुआ था?
जनसुनवाई में आवास संबंधी शिकायतों पर कितने परिवारों को वास्तव में आवास मिला?
और क्या इस पूरे मामले की जिम्मेदारी तय होगी?

क्योंकि योजनाएं सिर्फ फाइलों और आंकड़ों में सफल होने से गरीब की जिंदगी सुरक्षित नहीं होती।

एक पक्का मकान शायद इन दो मासूमों की जिंदगी नहीं बचा पाता—ऐसा निश्चित तौर पर कहना संभव नहीं है। लेकिन यह सवाल जरूर है कि अगर परिवार को समय पर सुरक्षित आवास मिला होता, तो क्या इस तरह के हादसे का जोखिम कम किया जा सकता था?

अब जरूरत सिर्फ संवेदना जताने की नहीं, बल्कि जांच करने और जिम्मेदारी तय करने की है।

आवास योजना गरीब के लिए अधिकार और सुरक्षा की योजना है या फिर सिर्फ कागजों में दिखाई देने वाली सरकारी उपलब्धि?

छतरपुर प्रशासन को इस सवाल का जवाब देना चाहिए।
शराब के नशे में गाली-गलौज और धमकी देने के आरोप, महिला ने एसपी से लगाई कार्रवाई की गुहार

छतरपुर। राजनगर थाना क्षेत्र में एक महिला ने पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति पर शराब के नशे में आए दिन गाली-गलौज करने, अभद्र व्यवहार और धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर महिला ने 9 सितंबर 2026 को पुलिस अधीक्षक छतरपुर के नाम शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच और उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत में राजनगर निवासी श्रीमती आभा खरे, पत्नी स्वर्गीय जगदीश प्रसाद खरे ने आरोप लगाया है कि उनके मोहल्ले में रहने वाला प्रभात अवस्थी उर्फ निक्की महाराज, पिता जमना अवस्थी, कथित तौर पर शराब पीने का आदी है और नशे की हालत में मोहल्ले की महिलाओं व लड़कियों के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करता है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसके साथ भी कई बार इसी तरह की हरकत की जा चुकी है।

2018, 2019 और 2026 में शिकायत/FIR का हवाला

महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ स्थानीय थाना राजनगर में पहले भी शिकायतें की जा चुकी हैं। दस्तावेज में नवंबर 2018, अक्टूबर 2019 तथा 20 अगस्त 2026 की FIR का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद आरोपी के खिलाफ अपेक्षित त्वरित कार्रवाई नहीं हुई और कुछ समय बाद सामान्य कार्रवाई कर मामला छोड़ दिया जाता है।

घर के बाहर शराब के नशे में हंगामा करने का आरोप

शिकायत में महिला ने बताया कि वह घर में अकेली महिला है और उसकी करीब 20 वर्षीय बेटी भी उसके साथ रहती है। आरोप है कि जब संबंधित व्यक्ति शराब के नशे में उसके दरवाजे पर आता है और गालियां देता है, तो वह डर के कारण घर से बाहर नहीं निकल पाती। महिला ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है।

महिला ने यह भी बताया कि वह सरकारी शिक्षिका है और प्रतिदिन ड्यूटी के लिए घर से बाहर जाती है। शिकायत के अनुसार, आरोपी के कथित व्यवहार के कारण उसे मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उसके शैक्षणिक दायित्व भी प्रभावित हो रहे हैं।

निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग

महिला ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर उचित कानूनी कार्रवाई करने तथा आरोपी की कथित हरकतों से राहत दिलाने की मांग की है। शिकायत की प्रतिलिपि कलेक्टर छतरपुर और थाना प्रभारी राजनगर को भी दिए जाने का उल्लेख दस्तावेज में है।

हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
छतरपुर शहर में रात के अंधेरे में 2 बजे सड़क निर्माण...

कभी ऐसा चमत्कार ग्रामीण क्षेत्रों में करके देखो गांव वाले आपको पूजेंगे...
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छतरपुर।नगरपालिका कर्मचारी नशे कि हालत में रात 10 बजे हुआ सब्जी बेचने वाली महिला को हटाने क्यों पहुंचे 

क्या नगरपालिका कर्मचारियों को रात्रि में सड़क किनारे लगी सब्जी ठिलिया को हटाने का आदेश किसने दिया..
कस्तूरबा गांधी छात्रावास में सहायक रसोइया को दोबारा काम पर रखने की मांग, कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की गुहार

छतरपुर/चंदला। कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास चंदला में सहायक रसोइया के पद पर कार्य कर चुकीं श्रीमती संतोष वर्मा, पति उमेश वर्मा, निवासी वार्ड क्रमांक 04, पंचायत चंदला ने संबंधित अधिकारियों पर मनमानी और अनियमितता के आरोप लगाते हुए छतरपुर कलेक्टर को आवेदन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और उन्हें दोबारा कार्य पर रखे जाने की मांग की है।

आवेदन के मुताबिक संतोष वर्मा लंबे समय से कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास चंदला में सहायक रसोइया के रूप में कार्य करती थीं। 4 जून 2023 को छात्रावास में टीन/सीमेंट की सामग्री गिरने से उनके हाथ में चोट आई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में इलाज कराना पड़ा।

आरोप है कि इलाज के बाद जब वह दोबारा छात्रावास में काम करने पहुंचीं तो उन्हें बिना किसी स्पष्ट लिखित आदेश के रसोइया के कार्य से रोक दिया गया। आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि उनसे कथित तौर पर 20 हजार रुपये की राशि की मांग की गई थी। राशि देने से इनकार करने के बाद उनके साथ दुर्व्यवहार और धमकी दिए जाने की बात भी आवेदन में कही गई है।

संतोष वर्मा का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में पहले भी संबंधित अधिकारियों को कई बार लिखित आवेदन दिए, लेकिन अभी तक उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। आवेदन में 27 अगस्त 2023 को कार्य करने से रोके जाने का भी उल्लेख किया गया है।

अब 25 अगस्त 2026 को कलेक्टर को दिए गए आवेदन में उन्होंने सहायक रसोइया के पद पर पुनः कार्य करने का अवसर देने, संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच कराने तथा कथित रूप से 20 हजार रुपये मांगने और दुर्व्यवहार किए जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

महिला ने कलेक्टर से की ये प्रमुख मांगें

सहायक रसोइया के पद पर दोबारा कार्य पर रखा जाए।

बिना लिखित आदेश कार्य से हटाए जाने की जांच हो।

20 हजार रुपये मांगने के आरोप की जांच कराई जाए।

दुर्व्यवहार और धमकी के आरोपों की जांच हो।

संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ कर निष्पक्ष कार्रवाई की जाए।

हालांकि, आवेदन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित विभाग/अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।