रामकथा के दूसरे दिन यथार्थ पाकर झूमने लगे श्रद्धालु
राम से बड़ा राम का नाम : संत रामझुलन दास महाराज
भिवानी।
छोटी कांशी भिवानी के दादरी गेट राजश्री बैंकेट हाल में अखिल भारतीय श्री दादू सेवक समाज के तत्वावधान में अशोक बुवानीवाला परिवार की तरफ से आयोजित रामकथा के कथा के दूसरे दिन शुरुआत में आरती व श्री राम की पावन स्तुति की गई।
कथा वाचक पूज्य संत रामझूलन दास महाराज ने मुखारविंद से जीवन के यथार्थ को परिभाषित करते हुए श्री राम के जीवन पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि श्री रामचरित मानस एक सरोवर है, जिसके चार घाट हैं।वहीं रामकथा सभी संशयों को दूर भी करती है।
भगवान श्रीराम का जीवन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि मर्यादा, त्याग, सत्य, कर्तव्य, सेवा और आदर्श जीवन का संदेश देता है। श्रीराम कथा के माध्यम से इन जीवन मूल्यों को समाज तक पहुंचाने तथा नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और सनातन संस्कारों से जोडऩे का प्रयास किया जा रहा है।कथा के दौरान श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का श्रवण करने का अवसर भी प्रदान किया गया। संत रामझूलन दास जी महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान श्रीराम की लीलाओं, आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के जीवन चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि जो राम को जान लेगा,उसकी समझो नैया पार है।
उन्होंने कहा कि श्री राम कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को संस्कार, सद्भाव, सेवा और आपसी भाईचारे से जोडऩे का आध्यात्मिक अभियान है। उन्होंने भगवान श्रीराम का स्मरण और कथा श्रवण करते हुए सकारात्मक ऊर्जा, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का संचार किया।
उन्होंने कहा कि तीर्थराज-प्रयागराज भरत महाराज की स्थली मानी जाती है, वह भी संशय दूर करती है।
दशरथ नन्दन राम के चरित्र में तप,बल,शक्ति, त्याग,मोह,अपने पराए श्रद्धा व श्रदालु को इंगित करता है।
रामकथा के दूसरे दिन गोस्वामी तुलसीदास जी की घटनाओं से भी कथावाचक ने जिक्र करते हुए कहा कि सत्संग सुनने की इच्छा तक बताया।
इस मौके पर समाजसेवी पूनम अग्रवाल, प्रीतम अग्रवाल, बाबू राम आर्य,बालकिशन अग्रवाल, नरेश लिखा,भानुप्रकाश शर्मा, प्रेम धमीजा, रिसाल सरपंच, सुरेश अरोड़ा पूर्व पार्षद,घनश्याम दास अग्रवाल वजगत नायरायण भारद्वाज सहित सैंकड़ों महिला व पुरूष श्रद्धालुगण मौजूद रहे।