जनजातीय क्षेत्रों में कृषि से बढ़ेगी आय, वैज्ञानिकों की टीम ने किया तकनीकी सर्वेक्षण
उच्च मूल्य और औषधीय फसलों की खेती पर जोर, बकरी पालन अपनाने की भी दी सलाह
लखीसराय, संवाददाता। जनजातीय बहुल क्षेत्रों में कृषि आधारित आजीविका को सशक्त बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इसी कड़ी में गुरुवार को बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की चार सदस्यीय वैज्ञानिकों की टीम ने सूर्यगढ़ा प्रखंड के बरियारपुर पंचायत स्थित दुग्धम गांव पहुंचकर जनजातीय बहुल क्षेत्र का तकनीकी सर्वेक्षण और विस्तृत अध्ययन किया।
यह सर्वेक्षण जिला पदाधिकारी के निर्देश पर कराया जा रहा है, जिसका उद्देश्य अनुसूचित जनजाति परिवारों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली फल एवं औषधीय-सुगंधित फसलों की खेती से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है।
भ्रमण के दौरान वैज्ञानिकों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने सिंचाई के लिए नलकूप, सड़क निर्माण और नियमित बिजली आपूर्ति की मांग रखी। ग्रामीणों ने बताया कि वे वर्तमान में चिरोटा, तुलसी, हरजोर, रेंचा और मसूर की खेती के अलावा सूखी लकड़ी एवं तेंदूपत्ता बेचकर आजीविका चलाते हैं।
वैज्ञानिकों ने पाया कि क्षेत्र में लगभग 30 एकड़ कृषि योग्य भूमि है, जिसकी सिंचाई वर्षा और स्थानीय जल स्रोत ‘चुआ’ पर निर्भर है। खेती आज भी पारंपरिक हल-बैल से की जाती है। वहीं तेंदुआ, भालू, जंगली सूअर और बंदरों के कारण फसलों को भारी नुकसान पहुंचने की समस्या भी सामने आई।
सर्वेक्षण के बाद वैज्ञानिकों ने किसानों को एप्पल बेर, आम, मिश्रीकंद, कटहल, बेल, कालमेघ, तुलसी और लेमनग्रास जैसी उच्च मूल्य एवं औषधीय फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी। साथ ही अतिरिक्त आय के लिए बकरी पालन को भी बेहतर विकल्प बताया।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इन फसलों और वैकल्पिक आजीविका के माध्यम से जनजातीय परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। जिला प्रशासन ने इसे जनजातीय क्षेत्रों में सतत कृषि विकास और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है।
सर्वेक्षण दल में क्षेत्रीय निदेशक डॉ. शिवनाथ दास, वरीय वैज्ञानिक डॉ. प्रभात कुमार, डॉ. एस.एस. सोलंकी तथा कृषि विज्ञान केंद्र, हलसी के प्रधान एवं वरीय वैज्ञानिक सुधीर कुमार शामिल थे। इस दौरान जिला उद्यान पदाधिकारी राजीव रंजन, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. सुनील कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी मंजुल मधुप सहित कृषि, उद्यान एवं कल्याण विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।