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दीयों की रोशनी से जगमगाया परिया पोखर, सामूहिक दीपोत्सव के साथ लखीसराय ने मनाई स्थापना दिवस की पूर्व संध्या। लखीसराय। 33वें जिला स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार को जिला अतिथि गृह के सामने स्थित परिया पोखर परिसर में भव्य सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हजारों दीपों की रोशनी से पूरा परिसर जगमगा उठा और उत्सव का माहौल बन गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जिले की गौरवशाली ऐतिहासिक यात्रा, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत तथा विकास की उपलब्धियों का सम्मान करते हुए जनसहभागिता के माध्यम से एकता और भाईचारे का संदेश देना था। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसमें जिला पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। दीपों की मनमोहक छटा ने परिया पोखर को आकर्षक स्वरूप प्रदान किया, जो जिले की प्रगति और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक बनकर उभरा।दीप प्रज्ज्वलन के बाद सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान गाकर देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। इसके उपरांत जिला पदाधिकारी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं और कहा कि लखीसराय ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना तथा सामाजिक विकास के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है, जो जनसहभागिता और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।उन्होंने नागरिकों से जिले के समग्र विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ समाज में समरसता, सहयोग और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करते हैं।कार्यक्रम के अंत में उपस्थित नागरिकों ने सामूहिक रूप से लखीसराय के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण तथा जिला स्थापना दिवस समारोह को सफल बनाने का संकल्प लिया।इस अवसर पर जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी शंभूनाथ, अनुमंडल पदाधिकारी प्रभाकर कुमार, वरीय उपसमाहर्ता शशि कुमार, नजारत उपसमाहर्ता प्राची कुमारी, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी मृणाल रंजन, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आईसीडीएस) वंदना पाण्डेय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

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लखीसराय स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर परिया पोखर दीपों से जगमगाया

सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ जिले के उज्ज्वल भविष्य का लिया संकल्प, राष्ट्रगान और डीएम के संबोधन ने बढ़ाया उत्साह

लखीसराय, संवाददाता। लखीसराय जिला स्थापना दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर गुरुवार को जिला प्रशासन की ओर से परिया पोखर (जिला अतिथि गृह के समक्ष) में भव्य सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने भाग लेकर जिले के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण का संकल्प लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई। सैकड़ों दीपों की रोशनी से परिया पोखर का पूरा परिसर जगमगा उठा। यह दृश्य जिले की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, विकास यात्रा और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक बन गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जिले की ऐतिहासिक उपलब्धियों को सम्मानपूर्वक स्मरण करना तथा जनसहभागिता के माध्यम से एकता और भाईचारे का संदेश देना था।

दीप प्रज्ज्वलन के बाद सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान का गायन किया। इसके पश्चात जिला पदाधिकारी ने उपस्थित जनसमूह को लखीसराय जिला स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जिले ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और सामाजिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धियां सभी नागरिकों और प्रशासन के सामूहिक प्रयासों का परिणाम हैं तथा आगे भी जनसहभागिता से जिले के विकास को नई गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ समाज में आपसी भाईचारा, समरसता और सहयोग की भावना को भी मजबूत करते हैं।

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने लखीसराय के सर्वांगीण विकास और जिला स्थापना दिवस समारोह को सफल बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।

इस अवसर जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी श्री शंभूनाथ, अनुमंडल पदाधिकारी श्री प्रभाकर कुमार, वरीय उप समाहर्ता श्री शशि कुमार, नजारत उपसमाहर्ता सुश्री प्राची कुमारी, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्री मृणाल रंजन, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आईसीडीएस) श्रीमती वंदना पाण्डेय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

लखीसराय स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर परिया पोखर दीपों से जगमगाया सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ जिले के उज्ज्वल भविष्य का लिया संकल्प, राष्ट्रगान और डीएम के संबोधन ने बढ़ाया उत्साह लखीसराय, संवाददाता। लखीसराय जिला स्थापना दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर गुरुवार को जिला प्रशासन की ओर से परिया पोखर (जिला अतिथि गृह के समक्ष) में भव्य सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने भाग लेकर जिले के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण का संकल्प लिया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई। सैकड़ों दीपों की रोशनी से परिया पोखर का पूरा परिसर जगमगा उठा। यह दृश्य जिले की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, विकास यात्रा और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक बन गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जिले की ऐतिहासिक उपलब्धियों को सम्मानपूर्वक स्मरण करना तथा जनसहभागिता के माध्यम से एकता और भाईचारे का संदेश देना था। दीप प्रज्ज्वलन के बाद सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान का गायन किया। इसके पश्चात जिला पदाधिकारी ने उपस्थित जनसमूह को लखीसराय जिला स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जिले ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और सामाजिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धियां सभी नागरिकों और प्रशासन के सामूहिक प्रयासों का परिणाम हैं तथा आगे भी जनसहभागिता से जिले के विकास को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ समाज में आपसी भाईचारा, समरसता और सहयोग की भावना को भी मजबूत करते हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने लखीसराय के सर्वांगीण विकास और जिला स्थापना दिवस समारोह को सफल बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। इस अवसर जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी श्री शंभूनाथ, अनुमंडल पदाधिकारी श्री प्रभाकर कुमार, वरीय उप समाहर्ता श्री शशि कुमार, नजारत उपसमाहर्ता सुश्री प्राची कुमारी, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्री मृणाल रंजन, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आईसीडीएस) श्रीमती वंदना पाण्डेय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

Lakhisarai, Lakhisarai | Jul 2, 2026

जनजातीय क्षेत्रों में कृषि से बढ़ेगी आय, वैज्ञानिकों की टीम ने किया तकनीकी सर्वेक्षण

उच्च मूल्य और औषधीय फसलों की खेती पर जोर, बकरी पालन अपनाने की भी दी सलाह

लखीसराय, संवाददाता। जनजातीय बहुल क्षेत्रों में कृषि आधारित आजीविका को सशक्त बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इसी कड़ी में गुरुवार को बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की चार सदस्यीय वैज्ञानिकों की टीम ने सूर्यगढ़ा प्रखंड के बरियारपुर पंचायत स्थित दुग्धम गांव पहुंचकर जनजातीय बहुल क्षेत्र का तकनीकी सर्वेक्षण और विस्तृत अध्ययन किया।

यह सर्वेक्षण जिला पदाधिकारी के निर्देश पर कराया जा रहा है, जिसका उद्देश्य अनुसूचित जनजाति परिवारों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली फल एवं औषधीय-सुगंधित फसलों की खेती से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है।

भ्रमण के दौरान वैज्ञानिकों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने सिंचाई के लिए नलकूप, सड़क निर्माण और नियमित बिजली आपूर्ति की मांग रखी। ग्रामीणों ने बताया कि वे वर्तमान में चिरोटा, तुलसी, हरजोर, रेंचा और मसूर की खेती के अलावा सूखी लकड़ी एवं तेंदूपत्ता बेचकर आजीविका चलाते हैं।

वैज्ञानिकों ने पाया कि क्षेत्र में लगभग 30 एकड़ कृषि योग्य भूमि है, जिसकी सिंचाई वर्षा और स्थानीय जल स्रोत ‘चुआ’ पर निर्भर है। खेती आज भी पारंपरिक हल-बैल से की जाती है। वहीं तेंदुआ, भालू, जंगली सूअर और बंदरों के कारण फसलों को भारी नुकसान पहुंचने की समस्या भी सामने आई।

सर्वेक्षण के बाद वैज्ञानिकों ने किसानों को एप्पल बेर, आम, मिश्रीकंद, कटहल, बेल, कालमेघ, तुलसी और लेमनग्रास जैसी उच्च मूल्य एवं औषधीय फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी। साथ ही अतिरिक्त आय के लिए बकरी पालन को भी बेहतर विकल्प बताया।

वैज्ञानिकों का मानना है कि इन फसलों और वैकल्पिक आजीविका के माध्यम से जनजातीय परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। जिला प्रशासन ने इसे जनजातीय क्षेत्रों में सतत कृषि विकास और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है।

सर्वेक्षण दल में क्षेत्रीय निदेशक डॉ. शिवनाथ दास, वरीय वैज्ञानिक डॉ. प्रभात कुमार, डॉ. एस.एस. सोलंकी तथा कृषि विज्ञान केंद्र, हलसी के प्रधान एवं वरीय वैज्ञानिक सुधीर कुमार शामिल थे। इस दौरान जिला उद्यान पदाधिकारी राजीव रंजन, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. सुनील कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी मंजुल मधुप सहित कृषि, उद्यान एवं कल्याण विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।

जनजातीय क्षेत्रों में कृषि से बढ़ेगी आय, वैज्ञानिकों की टीम ने किया तकनीकी सर्वेक्षण उच्च मूल्य और औषधीय फसलों की खेती पर जोर, बकरी पालन अपनाने की भी दी सलाह लखीसराय, संवाददाता। जनजातीय बहुल क्षेत्रों में कृषि आधारित आजीविका को सशक्त बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इसी कड़ी में गुरुवार को बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की चार सदस्यीय वैज्ञानिकों की टीम ने सूर्यगढ़ा प्रखंड के बरियारपुर पंचायत स्थित दुग्धम गांव पहुंचकर जनजातीय बहुल क्षेत्र का तकनीकी सर्वेक्षण और विस्तृत अध्ययन किया। यह सर्वेक्षण जिला पदाधिकारी के निर्देश पर कराया जा रहा है, जिसका उद्देश्य अनुसूचित जनजाति परिवारों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली फल एवं औषधीय-सुगंधित फसलों की खेती से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है। भ्रमण के दौरान वैज्ञानिकों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने सिंचाई के लिए नलकूप, सड़क निर्माण और नियमित बिजली आपूर्ति की मांग रखी। ग्रामीणों ने बताया कि वे वर्तमान में चिरोटा, तुलसी, हरजोर, रेंचा और मसूर की खेती के अलावा सूखी लकड़ी एवं तेंदूपत्ता बेचकर आजीविका चलाते हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि क्षेत्र में लगभग 30 एकड़ कृषि योग्य भूमि है, जिसकी सिंचाई वर्षा और स्थानीय जल स्रोत ‘चुआ’ पर निर्भर है। खेती आज भी पारंपरिक हल-बैल से की जाती है। वहीं तेंदुआ, भालू, जंगली सूअर और बंदरों के कारण फसलों को भारी नुकसान पहुंचने की समस्या भी सामने आई। सर्वेक्षण के बाद वैज्ञानिकों ने किसानों को एप्पल बेर, आम, मिश्रीकंद, कटहल, बेल, कालमेघ, तुलसी और लेमनग्रास जैसी उच्च मूल्य एवं औषधीय फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी। साथ ही अतिरिक्त आय के लिए बकरी पालन को भी बेहतर विकल्प बताया। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन फसलों और वैकल्पिक आजीविका के माध्यम से जनजातीय परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। जिला प्रशासन ने इसे जनजातीय क्षेत्रों में सतत कृषि विकास और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है। सर्वेक्षण दल में क्षेत्रीय निदेशक डॉ. शिवनाथ दास, वरीय वैज्ञानिक डॉ. प्रभात कुमार, डॉ. एस.एस. सोलंकी तथा कृषि विज्ञान केंद्र, हलसी के प्रधान एवं वरीय वैज्ञानिक सुधीर कुमार शामिल थे। इस दौरान जिला उद्यान पदाधिकारी राजीव रंजन, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. सुनील कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी मंजुल मधुप सहित कृषि, उद्यान एवं कल्याण विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।

Lakhisarai, Lakhisarai | Jul 2, 2026

लखीसराय ।जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में 23 मामलों की सुनवाई त्वरित निष्पादन के निर्देश।

लखीसराय ।जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में 23 मामलों की सुनवाई त्वरित निष्पादन के निर्देश।

Lakhisarai, Lakhisarai | Jul 2, 2026

जनजातीय बहुल गांवों में कृषि से बदलेगी तस्वीर, वैज्ञानिकों ने किया तकनीकी सर्वे; उच्च मूल्य की फसलों पर दिया जोर
लखीसराय। जिले के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में कृषि आधारित आजीविका को सुदृढ़ करने और किसान परिवारों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। जिला प्रशासन के अनुरोध पर बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की चार सदस्यीय वैज्ञानिकों की टीम ने गुरुवार को सूर्यगढ़ा प्रखंड के बरियारपुर पंचायत स्थित दुग्धम गांव का दौरा कर क्षेत्र का तकनीकी सर्वेक्षण एवं अध्ययन किया।
सर्वेक्षण का उद्देश्य अनुसूचित जनजाति समुदाय के किसानों को उच्च मूल्य वाली फल, औषधीय एवं सुगंधित फसलों की खेती से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है। टीम में क्षेत्रीय निदेशक डॉ. शिवनाथ दास, वरीय वैज्ञानिक डॉ. प्रभात कुमार, डॉ. एस.एस. सोलंकी तथा कृषि विज्ञान केंद्र हलसी के प्रधान वैज्ञानिक सुधीर कुमार शामिल थे।
निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने सिंचाई के लिए नलकूप, सड़क निर्माण और नियमित बिजली आपूर्ति जैसी बुनियादी समस्याओं से वैज्ञानिकों को अवगत कराया। ग्रामीणों ने बताया कि वर्तमान में वे चिरोटा, तुलसी, हरजोर, रेंचा और मसूर की खेती के अलावा सूखी लकड़ी एवं तेंदूपत्ता बेचकर आजीविका चलाते हैं।
वैज्ञानिकों ने पाया कि लगभग 30 एकड़ कृषि योग्य भूमि वर्षा और स्थानीय जलस्रोत ‘चुआ’ पर निर्भर है तथा खेती आज भी पारंपरिक हल-बैल से की जाती है। वहीं तेंदुआ, भालू, जंगली सूअर और बंदरों से फसलों को होने वाले नुकसान की समस्या भी सामने आई।
क्षेत्र की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों का आकलन करने के बाद वैज्ञानिकों ने किसानों को एप्पल बेर, आम, मिश्रीकंद, कटहल, बेल, कालमेघ, तुलसी और लेमनग्रास जैसी उच्च मूल्य एवं औषधीय फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी। साथ ही अतिरिक्त आय के लिए बकरी पालन को बढ़ावा देने की भी अनुशंसा की।
इस दौरान जिला उद्यान पदाधिकारी राजीव रंजन, कृषि विज्ञान केंद्र हलसी के वैज्ञानिक डॉ. सुनील कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी मंजुल मधुप, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, प्रखंड उद्यान पदाधिकारी तथा प्रखंड कल्याण पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
जिला प्रशासन का मानना है कि यह पहल जनजातीय क्षेत्रों में आधुनिक कृषि, आयवृद्धि और सतत आजीविका विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

जनजातीय बहुल गांवों में कृषि से बदलेगी तस्वीर, वैज्ञानिकों ने किया तकनीकी सर्वे; उच्च मूल्य की फसलों पर दिया जोर लखीसराय। जिले के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में कृषि आधारित आजीविका को सुदृढ़ करने और किसान परिवारों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। जिला प्रशासन के अनुरोध पर बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की चार सदस्यीय वैज्ञानिकों की टीम ने गुरुवार को सूर्यगढ़ा प्रखंड के बरियारपुर पंचायत स्थित दुग्धम गांव का दौरा कर क्षेत्र का तकनीकी सर्वेक्षण एवं अध्ययन किया। सर्वेक्षण का उद्देश्य अनुसूचित जनजाति समुदाय के किसानों को उच्च मूल्य वाली फल, औषधीय एवं सुगंधित फसलों की खेती से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है। टीम में क्षेत्रीय निदेशक डॉ. शिवनाथ दास, वरीय वैज्ञानिक डॉ. प्रभात कुमार, डॉ. एस.एस. सोलंकी तथा कृषि विज्ञान केंद्र हलसी के प्रधान वैज्ञानिक सुधीर कुमार शामिल थे। निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने सिंचाई के लिए नलकूप, सड़क निर्माण और नियमित बिजली आपूर्ति जैसी बुनियादी समस्याओं से वैज्ञानिकों को अवगत कराया। ग्रामीणों ने बताया कि वर्तमान में वे चिरोटा, तुलसी, हरजोर, रेंचा और मसूर की खेती के अलावा सूखी लकड़ी एवं तेंदूपत्ता बेचकर आजीविका चलाते हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि लगभग 30 एकड़ कृषि योग्य भूमि वर्षा और स्थानीय जलस्रोत ‘चुआ’ पर निर्भर है तथा खेती आज भी पारंपरिक हल-बैल से की जाती है। वहीं तेंदुआ, भालू, जंगली सूअर और बंदरों से फसलों को होने वाले नुकसान की समस्या भी सामने आई। क्षेत्र की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों का आकलन करने के बाद वैज्ञानिकों ने किसानों को एप्पल बेर, आम, मिश्रीकंद, कटहल, बेल, कालमेघ, तुलसी और लेमनग्रास जैसी उच्च मूल्य एवं औषधीय फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी। साथ ही अतिरिक्त आय के लिए बकरी पालन को बढ़ावा देने की भी अनुशंसा की। इस दौरान जिला उद्यान पदाधिकारी राजीव रंजन, कृषि विज्ञान केंद्र हलसी के वैज्ञानिक डॉ. सुनील कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी मंजुल मधुप, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, प्रखंड उद्यान पदाधिकारी तथा प्रखंड कल्याण पदाधिकारी भी मौजूद रहे। जिला प्रशासन का मानना है कि यह पहल जनजातीय क्षेत्रों में आधुनिक कृषि, आयवृद्धि और सतत आजीविका विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

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दीयों की रोशनी से जगमगाया परिया पोखर, सामूहिक दीपोत्सव के साथ लखीसराय ने मनाई स्थापना दिवस की पूर्व संध्या। लखीसराय। 33वें जिला स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार को जिला अतिथि गृह के सामने स्थित परिया पोखर परिसर में भव्य सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हजारों दीपों की रोशनी से पूरा परिसर जगमगा उठा और उत्सव का माहौल बन गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जिले की गौरवशाली ऐतिहासिक यात्रा, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत तथा विकास की उपलब्धियों का सम्मान करते हुए जनसहभागिता के माध्यम से एकता और भाईचारे का संदेश देना था। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसमें जिला पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। दीपों की मनमोहक छटा ने परिया पोखर को आकर्षक स्वरूप प्रदान किया, जो जिले की प्रगति और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक बनकर उभरा।दीप प्रज्ज्वलन के बाद सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान गाकर देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। इसके उपरांत जिला पदाधिकारी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं और कहा कि लखीसराय ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना तथा सामाजिक विकास के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है, जो जनसहभागिता और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।उन्होंने नागरिकों से जिले के समग्र विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ समाज में समरसता, सहयोग और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करते हैं।कार्यक्रम के अंत में उपस्थित नागरिकों ने सामूहिक रूप से लखीसराय के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण तथा जिला स्थापना दिवस समारोह को सफल बनाने का संकल्प लिया।इस अवसर पर जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी शंभूनाथ, अनुमंडल पदाधिकारी प्रभाकर कुमार, वरीय उपसमाहर्ता शशि कुमार, नजारत उपसमाहर्ता प्राची कुमारी, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी मृणाल रंजन, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आईसीडीएस) वंदना पाण्डेय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। - Lakhisarai News