दरधा नदी में मेडिकल कचरे के साथ घरेलू अपशिष्ट का लगा अंबार
नप की लापरवाही पर उठ रहे सवाल, नमामि गंगे अभियान की मंशा पर भी पड़ रहा असर
जहानाबाद।
शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली दरधा नदी इन दिनों प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रही है। शहर के पुल के नीचे और नदी किनारे बड़ी मात्रा में घरेलू कचरे के साथ मेडिकल अपशिष्ट खुलेआम फेंका जा रहा है। नदी किनारे कचरे का इतना बड़ा ढेर जमा हो गया है कि समय-समय पर उसमें आग लगा दी जाती है। इससे निकलने वाले जहरीले धुएं और दुर्गंध के कारण आसपास रहने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद की ओर से नियमित सफाई और निगरानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। नदी किनारे पड़े कचरे में इस्तेमाल किए गए दवाइयों के रैपर, प्लास्टिक, इंजेक्शन से संबंधित सामग्री समेत अन्य मेडिकल अपशिष्ट भी दिखाई दे रहे हैं। यह न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर डाल सकता है।
लोगों का आरोप है कि रात के समय चोरी-छिपे नदी किनारे कचरा फेंका जाता है। जब कचरे का ढेर बढ़ जाता है तो उसमें आग लगा दी जाती है, जिससे निकलने वाले धुएं से सांस लेने में परेशानी होती है। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि दरधा नदी को साफ रखने के लिए प्रशासन की ओर से प्रभावी पहल नहीं की जा रही है।
एक ओर सरकार नमामि गंगे अभियान के तहत नदियों की स्वच्छता और संरक्षण को लेकर कई योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर शहर के बीचोंबीच बहने वाली दरधा नदी में कचरे का अंबार लगना अभियान की मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है। कचरे के कारण नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है और जल प्रदूषण का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, नगर परिषद और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो दरधा नदी का अस्तित्व और आसपास का पर्यावरण गंभीर संकट में पड़ सकता है।
नागरिकों ने नगर परिषद से नियमित सफाई, मेडिकल कचरे के सुरक्षित निस्तारण और नदी किनारे निगरानी की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि शहर को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाया जा सके।