भिवानी में लघु फिल्म ‘टाँका’ की शूटिंग जारी
हरियश क्रिएशन के बैनर तले बन रही फिल्म में सामाजिक विसंगतियों और बेटियों के सपनों की उड़ान को प्रमुखता
हरियश क्रिएशंस की एक और लघु फिल्म ‘टाँका’ की शूटिंग मेघदूत थिएटर ग्रुप और रेड लीफ सिनेमा के सहयोग से इन दिनों भिवानी में चल रही है। सामाजिक विषयों को केंद्र में रखकर बनाई जा रही यह फिल्म घरेलू हिंसा, पारिवारिक दबाव, महिलाओं के सपनों और स्वावलंबन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करेगी। फिल्म का निर्माण प्रसिद्ध रंगकर्मी डॉ. हरिकेश पंघाल के दिशा-निर्देशन में किया जा रहा है।
‘टाँका’ हरियश क्रिएशंस की तीसरी लघु फिल्म है। इससे पहले संस्था द्वारा ‘मकड़ी’ और ‘ईमान’ नामक दो लघु फिल्मों का निर्माण किया जा चुका है। ‘मकड़ी’ को दस अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार, जबकि ‘ईमान’ को छह अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। दोनों फिल्मों का निर्देशन यश केजरीवाल ने किया था।
फिल्म ‘टाँका’ की कहानी एक ऐसी लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे पारिवारिक परिस्थितियों और पिता के दबाव के कारण अपने सपनों की तिलांजलि देकर अपनी दिवंगत बड़ी बहन के पति से विवाह करना पड़ता है, ताकि वह अपनी बहन के बच्चे की देखभाल कर सके। कम उम्र में लिया गया यह निर्णय उसके जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव लेकर आता है। वह अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती है तथा एक सफल उद्यमी और फैशन डिजाइनर बनने का सपना देखती है, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियां और सामाजिक परिस्थितियां उसके सपनों के मार्ग में बाधा बनती हैं।
कहानी में एक दूसरी महिला का महत्वपूर्ण पक्ष भी सामने आता है, जिसने कभी इसी प्रकार अपने सपनों का त्याग किया था। अब वह नहीं चाहती कि किसी अन्य महिला के सपनों की बलि चढ़े। वह मुख्य पात्र को प्रेरित करती है और उसे घरेलू जीवन की सीमाओं से बाहर निकलकर अपने सपनों की राह पर आगे बढ़ने का साहस देती है। अंततः मुख्य पात्र अपने संघर्षों से उबरकर एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल होती है।
फिल्म की कहानी और इसके सामाजिक सरोकारों से जुड़ी टैलेंटेड ऋतु इंसान फिल्म के वित्तीय सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आज वे एक सफल उद्यमी के रूप में समाज में अपनी पहचान बना चुकी हैं। फिल्म की कहानी भी उनके व्यवसाय और उस क्षेत्र से प्रेरित है, जिसमें फैशन डिजाइनिंग, महिलाओं के स्वावलंबन और अपने सपनों को साकार करने की भावना प्रमुखता से जुड़ी हुई है। इस प्रकार फिल्म की कहानी और उसके निर्माण में सहयोग करने वाली हस्ती के बीच एक स्वाभाविक संबंध दिखाई देता है।फिल्म के निर्माण में भिवानी पब्लिक स्कूल का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा है। इसके अतिरिक्त जिला प्रशासन, भिवानी का सहयोग भी फिल्म की शूटिंग और निर्माण प्रक्रिया में प्राप्त हो रहा है। मुरली मिष्ठान भंडार की ओर से भी फिल्म के निर्माण में आर्थिक सहयोग प्रदान किया गया है। फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों ने सहयोग देने वाले सभी संस्थानों, प्रतिष्ठानों और व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया है।फिल्म में भिवानी के प्रसिद्ध रंगकर्मी कौशल भारद्वाज महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वे भिवानी शहर के रंगमंच से जुड़े अनेक कलाकारों के गुरु और मार्गदर्शक भी रहे हैं। उनकी धर्मपत्नी योगमाया फिल्म में उनकी पत्नी का किरदार निभा रही हैं। एमएच-1 न्यूज़ चैनल के पूर्व प्रोडक्शन हेड रजनीश अरोड़ा भी फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। एचएसबीसी की सदस्य ज्योति बैंदा भी फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आएंगी। इसके अतिरिक्त रामफल ब्रदर्स के चर्चित कलाकार अनूप कुमार और नवीन कुमार भी अपनी भूमिकाओं में दिखाई देंगे। फिल्म में मुख्य लड़की की भूमिका रीत बगला निभा रही हैं। अंकित कुमार, दीपक बगला सहित अनेक अन्य कलाकार भी फिल्म का हिस्सा हैं।
फिल्म के निर्देशक यश केजरीवाल हैं। इससे पहले वे ‘मकड़ी’ और ‘ईमान’ जैसी लघु फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। यश केजरीवाल युवा समारोहों में लगातार सात बार सर्वोत्तम अभिनेता का खिताब भी जीत चुके हैं। रंगमंच और फिल्मों के क्षेत्र में उनके अनुभव का लाभ ‘टाँका’ के निर्माण में मिल रहा है।
फिल्म के कला निर्देशक नवीन हैं, जबकि डीओपी शिवम उत्रेजा फिल्म के छायांकन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अनिल बजाज लाइन प्रोड्यूसर तथा पुरु अग्रवाल परियोजना प्रबंधक की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म के निर्माण एवं प्रोडक्शन कार्य में अमन सिंधु, अंकित, रोहन और अरमान महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। फिल्म के संगीत का दायित्व सूरज, मेघदूत स्टूडियोज के पास है। आदित्य सैनी और रेड लीफ सिनेमा का भी फिल्म निर्माण में सहयोग प्राप्त हो रहा है।
फिल्म के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच भी महिलाओं के सपनों, प्रतिभा और आत्मनिर्भरता को सम्मान मिलना चाहिए। फिल्म घरेलू हिंसा तथा समाज में व्याप्त अनेक सामाजिक विसंगतियों पर भी सवाल उठाती है। निर्माताओं के अनुसार यह एक ऐसी सामाजिक फिल्म है, जिसे समस्त परिवार के साथ देखा जा सकता है और जो महिलाओं के सम्मान, स्वावलंबन तथा अपने सपनों को साकार करने की प्रेरणा देती है।