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रात का राज, माफिया का ताज! — राहिया ओर रगोली में कानून की खुली धज्जियां उरई के राहिया ओर रगोली गांव में जो हो रहा है, वो सिर्फ अवैध खनन नहीं—यह सिस्टम को खुली चुनौती है। दिन में खामोशी का दिखावा और रात में खुलेआम लूट! जैसे ही अंधेरा होता है, खनन माफिया सड़कों पर उतर आते हैं—ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पुलिस चौकी के सामने से ऐसे गुजरती हैं मानो कानून उनकी जेब में हो। चौकी के सामने से खेल, फिर भी कोई फेल नहीं? यह सबसे बड़ा सवाल है—जब ट्रैक्टर चौकी के सामने से गुजर रहे हैं, तो क्या पुलिस को दिखाई नहीं दे रहा? या फिर सब कुछ देखकर भी अनदेखा किया जा रहा है? अगर यह लापरवाही है, तो शर्मनाक है। अगर मिलीभगत है, तो और भी खतरनाक है। हाइवे बना मौत का ट्रैप ओवरलोड ट्रैक्टरों से गिरती मिट्टी अब हादसों को न्योता दे रही है। हर गुजरते वाहन के साथ मौत का खतरा दौड़ रहा है। अगर कोई बड़ा हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन होगा? क्या तब भी फाइलों में ही कार्रवाई होगी? नाम सामने—कार्रवाई कब? सूत्रों के मुताबिक, राहिया में प्रदीप और रंगोली में प्रीतम के नाम खुलकर सामने आ रहे हैं। सवाल सीधा है— क्या प्रशासन इन नामों पर कार्रवाई करेगा या फिर फाइलों में दबा देगा? गांधी की चमक या सिस्टम की अंधी आंख? गांव में चर्चा साफ है— मोटी रकम ने जिम्मेदारों की आंखों पर पट्टी बांध दी है। अगर यह सच है, तो यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं—यह जनता के भरोसे का सीधा कत्ल है। सीधे, कड़े और असहज सवाल चौकी के सामने से गुजरते ट्रैक्टर क्यों नहीं रोके जा रहे? रात में खनन किसके संरक्षण में हो रहा है? क्या अधिकारियों की जेबें भर रही हैं और जनता जान जोखिम में डाल रही है? आखिर कब टूटेगा यह माफिया-प्रशासन का गठजोड़? अब नहीं तो कब? — जनता का अल्टीमेटम स्थानीय लोग अब चुप नहीं हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हैं, गुस्सा उबाल पर है। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आक्रोश सड़कों पर फूट सकता है। प्रशासन के लिए आखिरी चेतावनी जैसी स्थिति उपजिलाधिकारी उरई, जिला प्रशासन और पुलिस— अब वक्त है सिर्फ नोटिस लेने का नहीं, एक्शन लेने का। वरना यह सवाल हमेशा पीछा करेगा— क्या कानून बिक चुका है? #Jalaun #Urai #BreakingNews #IllegalMining #MiningMafia #NightMining #UPPolice #SystemFailure #Corruption #RoadSafety #Overलोड #KalpiRoad #DMJalaun #SDMUrai #SPJalaun #MiningDepartment #UPGovernment #ZeroTolerance #WakeUpAdministration #PublicOutrage

Kalpi, Jalaun | Jun 9, 2026

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Kalpi, Jalaun | Jun 10, 2026

उरई तहसील में ‘दलाल का दरबार’: 
बाबू गायब, प्राइवेट शख्स चला रहा सरकारी कुर्सी — सिस्टम बेनकाब!

उरई (जालौन)
उरई तहसील अब सरकारी दफ्तर कम और दलालों का अड्डा ज्यादा नजर आने लगी है।
 ताजा खुलासे ने पूरे प्रशासनिक ढांचे की पोल खोलकर रख दी है। 
आरोप इतने गंभीर हैं कि अगर जांच ईमानदारी से हो जाए, तो कई कुर्सियां हिलना तय माना जा रहा है।

मामला एक ऐसे प्राइवेट व्यक्ति मुकेश वर्मा से जुड़ा है, जो बिना किसी सरकारी नियुक्ति के वर्षों से तहसील में अपना साम्राज्य चलाता आ रहा है।
 हैरानी की बात यह है कि यह व्यक्ति न सिर्फ कर्मचारियों के साथ बैठता है, बल्कि खुलेआम सरकारी बाबू की कुर्सी पर कब्जा जमाकर फरियादियों के काम तय करता है — जैसे वही असली अधिकारी हो!

वीडियो वायरल, सच सामने!

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो ने इस गुप्त खेल को सार्वजनिक कर दिया है। 

वीडियो में कथित तौर पर वही व्यक्ति कुर्सी पर बैठा दिखाई दे रहा है और लोगों को निर्देश देता नजर आ रहा है।
 यह दृश्य किसी फिल्म का नहीं, बल्कि सरकारी दफ्तर की हकीकत है।

दोपहर के बाद बदल जाता है ‘राज’
तहसील के अंदरखाने की मानें तो दोपहर 3 बजे के बाद असली खेल शुरू होता है। 
जैसे ही संबंधित बाबू कार्यालय छोड़ता है, वैसे ही यह प्राइवेट व्यक्ति उसकी कुर्सी संभाल लेता है। 
शाम होते-होते पूरा दफ्तर दलाली केंद्र में तब्दील हो जाता है, जहां काम के नाम पर खुलेआम सौदेबाजी होती है।

काम होगा, लेकिन कीमत लगेगी — यही है नियम!

आरोप है कि मुकेश वर्मा सीधे फरियादियों से संपर्क करता है और काम कराने के नाम पर मोटी रकम वसूलता है। 
जो पहले दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज बताया जाता था, वही आज दलाली के दम पर लाखों की संपत्ति खड़ी कर चुका है — यह चर्चा अब तहसील से लेकर चौराहों तक गूंज रही है।

कौन दे रहा संरक्षण?

 बड़ा सवाल!
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह सब बिना ऊपर की सेटिंग के कैसे संभव है? 

चर्चा है कि तहसील के ही एक प्रभावशाली अधिकारी का संरक्षण इस पूरे खेल को चला रहा है। 
मिश्रा जी नाम के एक अधिकारी पर भी उंगलियां उठ रही हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

कर्मचारियों की चुप्पी भी संदिग्ध
तहसील के कई कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर माना कि उक्त व्यक्ति की कोई नियुक्ति नहीं है। फिर भी उसका वर्षों से दफ्तर में बैठना, फाइलों में दखल देना और कुर्सी पर कब्जा जमाना — यह सब बिना अंदरूनी मिलीभगत के संभव नहीं माना जा रहा।

प्रशासन की चुप्पी = मिलीभगत?
अब सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की चुप्पी पर है।
 क्या अधिकारियों को इस पूरे खेल की जानकारी नहीं, या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गई हैं?

जनता पूछ रही — कब टूटेगा दलाली का किला?
आम जनता अब खुलकर सवाल कर रही है कि क्या जिलाधिकारी इस मामले में कार्रवाई करेंगे या फिर यह प्राइवेट राज यूं ही चलता रहेगा? 
अगर इस मामले में सख्त जांच हुई, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे भ्रष्ट तंत्र का पर्दाफाश कर सकती है।

#उरई_में_दलाल_राज
#तहसील_पर_कब्जा
#सरकारी_कुर्सी_पर_प्राइवेट_राज
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#मिश्रा_जी_कनेक्शन
#बाबू_गायब_दलाल_हाजिर
#जनता_से_खुली_लूट
#DM_एक्शन_जरूरी
#ZeroTolerance_कहां_गई
#System_Expose

उरई तहसील में ‘दलाल का दरबार’: बाबू गायब, प्राइवेट शख्स चला रहा सरकारी कुर्सी — सिस्टम बेनकाब! उरई (जालौन) उरई तहसील अब सरकारी दफ्तर कम और दलालों का अड्डा ज्यादा नजर आने लगी है। ताजा खुलासे ने पूरे प्रशासनिक ढांचे की पोल खोलकर रख दी है। आरोप इतने गंभीर हैं कि अगर जांच ईमानदारी से हो जाए, तो कई कुर्सियां हिलना तय माना जा रहा है। मामला एक ऐसे प्राइवेट व्यक्ति मुकेश वर्मा से जुड़ा है, जो बिना किसी सरकारी नियुक्ति के वर्षों से तहसील में अपना साम्राज्य चलाता आ रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह व्यक्ति न सिर्फ कर्मचारियों के साथ बैठता है, बल्कि खुलेआम सरकारी बाबू की कुर्सी पर कब्जा जमाकर फरियादियों के काम तय करता है — जैसे वही असली अधिकारी हो! वीडियो वायरल, सच सामने! सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो ने इस गुप्त खेल को सार्वजनिक कर दिया है। वीडियो में कथित तौर पर वही व्यक्ति कुर्सी पर बैठा दिखाई दे रहा है और लोगों को निर्देश देता नजर आ रहा है। यह दृश्य किसी फिल्म का नहीं, बल्कि सरकारी दफ्तर की हकीकत है। दोपहर के बाद बदल जाता है ‘राज’ तहसील के अंदरखाने की मानें तो दोपहर 3 बजे के बाद असली खेल शुरू होता है। जैसे ही संबंधित बाबू कार्यालय छोड़ता है, वैसे ही यह प्राइवेट व्यक्ति उसकी कुर्सी संभाल लेता है। शाम होते-होते पूरा दफ्तर दलाली केंद्र में तब्दील हो जाता है, जहां काम के नाम पर खुलेआम सौदेबाजी होती है। काम होगा, लेकिन कीमत लगेगी — यही है नियम! आरोप है कि मुकेश वर्मा सीधे फरियादियों से संपर्क करता है और काम कराने के नाम पर मोटी रकम वसूलता है। जो पहले दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज बताया जाता था, वही आज दलाली के दम पर लाखों की संपत्ति खड़ी कर चुका है — यह चर्चा अब तहसील से लेकर चौराहों तक गूंज रही है। कौन दे रहा संरक्षण? बड़ा सवाल! सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह सब बिना ऊपर की सेटिंग के कैसे संभव है? चर्चा है कि तहसील के ही एक प्रभावशाली अधिकारी का संरक्षण इस पूरे खेल को चला रहा है। मिश्रा जी नाम के एक अधिकारी पर भी उंगलियां उठ रही हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। कर्मचारियों की चुप्पी भी संदिग्ध तहसील के कई कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर माना कि उक्त व्यक्ति की कोई नियुक्ति नहीं है। फिर भी उसका वर्षों से दफ्तर में बैठना, फाइलों में दखल देना और कुर्सी पर कब्जा जमाना — यह सब बिना अंदरूनी मिलीभगत के संभव नहीं माना जा रहा। प्रशासन की चुप्पी = मिलीभगत? अब सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की चुप्पी पर है। क्या अधिकारियों को इस पूरे खेल की जानकारी नहीं, या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गई हैं? जनता पूछ रही — कब टूटेगा दलाली का किला? आम जनता अब खुलकर सवाल कर रही है कि क्या जिलाधिकारी इस मामले में कार्रवाई करेंगे या फिर यह प्राइवेट राज यूं ही चलता रहेगा? अगर इस मामले में सख्त जांच हुई, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे भ्रष्ट तंत्र का पर्दाफाश कर सकती है। #उरई_में_दलाल_राज #तहसील_पर_कब्जा #सरकारी_कुर्सी_पर_प्राइवेट_राज #जालौन_का_बड़ा_खुलासा #भ्रष्टाचार_का_खेल #दलाली_का_सिस्टम #वीडियो_वायरल_सच #प्रशासन_कटघरे_में #मिश्रा_जी_कनेक्शन #बाबू_गायब_दलाल_हाजिर #जनता_से_खुली_लूट #DM_एक्शन_जरूरी #ZeroTolerance_कहां_गई #System_Expose

Kalpi, Jalaun | Jun 9, 2026

जालौन में चोरी की चोरी, ऊपर से सीना जोरी! 

सपा जिलाध्यक्ष दीप राज गुर्जर पर FIR के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस, अधिकारियों को ही कटघरे में खड़ा करने की कोशिश 

उरई (जालौन) — जालौन में सियासत अब गरम नहीं, बल्कि उबलने लगी है। 
एक तरफ FIR नंबर 0321/2026 में सपा जिलाध्यक्ष दीप राज गुर्जर समेत 35 नामजद और करीब 200 अज्ञात लोगों पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है, तो दूसरी ओर वही दीप राज गुर्जर अब प्रेस वार्ता कर खुद को सही साबित करने में जुटे हैं।

मामला अब सीधे-सीधे यही सवाल खड़ा कर रहा है —
 क्या कानून तोड़ने के बाद अब उसे सही ठहराने की कोशिश हो रही है?

FIR में साफ आरोप — बिना अनुमति, कानून को ठेंगा

पुलिस तहरीर के मुताबिक 8 जून को:

- बिना अनुमति सपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे
- पूरे रोड को जाम कर दिया गया
- कलेक्ट्रेट तक जुलूस निकालकर नारेबाजी की गई

यह सब उस समय हुआ जब जिले में धारा 163 BNSS लागू थी — यानी साफ तौर पर भीड़ और प्रदर्शन पर प्रतिबंध था।

 आम जनता पिसी, एंबुलेंस तक फंसी!

FIR में दर्ज है कि:
- एंबुलेंस तक रास्ते में फंस गई
- इमरजेंसी सेवाएं बाधित हुईं
- आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा

 सवाल: जनता की आवाज उठाने के नाम पर जनता को ही परेशान करना — क्या यही राजनीति है?

 कलेक्ट्रेट में हंगामा, परीक्षार्थी भी परेशान

प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर:
- जोरदार नारेबाजी की
- फरियादियों को परेशान किया
- पुलिस भर्ती परीक्षा दे रहे अभ्यर्थियों के आवागमन में बाधा डाली

 FIR में नामजद आरोपी — लंबी लिस्ट!

इस मामले में जिन लोगों को नामजद किया गया है, उनमें प्रमुख हैं:
दीप राज गुर्जर (जिलाध्यक्ष, सपा)
सुरेन्द्र वसरिया, जानू निरंजन, कप्तान सिंह राजपूत, लाखन सिंह कुशवाहा,
परमात्मा शरण त्रिपाठी, बबलू अहिरवार, महेन्द्र कठेरिया, प्रदीप दीक्षित,
तिलक चन्द्र अहिरवार, वेद यादव, जमालुद्दीन, सिद्धार्थ यादव, वेदप्रकाश यादव,
प्रमोद सविता, दशरथ पाल, संदीप यादव, विजय कुशवाहा, कृष्णगोपाल यादव,
वीरेन्द्र सिंह यादव, अदर सिंह राठौर, विवेक यादव, सबीउद्दीन, वफाती, मानसिंह पाल,
अजय चौधरी, बब्बूराजा चौधरी, कुसुलता सक्सेना, ऋषभ द्विवेदी, दयाशंकर मुखिया,
शशीकांत, गौरीश द्विवेदी, शिखर यादव, सौरभ यादव, मु0 फैयाद बीजापुर।
 और करीब 200 अज्ञात महिला-पुरुष।

 FIR के बाद प्रेस वार्ता — सफाई या इमेज मेकओवर?

अब सबसे बड़ा विवाद यहीं से शुरू होता है—
 FIR दर्ज होने के बाद
 दीप राज गुर्जर प्रेस वार्ता करते हैं।
 पत्रकारों को बुलाकर चाय-नाश्ता कराया जाता है।
 खुद को सही और प्रशासन को गलत साबित करने की कोशिश।

 विपक्षी सवाल उठा रहे हैं:
क्या यह सच छुपाने की कोशिश है या जनता को गुमराह करने का खेल?

 प्रशासन बनाम सपा — टकराव खुलकर सामने

- पुलिस कह रही है: कानून का उल्लंघन हुआ
- सपा कह रही है: अनुमति पहले ही ली गई थी

 लेकिन सबसे बड़ा सवाल:
अगर अनुमति थी, तो FIR क्यों? और अगर नहीं थी, तो प्रेस वार्ता में सफाई क्यों?

 पुलिस सख्त — जांच जारी

प्रशासन के मुताबिक:
- वीडियो फुटेज खंगाले जा रहे हैं
- और लोगों की पहचान की जा रही है
- आगे और कार्रवाई तय है

 निष्कर्ष: जालौन में सियासत नहीं, सीधा टकराव

यह मामला अब सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं रहा—
 यह बन चुका है कानून बनाम राजनीति।
 और सवाल उठ रहा है — क्या नेता कानून से ऊपर हैं?

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जालौन में चोरी की चोरी, ऊपर से सीना जोरी! सपा जिलाध्यक्ष दीप राज गुर्जर पर FIR के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस, अधिकारियों को ही कटघरे में खड़ा करने की कोशिश उरई (जालौन) — जालौन में सियासत अब गरम नहीं, बल्कि उबलने लगी है। एक तरफ FIR नंबर 0321/2026 में सपा जिलाध्यक्ष दीप राज गुर्जर समेत 35 नामजद और करीब 200 अज्ञात लोगों पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है, तो दूसरी ओर वही दीप राज गुर्जर अब प्रेस वार्ता कर खुद को सही साबित करने में जुटे हैं। मामला अब सीधे-सीधे यही सवाल खड़ा कर रहा है — क्या कानून तोड़ने के बाद अब उसे सही ठहराने की कोशिश हो रही है? FIR में साफ आरोप — बिना अनुमति, कानून को ठेंगा पुलिस तहरीर के मुताबिक 8 जून को: - बिना अनुमति सपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे - पूरे रोड को जाम कर दिया गया - कलेक्ट्रेट तक जुलूस निकालकर नारेबाजी की गई यह सब उस समय हुआ जब जिले में धारा 163 BNSS लागू थी — यानी साफ तौर पर भीड़ और प्रदर्शन पर प्रतिबंध था। आम जनता पिसी, एंबुलेंस तक फंसी! FIR में दर्ज है कि: - एंबुलेंस तक रास्ते में फंस गई - इमरजेंसी सेवाएं बाधित हुईं - आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा सवाल: जनता की आवाज उठाने के नाम पर जनता को ही परेशान करना — क्या यही राजनीति है? कलेक्ट्रेट में हंगामा, परीक्षार्थी भी परेशान प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर: - जोरदार नारेबाजी की - फरियादियों को परेशान किया - पुलिस भर्ती परीक्षा दे रहे अभ्यर्थियों के आवागमन में बाधा डाली FIR में नामजद आरोपी — लंबी लिस्ट! इस मामले में जिन लोगों को नामजद किया गया है, उनमें प्रमुख हैं: दीप राज गुर्जर (जिलाध्यक्ष, सपा) सुरेन्द्र वसरिया, जानू निरंजन, कप्तान सिंह राजपूत, लाखन सिंह कुशवाहा, परमात्मा शरण त्रिपाठी, बबलू अहिरवार, महेन्द्र कठेरिया, प्रदीप दीक्षित, तिलक चन्द्र अहिरवार, वेद यादव, जमालुद्दीन, सिद्धार्थ यादव, वेदप्रकाश यादव, प्रमोद सविता, दशरथ पाल, संदीप यादव, विजय कुशवाहा, कृष्णगोपाल यादव, वीरेन्द्र सिंह यादव, अदर सिंह राठौर, विवेक यादव, सबीउद्दीन, वफाती, मानसिंह पाल, अजय चौधरी, बब्बूराजा चौधरी, कुसुलता सक्सेना, ऋषभ द्विवेदी, दयाशंकर मुखिया, शशीकांत, गौरीश द्विवेदी, शिखर यादव, सौरभ यादव, मु0 फैयाद बीजापुर। और करीब 200 अज्ञात महिला-पुरुष। FIR के बाद प्रेस वार्ता — सफाई या इमेज मेकओवर? अब सबसे बड़ा विवाद यहीं से शुरू होता है— FIR दर्ज होने के बाद दीप राज गुर्जर प्रेस वार्ता करते हैं। पत्रकारों को बुलाकर चाय-नाश्ता कराया जाता है। खुद को सही और प्रशासन को गलत साबित करने की कोशिश। विपक्षी सवाल उठा रहे हैं: क्या यह सच छुपाने की कोशिश है या जनता को गुमराह करने का खेल? प्रशासन बनाम सपा — टकराव खुलकर सामने - पुलिस कह रही है: कानून का उल्लंघन हुआ - सपा कह रही है: अनुमति पहले ही ली गई थी लेकिन सबसे बड़ा सवाल: अगर अनुमति थी, तो FIR क्यों? और अगर नहीं थी, तो प्रेस वार्ता में सफाई क्यों? पुलिस सख्त — जांच जारी प्रशासन के मुताबिक: - वीडियो फुटेज खंगाले जा रहे हैं - और लोगों की पहचान की जा रही है - आगे और कार्रवाई तय है निष्कर्ष: जालौन में सियासत नहीं, सीधा टकराव यह मामला अब सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं रहा— यह बन चुका है कानून बनाम राजनीति। और सवाल उठ रहा है — क्या नेता कानून से ऊपर हैं? #Jalaun #Orai #DeepRajGurjar #SamajwadiParty #AkhileshYadav #UPPolice #FIR0321 #BreakingNews #PoliticalDrama #LawAndOrder #Section163 #BNSS #PublicIssue #ViralNews #HindiNews #GroundReport #जनआक्रोश #जालौन #उरई #सपा #दीपराज_गुर्जर #पुलिस_कार्रवाई #ब्रेकिंग

Kalpi, Jalaun | Jun 9, 2026