आंगनवाड़ी केन्द्रों पर साप्ताहिक मेन्यू में विविधता और गर्म पके भोजन की गुणवत्ता पर जोर, सैम बच्चों की विशेष निगरानी
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कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता के निर्देशन एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती विनिता लोढ़ा के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 30 सितंबर तक 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष पोषण माह की थीम “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” निर्धारित की गई है। निर्धारित दिवसवार गतिविधि कैलेंडर के अनुसार 15 सितंबर को जिले के आंगनवाड़ी केन्द्रों पर साप्ताहिक मेन्यू में रोटेशन, गर्म पके भोजन की गुणवत्ता, बाल देखभाल एवं पोषण तथा सामुदायिक सहभागिता से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की गईं।
आंगनवाड़ी केन्द्रों पर बच्चों के भोजन में रुचि और पोषण संबंधी विविधता बढ़ाने के उद्देश्य से साप्ताहिक गर्म पका भोजन (HCM) के मेन्यू में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थों के अनुसार परिवर्तन करने पर जोर दिया गया। कार्यकर्ताओं द्वारा अभिभावकों को बताया गया कि बच्चों के दैनिक भोजन में अनाज के साथ दालें, हरी एवं मौसमी सब्जियां तथा विभिन्न पौष्टिक खाद्य समूहों को शामिल किया जाना आवश्यक है। भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता एवं निर्धारित मापदंडों के अनुरूप वितरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
पंचायत प्रतिनिधियों और समुदाय के साथ संवाद -
“हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” विषय पर पंचायत प्रतिनिधियों, स्वयं सहायता समूहों एवं समुदाय के सदस्यों के साथ संवाद किया गया। इस दौरान आंगनवाड़ी केन्द्रों से उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की गुणवत्ता, बच्चों एवं हितग्राहियों को मिलने वाले पोषण आहार तथा पोषण माह के दौरान आयोजित गतिविधियों में सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने पर चर्चा की गई। आंगनवाड़ी केन्द्रों को बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य एवं प्रारंभिक देखभाल का महत्वपूर्ण केन्द्र बताते हुए समुदाय से इनके प्रभावी संचालन में सक्रिय सहयोग की अपील की गई।
पहले 1,000 दिनों में परामर्श -
पोषण माह के अंतर्गत बच्चे के जीवन के पहले 1,000 दिनों को विशेष महत्व देते हुए अभिभावकों को पोषण के संबंध में परामर्श दिया गया। शिशु के जन्म से लेकर दो वर्ष की आयु तक उचित पोषण, समय पर आहार, देखभाल, संवाद तथा बच्चे की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील व्यवहार के महत्व को समझाया गया। इसके साथ ही शिशु दिवस एवं अन्नप्राशन दिवस के आयोजन के माध्यम से तीन वर्ष तक के बच्चों के अभिभावकों से संवाद कर नवाचारी गतिविधियों और पोषण संबंधी परामर्श दिए गए।
SAM बच्चों की विशेष निगरानी -
कुपोषण की प्रभावी पहचान एवं निगरानी के लिए चिन्हित 6 से 60 माह आयु वर्ग के SAM (गंभीर तीव्र कुपोषित) बच्चों की विशेष जांच की गई। आवश्यकता के अनुसार गंभीर कुपोषित बच्चों को उपचार एवं पोषण पुनर्वास के लिए पोषण पुनर्वास केन्द्र (NRC) में भर्ती कराने की प्रक्रिया सुनिश्चित की गई। इसके अलावा जन्म से 6 वर्ष तक के बच्चों का शारीरिक माप लेकर उनकी पोषण स्थिति का आकलन किया गया तथा प्राप्त जानकारी को पोषण ट्रैकर में दर्ज करने की गतिविधि की गई।
PMMVY के पात्र हितग्राहियों के पंजीयन को गति -
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों के निजी एवं शासकीय अस्पतालों से संबंधित प्रमाणों की जांच कर पोर्टल पर पंजीयन की प्रक्रिया को भी गति दी गई। स्थानीय खाद्य विविधता पर आधारित पौष्टिक प्रसादी का वितरण भी आज की गतिविधियों का हिस्सा रहा। महिला एवं बाल विकास विभाग ने बताया कि राष्ट्रीय पोषण माह का उद्देश्य केवल जागरूकता तक सीमित न रहकर पोषण संबंधी व्यवहार में सकारात्मक बदलाव तथा आंगनवाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार लाना है। विभाग द्वारा पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, मातृ समितियों, अभिभावकों एवं आमजन से आंगनवाड़ी केन्द्रों की गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता की अपील की गई है, ताकि “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” की भावना को प्रभावी जनभागीदारी में परिवर्तित किया जा सके। #Vidisha
Vidisha, Madhya Pradesh | Sep 15, 2026