कैरियर प्वाइंट विश्वविद्यालय में सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों पर आधारित संकाय विकास कार्यक्रम का शुभारंभ
जोगिंद्रनगर/उमेश कुमार।
कैरियर प्वाइंट विश्वविद्यालय, हमीरपुर में एआईसीटीई द्वारा अनुमोदित सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों पर आधारित तीन दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का शुभारंभ श्री शारदा ज्योतिष निकेतन जोगिंद्रनगर के संस्थापक प्रख्यात ज्योतिषाचार्य एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ डॉ. कैप्टन लेख राज शर्मा द्वारा किया गया।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. कैप्टन लेख राज शर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हिमाचल प्रदेश एवं पंजाब से आए प्राध्यापक वर्ग को संबोधित किया। उनके प्रेरणादायक विचारों ने पूरे कार्यक्रम को एक सकारात्मक एवं चिंतनशील वातावरण प्रदान किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली में संस्कृति और सभ्यता से जुड़े मूल्यों का महत्व लगातार कम होता जा रहा है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों के चारित्रिक विकास, मातृभाषा एवं राष्ट्रभाषा के प्रति सम्मान में कमी देखी जा रही है, जिसके कारण युवा पीढ़ी अनुशासनहीनता और विपथगामी प्रवृत्तियों की ओर अग्रसर हो रही है।
डॉ. शर्मा ने कहा कि प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति में व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास पर विशेष बल दिया जाता था। हमारी संस्कृति मानव व्यक्तित्व को उत्कृष्ट बनाने की प्रक्रिया है, जबकि प्रकृति द्वारा प्रदत्त संसाधनों और शक्तियों के माध्यम से मनुष्य द्वारा भौतिक क्षेत्र में की गई उन्नति को सभ्यता कहा जाता है। उन्होंने बताया कि भारतीय परंपरा में जन्म से लेकर जीवन के अंतिम चरण तक 16 संस्कारों के माध्यम से व्यक्ति के शरीर और मन को संस्कारित कर उसे समाजोपयोगी एवं परोपकारी मूल्यों से युक्त बनाया जाता था। दुर्भाग्यवश आधुनिकता की अंधी दौड़ में ये परंपराएं धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा में संस्कृति और संस्कारों का समावेश अत्यंत आवश्यक है। मूल्य-आधारित शिक्षा के माध्यम से ही शिक्षकों को सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों को शिक्षण एवं अधिगम प्रक्रियाओं में प्रभावी रूप से एकीकृत करने के लिए सशक्त बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में कैरियर प्वाइंट विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजीव शर्मा ने मुख्य अतिथि डॉ. कैप्टन लेख राज शर्मा को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया तथा उनके प्रेरणादायी उद्बोधन के लिए आभार व्यक्त किया।
यह संकाय विकास कार्यक्रम शिक्षकों में मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा शिक्षा को अधिक मूल्यपरक और समाजोपयोगी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।