बोबी की मौत पर उठे सवाल: आखिर समय पर क्यों नहीं मिली एंबुलेंस?
कुम्हारका की 36 वर्षीय बोबी देवी ने टांडा रेफर होने के बाद बाथरी के पास तोड़ा दम | परिजनों ने 108 एंबुलेंस में देरी के लगाए गंभीर आरोप
चंबा 21 सितम्बर
कुम्हारका पंचायत की 36 वर्षीय बोबी देवी की मौत ने चंबा की स्वास्थ्य और आपातकालीन एंबुलेंस व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घास काटते समय ढांक से गिरकर घायल हुई बोबी देवी को परिजन उपचार के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल चंबा लेकर पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें टांडा रेफर किया गया। लेकिन परिजनों का आरोप है कि रेफर किए जाने के बाद उन्हें काफी देर तक 108 एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाई। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक परिजनों का कहना है कि वे सुबह करीब 7 बजे अस्पताल पहुंच गए थे और लगभग पौने 10 बजे एंबुलेंस मिली। टांडा ले जाते समय बाथरी के पास बोबी देवी ने दम तोड़ दिया।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या गंभीर मरीज के लिए एंबुलेंस की उपलब्धता में हुई देरी ने इलाज की पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया?
हालांकि, इस सवाल का अंतिम जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। 108 सेवा के जिला समन्वयक सुनील धर के अनुसार मेडिकल कॉलेज से सुबह 8:24 बजे एंबुलेंस की मांग प्राप्त हुई और बालू से एंबुलेंस को रवाना किया गया। उनका कहना है कि मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए व्यवस्था की गई थी। मेडिकल कॉलेज के एमएस डॉ. प्रदीप सिंह ने भी 108 प्रबंधन से घटना को लेकर स्पष्टीकरण मांगे जाने और पूरे घटनाक्रम की जांच की बात कही है।
लेकिन जनता के सवाल इससे खत्म नहीं होते।
मेडिकल कॉलेज से करीब 4 किलोमीटर दूर क्यों खड़ी है एंबुलेंस व्यवस्था?
यदि मेडिकल कॉलेज चंबा में गंभीर मरीज को रेफर करने के लिए एंबुलेंस की आवश्यकता है, तो एंबुलेंस की तैनाती ऐसी जगह क्यों हो कि उसे अस्पताल तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लगे? बालू में एंबुलेंस की पार्किंग व्यवस्था क्या आपातकालीन जरूरतों के अनुरूप है?
और अगर अस्पताल परिसर अथवा आसपास उपलब्ध एंबुलेंस पर्याप्त नहीं हैं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
सरोल में खड़ी एंबुलेंसों का क्या होगा?
चंबा में पहले भी एंबुलेंस व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। जनवरी 2026 की एक रिपोर्ट में मेडिकल कॉलेज की तीन एंबुलेंस में से केवल एक के सेवा में होने और दूसरी के खराब तथा तीसरी के पासिंग में अटके होने की बात सामने आई थी।
ऐसे में जनता जानना चाहती है कि जो एंबुलेंस लंबे समय से उपयोग में नहीं हैं, उनकी मरम्मत, संचालन अथवा नीलामी को लेकर क्या कार्रवाई हुई?
मेडिकल कॉलेज प्रशासन से जनता के सीधे सवाल
क्या बोबी देवी को समय पर एंबुलेंस उपलब्ध हुई थी?
एंबुलेंस की मांग किस समय दर्ज हुई और मौके से एंबुलेंस किस समय रवाना हुई?
एंबुलेंस की वास्तविक लोकेशन और रिस्पॉन्स टाइम का रिकॉर्ड क्या कहता है?
अगर देरी हुई तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
क्या मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मामले की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच शुरू कर दी है?
और क्या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी?
चंबा मेडिकल कॉलेज में इससे पहले भी एंबुलेंस और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में बोबी देवी की मौत को केवल एक अलग घटना मानकर छोड़ देना जनता के सवालों का समाधान नहीं होगा।
सवाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने का नहीं, जवाबदेही तय करने का है।
अगर व्यवस्था में कमी थी तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। अगर एंबुलेंस समय पर रवाना हुई थी, तो उसका पूरा रिकॉर्ड जनता के सामने आना चाहिए। और अगर देरी के आरोप सही नहीं हैं, तो तथ्य भी सार्वजनिक होने चाहिए।
क्योंकि एक परिवार ने अपना सदस्य खोया है—और अब पूरे चंबा की जनता जवाब चाहती है।
पूछता है चंबा—आपातकाल में एंबुलेंस का इंतजार आखिर कब तक?
मेडिकल कॉलेज में मरीजों की जिंदगी से जुड़े सवालों पर जवाबदेही कब तय होगी?
PANGI LIVE NEWS — सवाल व्यवस्था से, जवाब जनता के लिए।
Chamba, Chamba | Sep 21, 2026