चारधाम यात्रा श्रद्धा अर विश्वास की यात्रा छ, हुड़दंग की नि!
देवभूमि उत्तराखण्ड सब अतिथ्यों का सम्मान करदी, पण यख की संस्कृति, सभ्यता अर स्थानीय जनभावनौं का भी आदर होणू जरूरी च
दीपक कैंतुरा जी की कविता यखै संदेश देन्दी छ कि आस्था का नाम पर धौंस, दिखावा अर हुड़दंग कतै स्वीकार नि होलू।
"चारधाम यात्रा पर तुम जागु-जागु बटि औणा च,
समझदार चुपचाप दर्शन कना च,
चकड़ैत हुड़दंग मचौणा च..."
देवभूमि की शांति, संस्कृति अर स्वाभिमान बचौणू हम सबकी जिम्मेदारी छ।
"यात्रा श्रद्धा स करौ, धौंस स नि।"
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