दो दिवसीय परिसंवाद का हुआ समापन , जनजातीय एवं लोक अनुष्ठानों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और नई पीढ़ी तक हस्तांतरण पर हुआ मंथन
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कोरकू एवं निमाड़ अंचल की समृद्ध जनजातीय एवं लोक परंपराओं, अनुष्ठानों तथा उनसे जुड़ी सांस्कृतिक स्मृतियों को समझने और संरक्षित करने के उद्देश्य से माखनलाल चतुर्वेदी शासकीय स्नातकोत्तर कन्या महाविद्यालय, खंडवा के सभागार में दो दिवसीय परिसंवाद का आयोजन किया गया। इस दो दिवसीय आयोजन के पहले दिन शनिवार को वक्ताओं एवं कलाकारों ने निमाड़ और जनजातीय लोक अनुष्ठानों की सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया। इस अवसर पर विभिन्न अनुष्ठानों की परंपरा, सामाजिक महत्त्व और प्रकृति से उनके संबंध पर शोधपरक विमर्श के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं।
शैलेन्द्र मालीवाड़ ने निमाड़ के बारेला समुदाय में प्रचलित जिरोती एवं नवाई अनुष्ठानों पर चर्चा की। आयुष सिंघाड़ ने झाबुआ के जातर अनुष्ठान की जानकारी देते हुए बताया कि इसमें दिनभर गायणा गाकर बाब देव को प्रसन्न कर मंगलकामना की जाती है। कमलेश गणावा ने जनजातीय दिवासा अनुष्ठान को सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए पूजा-परंपरा और सामुदायिक एकता के महत्व पर प्रकाश डाला।
डॉ. अर्चना शुक्ला ने निमाड़ की किशोरियों द्वारा 16 दिनों तक मनाए जाने वाले सांझाकूली अनुष्ठान पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में सुश्री अनुजा जोशी की टीम ने लोकगीतों के साथ मनमोहक गणगौर नृत्य प्रस्तुत किया। श्रीमती रुकमणी बाई ने निमाड़ के भील समुदाय में प्रचलित नाई भराई अनुष्ठान का प्रस्तुतीकरण किया। उन्होंने बताया कि यह अनुष्ठान फसल की बुवाई के समय किया जाता है तथा वर्षा के आह्वान और अच्छी फसल की कामना के लिए इससे जुड़ी लोक परंपराओं का निर्वहन किया जाता है।
बारेला समुदाय के भीम डावर ने अपने समूह के साथ ढाको के वादन के साथ देव गायना प्रस्तुत किया, जिसे पिथोरा गायन के नाम से भी जाना जाता है। वहीं सुखलाल जी बुढ़ाना ने नागमोती अनुष्ठान का प्रस्तुतिकरण किया। उन्होंने चरवो पर बड़ी थाल रखकर कड़ियों के माध्यम से वादन करते हुए लोक गायन की प्रस्तुति दी।
प्रथम सत्र के अध्यक्षीय उद्बोधन में हेमलता उपाध्याय ने कहा कि विकास और प्रगति के साथ आगे बढ़ना आवश्यक है, लेकिन हमें अपनी जड़ों से जुड़कर संस्कृति और प्रकृति के साथ जीना सीखना होगा। हमारी सांस्कृतिक परंपराएं ही हमारी पहचान और समृद्धि का आधार हैं। छोगालाल कुमरावत ने चौमासा में होने वाले सिंगाड़ एवं काकड़ पूजा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। समापन अवसर पर डॉ. विनय जैन ने परिसंवाद में प्रस्तुत शोधपरक विचारों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन जनजातीय एवं लोक परंपराओं में नई पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
लोक कला एवं बोली विकास अकादमी के निदेशक डॉ. पारे ने कहा कि लोक और जनजातीय अनुष्ठान एक साथ चित्रांकन, गायन, धर्म और अध्यात्म की त्रिवेणी है।इनमे रंजन,रस और ज्ञान प्रवाहित होता है। उन्होंने महाविद्यालय के सहयोग से परिसंवाद के सफल आयोजन के लिए महाविद्यालय प्रशासन, विशेषज्ञों, शोधार्थियों, कलाकारों और सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
Jansampark Madhya Pradesh
General Administration Department, MP
Department of Tribal Welfare, Madhya Pradesh
Department of Culture, Madhya Pradesh
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1 views | Khandwa, Madhya Pradesh | Aug 22, 2026