ये कुम्हेर है,,,,,,,,आसमाँ से गिरी दो बूँदें तो मंजर बदल गया।सड़कें बनीं तालाब, कस्वा का हर दावा बह गया।
हल्की सी फुहार ने सारा गुरूर तोड़ दिया,कागजी इंतजामों को हकीकत ने झकझोर दिया।
विकास की बातें जो करते थे बंद कमरों में,आज उनकी पोल तैर रही है पानी के थपेड़ों में।
देख लो कुम्हेर में विकास हो रहा है,,,👁️👁️