बुन कर धागे साज़िश के, उसने अपना काम कर दिया,एक मासूम सी टिड्डी को, पल में बेज़ुबान कर दिया।उड़ती फिरती थी जो कल तक, आज़ाद फिज़ाओं में,किस्मत के एक जाले ने, उसका किस्सा तमाम कर दिया।
बुन कर धागे साज़िश के, उसने अपना काम कर दिया,एक मासूम सी टिड्डी को, पल में बेज़ुबान कर दिया।उड़ती फिरती थी जो कल तक, आज़ाद फिज़ाओं में,किस्मत के एक जाले ने, उसका किस्सा तमाम कर दिया। - Kumher News