राजिंदर राणा की खुद की प्रवृत्ति ऐशो-आराम की, इसलिए हर जगह दिखता है विलास: विवेक कटोच
मुख्यमंत्री कार्यालय जनता की सेवा का केंद्र, सुक्खू की निजी संपत्ति नहीं
राणा की राजनीति मुख्यमंत्रियों से ईर्ष्या और निराधार आरोपों तक सीमित
कांग्रेस नेता एवं रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (RTA) के सदस्य विवेक कटोच ने भाजपा प्रदेश प्रवक्ता राजिंदर राणा के बयानों पर तीखा पलटवार करते हुए उन्हें जमकर आड़े हाथों लिया। उन्होंने दो टूक कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान, प्रशासनिक कार्यों के सुचारू संचालन और समूचे प्रदेश के सर्वांगीण विकास से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों का प्रमुख केंद्र है, न कि किसी के व्यक्तिगत ऐशो-आराम का अड्डा।
विवेक कटोच ने कहा कि राजिंदर राणा की अपनी प्रवृत्ति ही हमेशा से ऐशो-आराम वाली रही है, इसलिए उन्हें जनहित व लोककल्याण के लिए किए जा रहे हर प्रशासनिक काम में केवल ऐशो-आराम और विलासिता ही नजर आती है। मुख्यमंत्री कार्यालय का विस्तार समय की मांग, बढ़ती प्रशासनिक आवश्यकताओं और कार्यप्रणाली में अधिक कार्यकुशलता लाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। ऐसे महत्वपूर्ण और नीतिगत विषय पर बिना किसी पुख्ता तथ्यों के बेतुके सवाल उठाना राणा की संकीर्ण सोच और गहरी राजनीतिक कुंठा को ही उजागर करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्यालय पूरी तरह से प्रदेश की जनता की सेवा के लिए समर्पित है, यह मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की कोई निजी संपत्ति या जागीर नहीं है।
राणा के राजनीतिक रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए विवेक कटोच ने कहा कि जब से राजिंदर राणा ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा है, तब से उनकी पूरी राजनीति सिर्फ प्रदेश के मुख्यमंत्रियों पर बेबुनियाद आरोप लगाने और उन्हें झूठे बयानों से कटघरे में खड़ा करने तक ही सीमित होकर रह गई है। चाहे स्वर्गीय वीरभद्र सिंह रहे हों, प्रेम कुमार धूमल हों, जयराम ठाकुर हों या फिर वर्तमान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू हों—राणा का रवैया हमेशा ईर्ष्या से भरा हुआ रहा। पद पर बैठे मुख्यमंत्रियों से अकारण ईर्ष्या करना, निराधार आरोप मढ़ना और फिर अखबारों में उन्हीं आरोपों के सहारे सस्ती सुर्खियां बटोरना उनकी पुरानी राजनीतिक शैली व फितरत बन चुकी है।
विवेक कटोच ने राणा की पृष्ठभूमि और अकूत संपत्ति पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता को नैतिकता का उपदेश देने से पहले उन्हें खुद अपने आचरण और जीवनशैली पर भी नजर डालनी चाहिए। उन्होंने तीखे लहजे में कहा, “यदि राजिंदर राणा खुद को इतना ही बड़ा ईमानदार और पाक-साफ बताते हैं, तो उन्हें हिमाचल की जनता को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि कभी ढोलकी बजाने और अंडे बेचने वाले व्यक्ति के पास चण्डीगढ़ और पटलांदर में इतना बड़ा व आलीशान महल खड़ा करने और अकूत संपत्ति जुटाने के साधन कहां से आए?”
विवेक कटोच ने कहा कि राणा को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने बयानों, दावों और अपनी खुद की संदिग्ध जीवनशैली का जनता को जवाब देना चाहिए, उसके बाद ही उन्हें प्रदेश सरकार के प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल खड़े करने का कोई नैतिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जागरूक जनता अब इस नकारात्मक राजनीति, व्यक्तिगत कीचड़ उछालने की प्रवृत्ति और झूठे नैरेटिव से पूरी तरह ऊब चुकी है तथा वह केवल धरातल पर विकास, पारदर्शिता और जनसेवा के ठोस कार्यों का ही हिसाब देखना चाहती है।
उन्होंने ने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय को लेकर बेवजह का राजनीतिक बखेड़ा और अनावश्यक विवाद खड़ा करने के बजाय राजिंदर राणा को सरकार के जनहितकारी फैसलों पर खुले मन से तथ्यात्मक चर्चा करनी चाहिए। जनता की सेवा के लिए स्थापित इस संस्थान को ऐशो-आराम का अड्डा बताना सीधे तौर पर राणा की नकारात्मक सोच को उजागर करता है ।