जोगी बिठाई रस्म की झलक.
बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि लगभग 75 दिनों तक चलने वाली आस्था, आदिवासी संस्कृति और परंपराओं की अनूठी विरासत है। इसी पर्व की महत्वपूर्ण रस्मों में से एक है जोगी बिठाई, जो बस्तर दशहरा निर्विघ्न और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने की कामना से जुड़ी है। बस्तर दशहरा की यह रस्म जगदलपुर के ऐतिहासिक सिरहासार भवन में निभाई जाती है।
जोगी बिठाई की रस्म कैसे निभाई जाती है?
1. सिरहासार भवन में जोगी का आगमन
परंपरा के अनुसार, जोगी बिठाई की रस्म के लिए हल्बा समुदाय के एक पुरुष को जोगी के रूप में बैठाया जाता है। यह अनुष्ठान नवरात्रि के आरंभिक चरण में होता है।
2. नौ दिनों की तपस्या
जोगी सिरहासार भवन में निर्धारित स्थान पर बने गड्ढे में योग मुद्रा में बैठकर नौ दिनों तक तपस्या करता है। इस दौरान उपवास और संयम का विशेष महत्व माना जाता है।
3. निर्विघ्न दशहरा की कामना
इस तपस्या का धार्मिक उद्देश्य माँ दंतेश्वरी के प्रति श्रद्धा प्रक�