*#कहानी_बदलाव_की*
*जब हुनर को मिला शासन का संबल*
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*#प्रधानमंत्री_विश्वकर्मा_योजना से बड़वानी के श्री दयाराम वर्मा ने गढ़ी स्वावलंबन की नई दास्तान*
बड़वानी 07 अक्टूबर 2026/ हाथों का हुनर इंसान की सबसे बड़ी पूंजी होता है, बशर्ते उसे सही समय पर सही मंच और संबल मिल जाए। बड़वानी जिले के पारंपरिक कारीगर श्री दयाराम वर्मा आज इस बात का जीवंत उदाहरण हैं। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना ने उनके जीवन और व्यवसाय को एक नई उड़ान दी है, जिससे वे आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुके हैं।
*फिशिंग नेट निर्माण के हुनर को मिला आधुनिक आयाम*
श्री दयाराम वर्मा का परिवार पुश्तैनी रूप से मत्स्याखेट कार्य से जुड़ा हुआ था, इसी के माध्यम से अपनी आजीविका प्राप्त करते थे । श्री दयाराम वर्मा ने मत्स्याखेट के साथ - साथ फिशिंग नेट निर्माण को अपना आय का जरिया बनाया । फिशिंग नेट मेकर ( मछली पकड़ने का जाल बनाने वाले ) के रूप में अपना नाम बनाने के बारे में सोचा, लेकिन सीमित पूंजी और पारंपरिक तरीकों के कारण उन्हें अपने व्यवसाय के विस्तार में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। ऐसे में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना उनके लिए एक बड़ा संबल बनकर आई।
*बैंक ऋण और आधुनिक टूलकिट से बढ़ी*
रफ्तार योजना के तहत श्री दयाराम को व्यवसाय को गति देने के लिए बैंक के माध्यम से 1.00 लाख रुपये का आसान ऋण स्वीकृत हुआ। इस वित्तीय सहायता ने उन्हें अपने कार्य को बड़े स्तर पर करने का आत्मविश्वास दिया। इसके साथ ही, भारत सरकार द्वारा उन्हें आधुनिक टूल किट भी निःशुल्क प्राप्त हुई, जिससे अब उनका काम न केवल आसान हुआ है, बल्कि उत्पादन की गुणवत्ता और गति भी बेहतर हुई है।
जिले के अन्य कारीगरों के लिए बने प्रेरणास्त्रोत आज श्री दयाराम वर्मा बैंक के सहयोग और शासकीय योजना के क्रियान्वयन से बेहद संतुष्ट हैं। वे गर्व से कहते हैं कि इस योजना ने उनके संघर्ष को आसान कर दिया है। उनकी यह सफलता बड़वानी जिले के उन सभी पारंपरिक शिल्पकारों और कारीगरों के लिए एक प्रेरणा है, जो अपने हुनर को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते हैं।
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