“मेरे पोते को रोजगार दिला दीजिए…” दादी की पुकार सुनकर दौड़ा प्रशासन, दिव्यांग अभिषेक को मिली नौकरी
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Bokaro: उम्र की ढलती दहलीज पर खड़ी एक दादी के दिल में बस एक ही चिंता थी - उसके पोते का भविष्य कैसे संवरेगा? पोता पढ़ा-लिखा है, मेहनत करने को तैयार है, लेकिन सुन नहीं सकता। नौकरी की तलाश में भटक रहे 22 वर्षीय अभिषेक कुमार के लिए उसकी दादी फेंकनी देवी ने आखिरकार अपनी आवाज प्रशासन तक पहुंचाई। और इस बार उनकी फरियाद सिर्फ सुनी नहीं गई, बल्कि उस पर तुरंत कार्रवाई भी हुई।
##दादी ने मांगा था सहारा, प्रशासन ने दिया उम्मीद का हाथ
बी.एस. सिटी के सेक्टर-12 स्थित हनुमान नगर निवासी फेंकनी देवी अपने दिव्यांग पोते अभिषेक कुमार के रोजगार की गुहार लेकर “हम आपको सुनते हैं... लोक संवाद” कार्यक्रम में पहुंचीं। उनकी आंखों में चिंता थी, लेकिन उम्मीद भी थी कि शायद कोई उनके पोते के भविष्य की राह आसान कर सके। उन्होंने उपायुक्त अजय नाथ झा के सामने अपनी फरियाद रखी। मामला सामने आते ही उपायुक्त ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल संज्ञान लिया और संबंधित कंपनी से समन्वय कर अभिषेक के लिए रोजगार की संभावना तलाशने की पहल शुरू की।
##कुछ दिनों में बदली तस्वीर, हाथ में आया नियुक्ति पत्र
प्रशासन की पहल रंग लाई और कुछ ही दिनों के भीतर अभिषेक कुमार के हाथों में वह कागज था, जिसका इंतजार उनके परिवार को लंबे समय से था - नियुक्ति पत्र। सुंदरम स्टील प्राइवेट लिमिटेड ने अभिषेक को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। नियुक्ति पत्र मिलते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। जिस घर में पोते के भविष्य को लेकर चिंता थी, वहां अब उम्मीद और आत्मविश्वास की नई रोशनी दिखाई दे रही है।
##अभिषेक सुन नहीं सकता, लेकिन सपनों की आवाज जरूर सुनता है
अभिषेक कुमार 22 वर्ष के हैं और इंटरमीडिएट तक पढ़ाई कर चुके हैं। वे श्रवण दिव्यांग हैं। उनकी शारीरिक चुनौती ने जिंदगी की राह जरूर कठिन बनाई, लेकिन उनके हौसले को नहीं तोड़ा। नौकरी का यह अवसर उनके लिए केवल रोजगार नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह नियुक्ति इस बात का संदेश भी है कि किसी व्यक्ति की क्षमता को उसकी दिव्यांगता से नहीं, बल्कि उसके हौसले, मेहनत और अवसर से आंकना चाहिए।
##दादी की आंखों में खुशी, चेहरे पर संतोष
पोते के हाथ में नियुक्ति पत्र देखकर फेंकनी देवी की खुशी शब्दों में बयां करना मुश्किल था। जिस उम्मीद के साथ वह प्रशासन के दरवाजे तक पहुंची थीं, वह उम्मीद कुछ ही दिनों में हकीकत बन गई। अपनी फरियाद पर इतनी तेजी से कार्रवाई होने पर उन्होंने जिला प्रशासन के प्रति आभार जताया। उनके लिए यह सिर्फ पोते की नौकरी नहीं थी, बल्कि उसके भविष्य को लेकर वर्षों से मन में पल रही चिंता का एक बड़ा जवाब था।
##“लोक संवाद” में सिर्फ सुनी नहीं जातीं फरियादें, समाधान भी तलाशा जाता है
उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि “हम आपको सुनते हैं... लोक संवाद” का उद्देश्य केवल लोगों की समस्याएं सुनना नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों की परेशानियों का संवेदनशीलता के साथ समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का प्रयास है कि वास्तविक जरूरत वाले लोगों तक सहायता पहुंचे और उनकी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान निकले।
##समाज भी आगे आए, किसी की जिंदगी बदल सकती है आपकी एक पहल
उपायुक्त ने समाज के सक्षम लोगों और संस्थानों से भी अपील की कि वे जरूरतमंद, दिव्यांग और पीड़ित लोगों की सहायता के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि प्रशासन अकेले हर समस्या का समाधान नहीं कर सकता। समाज, उद्योग और संस्थानों की भागीदारी से जरूरतमंद परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी जरूरतमंद परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना ही प्रशासन और समाज की वास्तविक सफलता है।
##एक नियुक्ति पत्र, लेकिन संदेश बहुत बड़ा
अभिषेक की कहानी सिर्फ एक नौकरी मिलने की कहानी नहीं है। यह उस दादी की उम्मीद की कहानी है, जिसने उम्र और परिस्थितियों की परवाह किए बिना अपने पोते के भविष्य के लिए आवाज उठाई। यह उस प्रशासनिक संवेदनशीलता की कहानी है, जहां एक फरियाद को कागजों के ढेर में दबने नहीं दिया गया। और यह समाज के लिए भी एक संदेश है कि यदि अवसर दिया जाए तो दिव्यांगता किसी इंसान के सपनों की सीमा नहीं बन सकती।
सुंदरम स्टील प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग के लिए उपायुक्त ने कंपनी के प्रतिनिधियों का आभार जताया और अन्य संस्थानों से भी ऐसे मामलों में आगे आने का आह्वान किया। आज अभिषेक के हाथ में नियुक्ति पत्र है। चेहरे पर नई उम्मीद है। और उसकी दादी फेंकनी देवी के दिल में शायद वह सबसे बड़ा सुकून है, जिसके लिए उन्होंने लोक संवाद में पहुंचकर आवाज उठाई थी -“मेरे पोते को भी अपने पैरों पर खड़ा होने का मौका मिले।”
Chas, Bokaro | Sep 3, 2026