हर घर तिरंगा अभियान का आगाज़
शास.उ.मा.भवती में तिरंगे की विकास यात्रा सुन विद्यार्थी हुए गर्वित
बड़वानी 11 अगस्त 2026/भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के अंतर्गत संचालित ‘हर घर तिरंगा’ अभियान 2026 के तहत देशभर में 9 से 17 अगस्त तक विभिन्न गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भवती द्वारा विद्यार्थियों के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसकी थीम तिरंगे का इतिहास एवं विकास यात्रा रही।
थीम पर आयोजित कार्यक्रम के सुव्यवस्थित प्रदर्शन हेतु हर घर तिरंगा अभियान के पोर्टल पर उपलब्ध फिल्मों का इंटरएक्टिव बोर्ड के माध्यम से प्रदर्शन किया गया। फिल्म के माध्यम से विद्यार्थियों को स्वतंत्र भारत के प्रारंभिक दौर में तिरंगे से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों की जानकारी दी गई। इस दौरान संस्था के उच्च माध्यमिक शिक्षक श्री शफीक शेख ने फिल्म में प्रदर्शित विभिन्न तथ्यों एवं महत्वपूर्ण जानकारियों को विद्यार्थियों को सरल एवं स्पष्ट रूप से समझाया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि 22 जुलाई 1947 को भारत की संविधान सभा ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में भारतीय ध्वज के वर्तमान स्वरूप तिरंगे को स्वतंत्र भारत के प्रतीक के रूप में अपनाया। संविधान सभा की सदस्य एवं सामाजिक कार्यकर्ता हंसा मेहता ने राष्ट्रीय ध्वज प्रस्तुत किया तथा इसके महत्व और सम्मान से जुड़े विषयों को संसद के समक्ष रखा। स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर संसद भवन में तिरंगे को फहराया गया। अगली सुबह सूर्य की पहली किरण देश में आजादी का नया सवेरा लेकर आई। यह दिन था 15 अगस्त 1947 । पंडित जवाहरलाल जी नेहरू ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराया । यह ऐतिहासिक क्षण देश की स्वतंत्रता और नए भारत के उदय का प्रतीक बना। यह तिरंगा 12 फीट लंबा 8 फीट चौड़ा था और सर्वप्रथम लहराये जाने की भावना जुड़ी होने से इसे सहेजकर रखा गया है । आज भी यह तिरंगा दिल्ली में आर्मी बैटल मैस में सुरक्षित रखा हुआ है। यह थी पहले तिरंगे की कहानी । इस दौरान तालियों की गड़गड़ाहट से परिसर गूंज उठा।
विद्यार्थियों को तिरंगे की विकास यात्रा के विभिन्न चरणों से भी परिचित कराया गया। सिस्टर निवेदिता द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक ध्वज से लेकर वर्ष 1906 के ध्वज, पिंगली वेंकैया द्वारा प्रस्तुत चरखे वाले ध्वज, वर्ष 1931 के तिरंगे और अंततः 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा द्वारा अपनाए गए वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज ‘ तिरंगा’ तक की यात्रा को फिल्म एवं शिक्षक के माध्यम से समझाया गया। राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के सभी अवयवों की सारगर्भित जानकारी देते हुए उन्होने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का आकार आयताकार है तथा इसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3रू2 है। तिरंगे में ऊपर केसरिया, मध्य में सफेद तथा नीचे हरे रंग की समान चौड़ाई वाली पट्टियाँ होती हैं। केसरिया रंग साहस और त्याग, सफेद रंग सत्य, शांति एवं पवित्रता तथा हरा रंग समृद्धि, विकास तथा हरियाली का प्रतीक है। सफेद पट्टी के मध्य गहरे नीले रंग का अशोक चक्र अंकित है, जिसमें 24 तीलियाँ हैं। यह चक्र सारनाथ स्थित अशोक सिंह स्तंभ के धर्मचक्र से लिया गया है, जो निरंतर गति, धर्म और प्रगति का संदेश देता है। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि तिरंगे का प्रत्येक रंग, उसका स्वरूप और अशोक चक्र मिलकर भारत के गौरव की, मूल्यों की तथा एकता और निरंतर प्रगति की भावना को अभिव्यक्त करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान कार्यक्रम में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विद्यार्थियों को हर घर तिरंगा अभियान को सफल बनाने, राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करने तथा देश के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की शपथ भी दिलाई गई। कार्यक्रम में शिक्षक श्री अनीस खान,महेश मालवीय, विजेंद्र सिंह,रवीना नरगावे,केशरी बघेल आदि का सहयोग रहा।
अंत में प्राचार्य श्री असलम खान ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि तिरंगा प्रत्येक भारतीय के लिए गौरव, राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे तिरंगे का सम्मान करते हुए हर घर तिरंगा अभियान को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होने कहा कि आज शाला के शिक्षकों ने अपनी सेल्फी तिरेंगे के साथ हर घर तिरंगा पोर्टल पर अपलोड की है, आप भी अपने-अपने घर से सेल्फी अपलोड कर प्रमाण-पत्र प्राप्त करें।