नैनीताल:
बलियानाला फिर डराने लगा है! क्या शासन-प्रशासन अब भी सिर्फ तस्वीरें खिंचवाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेगा? नैनीताल की इस संवेदनशील पहाड़ी पर दरकता पहाड़ कोई नई चेतावनी नहीं है, लेकिन हर बारिश के साथ हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। इस बार भी पहाड़ी का हिस्सा खिसका,सिंचाई विभाग का अस्थाई स्टोर और मजदूरों के आवास इसकी चपेट में आए और गनीमत रही कि उस वक्त वहां कोई मौजूद नहीं था,लेकिन कब तक गनीमत को ही सुरक्षा व्यवस्था का नाम दिया जाता रहेगा?वीडियो स्थानीय निवासी और पूर्व सभासद डीएन भट्ट द्वारा बनाई गई है।
आखिर प्रशासन को कितनी दरारें, कितने भूस्खलन और कितनी चेतावनियां चाहिए, ताकि वह खतरे को हादसा बनने से पहले गंभीरता से ले?
बलियानाला की कहानी सिर्फ बलियानाला तक सीमित नहीं है। भू-वैज्ञानिक लगातार चेताते रहे हैं कि नैनीताल की पहाड़ियां बढ़ते भूस्खलन के खतरे से जूझ रही हैं। कृष्णापुर और आलू खेत जैसे इलाकों में भू-धंसाव और पहाड़ी पर गहरी दरारें अब खतरे की घंटी बजा रही हैं, जिनमें से कुछ सड़क के बेहद करीब तक पहुंच चुकी हैं।क्या शासन-प्रशासन की कार्रवाई भी इन दरारों जितनी गहरी है, या फिर हर बार बारिश के साथ निरीक्षण, कुछ तस्वीरें और खानापूर्ति का सिलसिला ही चलता रहेगा? नैनीताल को बचाने के लिए अगर आज भी ठोस कदम नहीं उठे, तो कल प्रकृति को दोष देने से पहले प्रशासन को ये बताना होगा कि चेतावनियां सामने थीं, फिर भी आप जिम्मेदार लोग आखिर कर क्या रहे थे?
How many warnings will it take before the administration finally acts?Will Nainital be protected before the next landslide or only investigated after it happens?
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