बारानी क्षेत्रों में उर्वरकों की आधी मात्रा प्रयोग करें किसान : डा. जगदेव सिंह
भिवानी, 09 जून : बारानी क्षेत्रों में फसल उत्पादन वर्षा पर निर्भर रहता है। अत: ऐसे क्षेत्रों में पानी की कमी के कारण फसल उर्वरकों की पूरी मात्रा का उपयोग नहीं कर पाती। इसलिए बारानी इलाकों में किसानों का फोकस इस बात पर हो कि उर्वरकों की कम मात्रा डालें। उक्त विचार चौ. चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के सेवानिवृत वैज्ञानिक डा. जगदेव सिंह ने व्यक्त किए। वे खंड लोहारू के गांव कुड़ल में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा हिन्दुस्तान गम एण्ड कैमिकल्स भिवानी द्वारा आयोजित कृषि शिविर में किसानों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे जल संरक्षण के विभिन्न उपाय जैसे खेतों की गहरी जुताई करना, जैविक खादों का अधिकाधिक प्रयोग, मल्च का प्रयोग तथा पानी सोखने और थाम कर रखने वाले उत्पादों जैसे अंकुरायम के प्रयोग को अपनाएं। इससे पूर्व कृषि विश्वविद्यालय से सेवानिवृत कीट वैज्ञानिक डा. आर. के. सैनी ने ग्वार फसल को हानि पहुंचाने वाले कीटों व बिमारियों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने ग्वार के उखेडा रोग की रोकथाम के लिए बिजाई से पहले बीज को कंजीसाईड कार्बन्डाजिम 50 प्रतिशत से उपचारित कर बोने की सलाह दी। कृषि विकास अधिकारी डा. संदीप यादव ने किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित किया तथा इच्छुक किसानों से प्राकृतिक खेती के बारे में ट्रेनिंग प्राप्त करने के लिए नाम माँगे। शिविर में किसानों द्वारा अन्य फसलों जैसे मूंग, बाजरा, नरमा अदि से संबंधित पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिये गए तथा ग्वार के बीज उपचार हेतु दवा के फ्री सैम्पल भी काँटे गए। इस अवसर पर 70 से अधिक किसानों ने भाग लिया।