10 साल से सड़क का इंतजार, अब ग्रामीणों ने खुद संभाली कमान!! सरकारी इंतजार छोड़ ग्रामीणों ने उठाए फावड़े, श्रमदान से खुद शुरू किया सड़क निर्माण!
दस साल बीते, फिर भी सड़क नहीं! रूद्रप्रयाग जिले के मदमहेश्वर घाटी की ग्राम पंचायत गैड़ के बष्टी तोक के ग्रामीण आज भी मोटर मार्ग की सुविधा से वंचित हैं। लंबे इंतजार और लगातार प्रयासों के बावजूद सड़क नहीं बनी तो ग्रामीणों ने मंगलवार को खुद ही कमान संभाल ली और श्रमदान से मोटर मार्ग निर्माण का कार्य शुरू कर दिया।
सड़क नहीं, तो आजीविका भी मुश्किल!
बष्टी तोक में सड़क के अभाव में ग्रामीणों को अपने कृषि उत्पाद बाजार तक पहुंचाने के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। रोजमर्रा के आवागमन से लेकर खेती-किसानी तक, सड़क की कमी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
ग्रामीणों का दर्द—आखिर कब तक इंतजार करें?
ग्रामीण बलबीर राणा के अनुसार, मोटर मार्ग के लिए पिछले दस वर्षों से संघर्ष किया जा रहा है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया। ऐसे में ग्रामीणों ने एकजुट होकर श्रमदान से निर्माण शुरू करने का निर्णय लिया।
लोनिवि का दावा—15 दिन में पूरी हो सकती है वन संबंधी कार्यवाही,
लोक निर्माण विभाग, ऊखीमठ के सहायक अभियंता नरेंद्र कुमार ने बताया कि कलका गाड़ से बष्टी तक दो किलोमीटर मोटर मार्ग की प्रक्रिया पिछले तीन वर्षों से चल रही है। बांज के पेड़ों की अधिक संख्या के कारण वन संबंधी कार्यवाही में समय लग रहा है। विभाग को उम्मीद है कि अगले 15 दिनों में यह कार्यवाही पूरी हो जाएगी, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया बढ़ाई जाएगी।
अब सवाल—दस साल से सड़क की राह देख रहे बष्टी तोक के ग्रामीणों को आखिर कब मिलेगी राहत?
ग्रामीणों की यह पहल पहाड़ में बुनियादी सुविधाओं की जमीनी हकीकत बयां करती है। अब देखना होगा कि संबंधित विभागों की कार्यवाही कब धरातल पर उतरती है और बष्टी तोक तक सड़क पहुंचने का सपना कब पूरा होता है।
आपकी राय क्या है? क्या गांवों तक सड़क पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को खुद श्रमदान करने की नौबत आनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
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Rudraprayag, Rudraprayag | Oct 14, 2026