भीलवाड़ा, 23 सितम्बर। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज संसघ के सानिध्य में शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में दशलक्षण (पर्युषण) महापर्व की आराधना के तहत आठवें दिन बुधवार को उत्तम त्याग धर्म का पूजन एवं आराधना की गई। भगवान का अभिषेक करने एवं भक्ति में श्रावक श्राविकाएं झूम उठे ओर जमकर नाचते गाते रहे। आचार्य पुलकसागर महाराज ने उत्तम त्याग धर्म का संदेश देते हुए कहा कि अर्जन के साथ विजर्सन होना जरूरी है। केवल अर्जन ही करते रहने पर जिंदगी डूब जाती है। जो जोड़ते ही जाते छोड़ते नहीं है उनका पतन होना निश्चित है ओर जो जोड़ना व छोड़ना दोनों जानते उनका जीवन आनंदमय रहता है। त्याग की भावना ही जिंदगी का आधार हुआ करती है। हमारी सोच जोड़ो ओर छोड़ो वाली होनी चाहिए।