*ब्रांडेड बोतलों में अपमिश्रित शराब बेचने वाले नेटवर्क का भंडाफोड़*
*आबकारी ने डिकॉय ऑपरेशन कर डिलीवरी एजेंट को पकड़ा, देर रात कथित मास्टरमाइंड के घर दबिश, दोनों आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में*
सतना। ब्रांडेड विदेशी शराब की खाली बोतलों में संदिग्ध तरल भरकर ग्राहकों को सप्लाई किए जाने के मामले का आबकारी विभाग ने खुलासा किया है। विभाग की टीम ने डिकॉय ऑपरेशन के जरिए पहले डिलीवरी एजेंट को पकड़ा। उसकी निशानदेही पर देर रात घूरडांग निवासी कथित मास्टरमाइंड जितेन्द्र कुमार साह उर्फ रवि को गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपियों को मंगलवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। आबकारी विभाग के अनुसार मामले में जब्त बोतल में 'मंकी शोल्डर' ब्रांड का लेबल लगा हुआ था। बोतल के अंदर मौजूद तरल में संदिग्ध तत्व पाए गए हैं। इसकी वास्तविक प्रकृति और मानव सेवन के योग्य होने अथवा नहीं होने की पुष्टि के लिए नमूना एफएसएल जांच के लिए भेजा जा रहा है।
*मोबाइल पर ऑर्डर, एजेंट से डिलीवरी*
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित नेटवर्क का संचालन मोबाइल फोन के माध्यम से किया जा रहा था। ग्राहकों से संपर्क कर शराब के ऑर्डर लिए जाते और डिलीवरी के लिए एजेंट का इस्तेमाल किया जाता था। विभाग का कहना है कि एक बार में सीमित संख्या में बोतलें पहुंचाई जाती थीं, जिससे बड़ी मात्रा में शराब के साथ पकड़े जाने का जोखिम कम हो। जांच में यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हैं तथा कथित तौर पर ऐसी बोतलें कितने ग्राहकों तक पहुंचाई गई हैं।
*मुखबिर की सूचना पर तैयार किया डिकॉय प्लान*
आबकारी विभाग को इस गतिविधि की सूचना मुखबिर के माध्यम से मिली थी। सूचना की पुष्टि के बाद आबकारी वृत्त सतना क्रमांक-1 की टीम ने ग्राहक बनकर शराब खरीदने की योजना बनाई। 14 सितंबर की रात सिमरिया चौक स्थित हैदराबादी बिरयानी सेंटर के पास डिलीवरी के लिए एजेंट को बुलाया गया। तय स्थान पर सुनील कुशवाहा पहुंचा और कथित तौर पर मंकी शोल्डर की बोतल की डिलीवरी करने लगा। इसी दौरान सादे कपड़ों में मौजूद आबकारी उप निरीक्षक संजय साकेत और टीम ने उसे पकड़ लिया।
*बोतल की जांच में संदिग्ध तरल मिला*
डिलीवरी एजेंट के कब्जे से मिली बोतल को आबकारी टीम ने जब्त कर उसकी जांच की। विभाग के मुताबिक बोतल के अंदर मौजूद तरल सामान्य ब्रांडेड शराब से अलग और संदिग्ध पाया गया। प्रारंभिक स्तर पर उसमें सूक्ष्म कण एवं तेलीय तत्व दिखाई देने की बात कही गई है। हालांकि तरल में वास्तव में कौन सा पदार्थ था और वह स्वास्थ्य के लिए कितना नुकसानदायक है, यह एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। विभाग ने नमूना वैज्ञानिक जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
*देर रात घूरडांग में दबिश*
डिलीवरी एजेंट की गिरफ्तारी के बाद टीम ने मामले के कथित मुख्य आरोपी जितेन्द्र कुमार साह उर्फ रवि के घूरडांग स्थित घर पर देर रात दबिश दी। विभाग के मुताबिक कार्रवाई की भनक लगने पर आरोपी ने मोबाइल फोन सहित कुछ सामग्री हटाने का प्रयास किया, लेकिन टीम ने उसे पकड़ लिया।
जांच अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, शराब की सप्लाई के स्रोत और ग्राहकों तक पहुंचाई गई बोतलों की जानकारी जुटाई जा रही है।
*आबकारी अधिनियम की धाराओं में अपराध दर्ज*
मामले में आबकारी विभाग ने अपराध क्रमांक 374/26 दर्ज किया है। आरोपियों के खिलाफ मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34(1)(क) एवं 49(क) के तहत कार्रवाई की गई है। विभाग के अनुसार मामला अपमिश्रित मदिरा से संबंधित होने के कारण गंभीरता से जांच की जा रही है।दोनों आरोपियों को मंगलवार को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
*इन अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई*
कार्रवाई कलेक्टर सतीश कुमार एस, आबकारी उपायुक्त संभागीय उड़नदस्ता रीवा माधव सिंह भेड़िया तथा सहायक आबकारी आयुक्त सतना सुरेन्द्र कुमार उरांव के निर्देश पर की गई।
आबकारी उप निरीक्षक आशीष बारिया के नेतृत्व में उप निरीक्षक निलेश गुप्ता और संजय साकेत, मुख्य आरक्षक राजकरण त्रिपाठी, मंगलदीन कोल, शंकर दयाल प्रजापति, आरक्षक आशुतोष तिवारी, अमृता उरमलिया सहित अन्य स्टाफ कार्रवाई में शामिल रहे।
अब एफएसएल रिपोर्ट और आगे की जांच से यह साफ होगा कि जब्त बोतल में किस प्रकार का तरल था, उसे कहां तैयार किया जा रहा था और इस कथित नेटवर्क ने अब तक कितनी बोतलें बाजार में पहुंचाई हैं।