कालपी में नजूल जमीन पर कथित कब्जे का खेल!
शिकायत के बाद भी निर्माण जारी, जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल
20 अगस्त की शिकायत पर अब तक जांच-पड़ताल नहीं होने का आरोप, गाटा संख्या 165 व भूखंड 1407-1409 को लेकर मामला गरमाया; शिकायतकर्ता बोला—कार्रवाई के इंतजार में बढ़ते जा रहे दबंगों के हौसले
कालपी नगर के अदलसराय इलाके में सरकारी नजूल भूमि को लेकर उठे सवाल अब और गंभीर होते जा रहे हैं।
20 अगस्त 2026 को की गई शिकायत के बाद भी मौके पर प्रभावी जांच अथवा कार्रवाई नहीं होने के आरोप लग रहे हैं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि एक ओर सरकारी अभिलेखों में कथित अनियमितताओं को लेकर शिकायत की गई, वहीं दूसरी ओर मौके पर कथित रूप से निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है।
मामला गाटा संख्या 165 और नगर पालिका परिषद कालपी के भूखंड संख्या 1407-1409 से जुड़ा बताया जा रहा है।
शिकायतकर्ता अमर सिंह अहिरवार एडवोकेट द्वारा लगाए गए आरोपों के मुताबिक संबंधित भूमि सरकारी नजूल भूमि से जुड़ी है और अभिलेखों तथा भूमि की नाप-जोख को लेकर गंभीर सवाल हैं।
शिकायत हुई, लेकिन कार्रवाई कहां?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि 20 अगस्त को मामला अधिकारियों के संज्ञान में लाए जाने के बावजूद मौके पर अपेक्षित जांच-पड़ताल नहीं की गई।
इसी बीच कथित रूप से दबंग लोग निर्माण कार्य जारी रखे हुए हैं।
अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि मामला सरकारी भूमि और राजस्व अभिलेखों से जुड़ा है तो मौके पर तत्काल स्थलीय सत्यापन क्यों नहीं कराया गया?
क्या अधिकारी मौके की स्थिति से अनजान हैं या फिर शिकायत के बावजूद कार्रवाई के लिए किसी और आदेश का इंतजार किया जा रहा है?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कार्रवाई में देरी के कारण कथित रूप से निर्माण करने वालों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।
अभिलेखों में अनियमितताओं की बात, फिर भी जमीन पर निर्माण क्यों?
उपलब्ध शिकायत और जांच विवरण में गाटा संख्या 165, वर्ग-12(ख) से संबंधित सरकारी नजूल भूमि के अभिलेखों में अनियमितताओं की बात दर्ज होने का दावा किया गया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नगर पालिका के एक पूर्व/सेवानिवृत्त कर्मचारी और कुछ कथित भूमाफियाओं की मिलीभगत से सरकारी भूमि को निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किए जाने की आशंका है।
हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
लेकिन सवाल यह है कि जब अभिलेखों को लेकर विवाद सामने आ चुका है, तब विवादित भूमि पर निर्माण की स्थिति को प्रशासन रोककर पहले निष्पक्ष सीमांकन क्यों नहीं करा रहा?
13 जुलाई की नाप-जोख भी सवालों के घेरे में
मामले में 13 जुलाई 2026 को नगर पालिका के राजस्व निरीक्षक द्वारा की गई नाप-जोख को लेकर भी शिकायतकर्ता ने सवाल उठाए हैं।
आरोप है कि भूखंड संख्या 1409 का रकबा कथित रूप से भूखंड संख्या 1407 में शामिल दर्शाया गया।
यदि ऐसा हुआ है तो यह राजस्व एवं नगर पालिका अभिलेखों के मिलान का गंभीर विषय है।
यही वजह है कि शिकायतकर्ता ने मांग की है कि संबंधित भूमि का दोबारा निष्पक्ष सीमांकन कराया जाए और राजस्व अभिलेखों के साथ नगर पालिका के रिकॉर्ड का मिलान कराया जाए।
कागजों में विवाद, जमीन पर निर्माण—आखिर जिम्मेदार कौन?
सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि यदि भूमि सरकारी है तो उस पर निर्माण कैसे आगे बढ़ रहा है?
और यदि निर्माण वैध है तो संबंधित पक्ष के पास कौन से वैध दस्तावेज हैं?
क्या निर्माण के लिए अनुमति ली गई?
क्या भूमि का स्वामित्व और सीमांकन स्पष्ट है?
क्या 1407 और 1409 की वास्तविक स्थिति मौके पर राजस्व टीम ने सत्यापित की?
इन सवालों का जवाब सिर्फ निष्पक्ष स्थलीय जांच और मूल अभिलेखों की जांच से ही मिल सकता है।
जिम्मेदारों की आंखों पर पट्टी या फिर कुंभकर्णी नींद?
शिकायतकर्ता का कहना है कि लगातार शिकायत के बावजूद यदि मौके पर निर्माण चलता रहा तो इससे आम लोगों के बीच प्रशासनिक कार्यवाही को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
एक तरफ शिकायत, दूसरी तरफ निर्माण—और बीच में जिम्मेदार विभागों की कथित खामोशी।
ऐसे में लोगों की जुबान पर सवाल है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी मामले को गंभीरता से लेंगे या सरकारी जमीन से जुड़ा विवाद सिर्फ कागजी कार्रवाई में उलझा रहेगा?
यदि सरकारी भूमि के अभिलेखों में कोई गड़बड़ी नहीं है तो जांच के बाद स्थिति साफ हो जाएगी। और यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारी तय होना भी जरूरी है।
अब प्रशासन के सामने ये बड़े सवाल
20 अगस्त की शिकायत पर मौके की जांच कब?
गाटा संख्या 165 का निष्पक्ष सीमांकन कब?
भूखंड 1407 और 1409 की वास्तविक स्थिति क्या है?
13 जुलाई की नाप-जोख की दोबारा जांच होगी या नहीं?
कथित निर्माण कार्य की वैधता कौन जांचेगा?
सरकारी नजूल भूमि के अभिलेखों में अनियमितता की बात सही है तो जिम्मेदार कौन?
और अगर आरोप गलत हैं तो प्रशासन सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता?
कालपी में नजूल भूमि का मामला अब सिर्फ एक शिकायत नहीं—प्रशासनिक कार्रवाई की परीक्षा बन चुका है।
शिकायतकर्ता की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।
यदि मौके पर निर्माण जारी रहने की बात सही है, तो निष्पक्ष सीमांकन और स्थलीय जांच में देरी विवाद को और बढ़ा सकती है।
फिलहाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं है।
आरोपों की पुष्टि जांच और वैधानिक प्रक्रिया से ही होगी।
लेकिन सरकारी भूमि से जुड़े इस मामले में पारदर्शी जांच और अभिलेखों की सच्चाई सामने आना बेहद जरूरी है।
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Kalpi, Jalaun | Aug 31, 2026