प्रेस विज्ञप्ति
समाहरणालय, मधेपुरा
जिला जनसंपर्क कार्यालय, मधेपुरा
दिनांक : 19 अगस्त 2026
*सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्यस्थल का निर्माण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी : जिलाधिकारी*
*POSH Act, 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित*
*ICC एवं स्थानीय शिकायत समिति की भूमिका, शिकायत निवारण और जागरूकता पर दिया गया विशेष जोर*
मधेपुरा, 19 अगस्त 2026।
जिला मुख्यालय स्थित डीआरडीए परिसर के झल्लू बाबू सभागार में बुधवार को कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (POSH Act) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी श्री अभिषेक रंजन, उप विकास आयुक्त श्री अनिल बसाक, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार पूजा कुमारी, अपर समाहर्ता मुकेश कुमार एवं जिला प्रोग्राम पदाधिकारी-सह-नोडल पदाधिकारी सीमा कुमारी ने संयुक्त रूप से किया।
*महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता*
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी श्री अभिषेक रंजन ने कहा कि किसी भी कार्यालय या संस्था की सफलता केवल उसके कार्यों एवं उपलब्धियों से नहीं, बल्कि वहां कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति को मिलने वाले सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर से निर्धारित होती है। महिलाओं को सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण उपलब्ध कराना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि POSH Act का प्रभावी क्रियान्वयन केवल कानूनी प्रावधानों की जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए पदाधिकारियों एवं कर्मियों की सोच में सकारात्मक बदलाव और संवेदनशीलता भी आवश्यक है।
*लैंगिक उत्पीड़न की स्पष्ट समझ और समय पर शिकायत जरूरी*
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न का अर्थ किसी महिला के प्रति किया गया कोई भी अनचाहा यौन व्यवहार, टिप्पणी, इशारा या मांग है, जिससे उसकी गरिमा, सम्मान अथवा सुरक्षा प्रभावित होती है।
वहीं, कार्यस्थल का दायरा केवल कार्यालय अथवा सरकारी भवन तक सीमित नहीं है। POSH Act के अनुसार, रोजगार अथवा काम से संबंधित गतिविधियों के लिए प्रयुक्त विभिन्न स्थान भी कार्यस्थल की परिधि में आ सकते हैं।
*ICC एवं स्थानीय शिकायत समिति की महत्वपूर्ण भूमिका*
जिला प्रोग्राम पदाधिकारी-सह-नोडल पदाधिकारी सीमा कुमारी ने POSH Act के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक कार्यालय अथवा संस्था में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन आवश्यक है। वहीं, जिला स्तर पर स्थानीय शिकायत समिति (Local Complaints Committee) का गठन किया जाता है, जिसके माध्यम से 10 से कम कर्मचारियों वाले संस्थानों में कार्यरत महिलाओं की शिकायतों तथा नियोक्ता के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों का निवारण सुनिश्चित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि समितियों की भूमिका केवल शिकायत प्राप्त कर उसका निवारण करने तक सीमित नहीं है। जागरूकता, रोकथाम, संवेदनशीलता तथा सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण का निर्माण भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
*भयमुक्त वातावरण के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक : उप विकास आयुक्त*
उप विकास आयुक्त श्री अनिल बसाक ने कहा कि हमारा प्रयास ऐसा कार्यस्थल बनाने का होना चाहिए, जहां प्रत्येक महिला बिना किसी भय, दबाव या भेदभाव के अपनी प्रतिभा एवं क्षमता का पूर्ण उपयोग कर सके। महिला सुरक्षा केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति, संस्था और पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
*मास्टर प्रशिक्षक ने दिया* विस्तृत प्रशिक्षण
मास्टर प्रशिक्षक शिवम कुमार द्वारा उपस्थित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को POSH Act, 2013 के विभिन्न प्रावधानों, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया, ICC एवं स्थानीय शिकायत समिति की भूमिका एवं दायित्वों तथा कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम से संबंधित विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को अधिनियम के प्रावधानों से अवगत कराने के साथ-साथ शिकायतों के निष्पक्ष, संवेदनशील एवं प्रभावी निवारण की व्यवस्था को सुदृढ़ करना रहा।
कार्यक्रम में स्थानीय शिकायत समिति की अध्यक्ष डॉ. शांति यादव, सी.एम. फेलो गायत्री कुमारी, सभी जिला स्तरीय पदाधिकारी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, सभी अंचलाधिकारी, महिला थानाध्यक्ष, जिला परियोजना प्रबंधक अमन कुमार झा, डीएमसी मो. इमरान आलम, केंद्र प्रशासक कुमारी शालिनी, लैंगिक विशेषज्ञ राजेश कुमार, मुमताज आलम, केस वर्कर रोबिन कुमार सहित DHEW मधेपुरा एवं वन स्टॉप सेंटर के सभी कर्मी उपस्थित थे।
*POSH Act, 2013 : उद्देश्य*
POSH Act, 2013 का मूल उद्देश्य कार्यस्थल पर महिलाओं को लैंगिक उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करना, उत्पीड़न की रोकथाम करना तथा प्राप्त शिकायतों का उचित एवं प्रभावी निवारण सुनिश्चित करना है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन से महिलाओं के लिए सुरक्षित, गरिमापूर्ण और समान अवसर वाला कार्य वातावरण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है।
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