कृष्ण जन्म पर झूमे श्रद्धालु, बच्चों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
पंचकूला। सनातन धर्म मंदिर सेक्टर-10 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भक्ति और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। भगवान वामन अवतार की कथा से लेकर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव तक श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए। मंदिर परिसर में जयकारों के बीच बच्चों ने रंगारंग प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
कथा के दौरान स्वामी जी ने भगवान वामन अवतार का प्रसंग सुनाते हुए राजा बलि के त्याग और वचन पालन की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि भगवान वामन ने राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी और तीन पग में उनका सब कुछ ले लिया, लेकिन राजा बलि अपने वचन से नहीं डिगे। उन्होंने भगवान से धन-संपत्ति नहीं, बल्कि अपने चरणों में स्थान और अटूट भक्ति मांगी।
श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाते हुए स्वामी जी ने देवकी और वासुदेव के संघर्ष का वर्णन किया। कंस द्वारा उनके छह पुत्रों की हत्या किए जाने के बावजूद दोनों ने भगवान पर विश्वास बनाए रखा। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने कारागार में आठवें पुत्र के रूप में जन्म लिया। जन्म प्रसंग आते ही मंदिर परिसर ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गूंज उठा।
बच्चों ने नृत्य और गायन की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर श्रद्धालुओं का मन जीत लिया। हर प्रस्तुति के बाद तालियों की गड़गड़ाहट से बच्चों का उत्साह बढ़ाया गया। कार्यक्रम में महापौर श्याम लाल बंसल के पहुंचने पर आयोजकों एवं श्रद्धालुओं की ओर से स्वागत किया गया।
मंदिर सभा ने श्रद्धालुओं से सपरिवार कथा में पहुंचकर आध्यात्मिक लाभ लेने और आयोजन की शोभा बढ़ाने का आग्रह किया। कथा के समापन के बाद श्रद्धालुओं के लिए भंडारे के प्रसाद की व्यवस्था भी की गई।