*दुनिया में सब कुछ कर लेना पर कभी भाई को नाराज मत करना-आचार्य पुलकसागर*
*जैन समाज के चारों सम्प्रदायों के संतों से एक मंच से एकता का संदेश देने का आह्वान*
*चित्रकूटधाम में ज्ञान गंगा महोत्सव में पुलक वाणी सुनने उमड़ रहे सर्व समाज भीलवाड़ावासी*
भीलवाड़ा :निलेश कांठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार ), 20 अगस्त। हमारों घरों में दिलों की दूरिया बढ़ने से रिश्तों में दीवारे खड़ी हो रही है। सहनशीलता समाप्त हो रही ओर भावनात्मक सम्बन्ध खत्म टूट रहे है। सर्व सुविधायुक्त होने पर भी सुख शांति को तरस रहे है। घर में शांति नहीं है तो दुनिया में कितनी भी तीर्थयात्रा कर ले शांति नहीं मिलने वाली है। जिंदगी में सब कुछ कर लेना पर अपने भाई को कभी नाराज मत करना। भाई के प्रति भीतर प्रेम कभी समाप्त नहीं होना चाहिए। माता पिता को बुढ़ापे में गरीबी व दरिद्रता दुःख नहीं देते, बेटे अलग-अलग रहे इससे बड़ी पीड़ा मां-बाप को दूसरी नहीं हो सकती। बच्चे एक साथ रहे इससे बड़ा सुख माता पिता को नहीं हो सकता। ये विचार भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में गुरूवार को पारिवारिक सदस्यों की आपसी एकता पर प्रवचन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि दोस्त ओर पड़ौसी के साथ रह सकते पर दो भाई साथ क्यों नहीं रह सकते। जिन घरों में भाईयों में प्रेम नहीं होता है उस घर को बिखरने में समय नहीं लगता। रामायण महाभारत काल से अब तक देख ले हमेशा खतरा परायों से नहीं अपनों से होता है। जितना नुकसान बाहरी नहीं कर सकते उतना अपने कर देते है इसलिए कभी अपनों को दूर मत होने दो। भाई के रिश्ते रावण विभीषण या बाली सुग्रीव जैसे नहीं होने चाहिए जिसमें भाई ही भाई के विनाश कारण बन जाए बल्कि राम लक्ष्मण भरत शत्रुधन जैसे होने चाहिए जिनमें एक भाई दूसरे भाई के लिए त्याग का आदर्श प्रस्तुत करे। भाई गलत भी हो तो उसका साथ नहीं छोड़कर समझाने का प्रयास करे। अलग होना आसान होता है लेकिन वापस जुड़ना कठिन होता है। आचार्यश्री ने कहा कि आज बढ़ते एकल परिवारों के कारण रिश्तों की माला बिखर रही है पर आज भी कई ऐसे संयुक्त परिवार तीर्थ समान है जहां दर्जनों सदस्य एक साथ प्रेम से रहते है ओर एक चौके में खाना बनाकर खाते है। जहां भाईयों में प्रेम होता है उन घरों में रोज त्यौहार होता है। पैसा भले कम हो जाए पर ह्दय का प्रेेम कभी कम नहीं होेना चाहिए। बुरे दिनो में पैसा नहीं अपना प्रेम एवं व्यवहार की काम आता है। आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि वह इस मंच से आह्वान करते है कि आने वाली संवत्सरी या क्षमावाणी पर सकल जैन समाज के चारों सम्प्रदायों के संत एक मंच पर बैठे ओर दुनिया को जैन एकता का संदेश दे। यदि हम यहां एक मंच पर नहीं बैठ पाएंगे तो सिद्ध शिला पर एक साथ कैसे बैठेंगे। दो-दो इंच पाटे उंचे नीचे होने के लिए लड़ना छोड़ना है ओर एक साथ एक बैठना है। यदि हम वितरागी होकर एक साथ नहीं बैठ सके तो फिर वितरागता कैसे होंगी। वितरागी बन जाते है पर छोटे-छोटे अहंकार नहीं छोड़ पाते है। संत एक साथ बैठेंगे तो समाज भी एक साथ बैठ जाएगा। संत जब तक एक नहीं होंगे समाज कैसे एक हो पाएगा। उन्होंने कहा कि सभी सम्प्रदायों के संतों के एक मंच से संदेश देने के बारे में अभी कोई औपचारिक बात नहीं हुई है चातुर्मास समिति इस बारे में चर्चा कर आगे तय करेगी।
आचार्य पुलकसागर ने कहा कि छोटी-छोटी बातों पर घर बिखर जाते है ओर भाई-भाई की लड़ाई से कई जन्मों का बैर बन जाता है। याद रखना हम किसी को क्षमा कर सकते है पर कर्मो से मुक्त परमात्मा भी नहीं कर सकते है। कर्म का फल राजा ओर रंक सभी को भोगना पड़ता है। परिवार की लड़ाई सात-सात भव तक चलती है। तीर्थंकर जैसी आत्माएं भी कर्म भोगती है तो हम कैसे बच सकते है।
आचार्यश्री ने कहा कि हमारे रिश्तों की पकड़ ढीली होने से परिवार बिखर रहे है। पड़ौसी का सुख हमसे बर्दाश्त नहीं होता है। व्यक्ति के मकान एवं गाड़ी से उसका स्टे्टस तय किया जाता है। हमेशा याद रखे व्यक्ति तन से नहीं मन से बड़ा होता है। हमारा दुर्भाग्य है मकान बड़े ओर मन छोटा होता जा रहा है।
प्रवचन के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन एवं आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य गुलाबचंद मनीष नीरज शाह परिवार ने प्राप्त किया। ग्वालियर से आए प्रतिष्ठाचार्य पंडित चन्द्रप्रकाश चन्द्र ने भी गुरूदेव को श्रीफल भेंट किया। अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह, सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने किया। केसरकुंज महिला मण्डल की सदस्यों ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया। ज्ञान की गंगा में डूबकी लगाने के लिए भीलवाड़ा के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों लोग पहुंचे थे। ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में प्रवचन होंगे।