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अवैध कॉलोनी काटने वालों की अब खैर नहींअनिल विज ने प्रशासन को दिए सख्त निर्देश #AnilVij #HaryanaNews
Ambala, Ambala
| May 29, 2026
#anilvij
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#crime
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LIVE: प्रेस वार्ता (चंडीगढ़) मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी.....
Ambala, Ambala | Jun 22, 2026
जगाधरी, हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रती संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया जिसके दौरान परम पूजनीय दिव्य गुरु आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री नीलम भारती जी ने भक्ति मार्ग से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सूत्रों को उद्घाटित करते हुए कहा कि भक्ति मार्ग गुरु के बिना एक ऐसा अनजान रास्ता है जिसमें एक भक्त अहंकार, स्वार्थ एवं ऋद्धि सिद्धियों के प्रलोभन में अटक सकता है किन्तु गुरु अपनी कृपा दृष्टि और तपोबल के द्वारा अपने शिष्य के भक्ति पथ पर आने वाले प्रत्येक अवरोध को नष्ट करते हैं। गुरु शिष्य का संबंध इस संसार का सर्वश्रेष्ठ संबंध है जिसमें शिष्य अपने मन वचन कर्म से गुरु के चरणों में समर्पित होता है और गुरु अपना सम्पूर्ण जीवन शिष्य के कल्याण हेतु लगा देता है। यदि देखा जाए तो गुरु का त्याग शिष्य के त्याग से बहुत बड़ा है क्योंकि गुरु प्रत्येक क्षण ही शिष्य के संरक्षण हेतु तत्पर रहता है। गुरु अपने शिष्य के संचित कर्मों को समाप्त करके उसके प्रारब्ध की उस धार को कुंठित कर देते हैं जो भविष्य में उनके शिष्य को कष्ट देने वाली हो क्योंकि गुरु अपने शिष्य के भूत भविष्य वर्तमान से सदैव परिचित होते हैं और इसी कारण गुरु अपने शिष्य को सत्संग सेवा साधना और सुमिरन में लगाकर स्वयं उसके लिए मार्ग खोलते हैं और उसके जीवन में आने वाली विपत्तियों को भी नष्ट कर देते हैं। आगे साध्वी बहन जी ने विस्तार पूर्वक समझाते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा को मानव जीवन की सबसे पवित्र और श्रेष्ठ परंपराओं में से एक माना गया है। गुरु केवल बाहरी रूप से मार्गदर्शन करने वाला व्यक्ति नहीं होता अपितु गुरु शिष्य के जीवन में ज्ञान, विवेक, संस्कार और आत्मविश्वास का संचार कर उसे अध्यात्म के मार्ग पर अग्रसर करता है। गुरु-शिष्य का संबंध श्रद्धा, विश्वास, अनुशासन और समर्पण पर आधारित होता है। जब शिष्य विनम्रता और जिज्ञासा के साथ गुरु से ज्ञान प्राप्त करता है, तब उसके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास होता है। गुरु अपने अनुभव और आदर्श जीवन के माध्यम से शिष्य को केवल विद्वान ही नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार और नैतिक नागरिक बनने की प्रेरणा देता है। आज के बदलते समय में भी गुरु-शिष्य परंपरा की प्रासंगिकता बनी हुई है। आधुनिक शिक्षा के साथ यदि गुरु के प्रति सम्मान, अनुशासन और जीवन मूल्यों का समावेश हो, तो समाज में संस्कारवान, संवेदनशील और उत्तरदायी पीढ़ी का निर्माण संभव है। गुरु का सम्मान और उनके द्वारा प्रदत्त ज्ञान का सदुपयोग ही सच्ची गुरु-दक्षिणा है। यही गुरु-शिष्य संबंध वास्तविक रूप में सशक्त एवं संस्कारित समाज के निर्माण का आधार है। यदि हम आने वाली पीढ़ी को सुसंस्कृत एवं श्रेष्ठ व्यक्तित्व से युक्त देखना चाहते हैं तो हमें पुनः गुरु शिष्य परंपरा की और लौटना होगा जिसमें एक ब्रह्मनिष्ठ गुरु ब्रह्म ज्ञान के द्वारा शिष्य के जीवन को सकारात्मक रूप से परिवर्तित कर उसे मनुष्यत्व से देवत्व की ओर अग्रसर करता है।
Ambala, Ambala | Jun 21, 2026
World Yoga Day Special... 21june....Happy yoga Divas....करो योग रहो निरोग.......
Ambala, Ambala | Jun 21, 2026
योग दिवस पर बिहार के स्वास्थ मंत्री #Bihar #BiharNews #HealthDepartment
Ambala, Ambala | Jun 21, 2026
रादौर के गांव छोटा बांस मे चला प्रसाशन का बुलडोज़र।
Ambala, Ambala | Jun 20, 2026
अवैध कॉलोनी काटने वालों की अब खैर नहींअनिल विज ने प्रशासन को दिए सख्त निर्देश #AnilVij #HaryanaNews - Ambala News