आगरा को क्या मिला? झुनझुना! यमुना की बदहाली पर अनोखा प्रदर्शन
दिवाली आने वाली है... बाजारों में रौनक है... हर तरफ उत्सव की तैयारी है... लेकिन आगरा की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी आज भी बदहाली के आंसू बहा रही है!
जनप्रतिनिधियों और सरकारी तंत्र की नींद टूटे, इसके लिए आगरा में लोगों ने ऐसा अनोखा प्रदर्शन किया कि हर तरफ एक ही नारा गूंज उठा... आगरा को क्या मिला? झुनझुना... झुनझुना!
आगरा में यमुना नदी की बदहाल स्थिति को लेकर रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों ने दिवाली से पहले अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। यमुना आरती स्थल पर आयोजित 'झुनझुना दिवस' में लोगों ने झुनझुने बजाकर जनप्रतिनिधियों और सरकारी विभागों को जगाने की कोशिश की।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सालों से यमुना के पुनर्जीवन के नाम पर घोषणाएं और वादे तो किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर नदी की हालत बदलने के लिए कोई ठोस कदम नजर नहीं आ रहा।
रिवर कनेक्ट कैंपेन के संयोजक बृज खंडेलवाल ने यमुना में सालभर ताजे पानी का अविरल प्रवाह सुनिश्चित करने, ताजमहल के डाउनस्ट्रीम में बैराज बनाने, नदी की गाद और गंदगी हटाने तथा सहायक नदियों के संरक्षण की मांग उठाई।
उन्होंने साबरमती रिवरफ्रंट मॉडल की तर्ज पर यमुना रिवरफ्रंट विकसित करने की भी मांग की।
वहीं डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने उम्मीद जताई कि अगले विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश सरकार यमुना पर बैराज निर्माण का काम शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि यमुना सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि पूरे ब्रज मंडल की जीवनरेखा है।
कार्यक्रम में डॉ. हरेंद्र गुप्ता, मीरा खंडेलवाल, डॉ. ज्योति खंडेलवाल, विशाल झा, राकेश गुप्ता, जगन प्रसाद तेहरिया सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में गोस्वामी नंदन श्रोत्रिय ने विशेष यमुना आरती कराई। सभी सदस्यों ने यमुना के पुनर्जीवन और ब्रज की प्राकृतिक विरासत को बचाने का संकल्प लिया।
अब सवाल आगरा के जनप्रतिनिधियों से है... आखिर कब तक यमुना के नाम पर सिर्फ वादे होते रहेंगे? कब मिलेगा नदी को उसका पानी? कब बनेगा बैराज?
झुनझुना दिवस के जरिए रिवर एक्टिविस्ट्स ने साफ संदेश दिया है...
आगरा को अब झुनझुना नहीं, यमुना में पानी चाहिए।
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