दिल्ली पुलिस के इतिहास में एक ऐसा नजारा सामने आया, जिसने पूरे पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया! जिस पुलिस के कंधों पर कानून व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी है, आज उसी पुलिस के जवान अपने ही विभाग के फैसले के खिलाफ सड़क पर उतर आए। मामला इतना बढ़ा कि पुलिस मुख्यालय के बाहर सैकड़ों पुलिसकर्मी इकट्ठा हो गए और अपने वरिष्ठ अधिकारियों के समर्थन में आवाज बुलंद करने लगे।
दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर को दिल्ली के शाहदरा थाने से हुई। यहां एक वकील ललित बंसल और पुलिसकर्मियों के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों के बीच तीखी झड़प की स्थिति बन गई। इस घटना में वकील को चोटें आने का आरोप लगा, जिसके बाद वकीलों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने विरोध प्रदर्शन के साथ हड़ताल शुरू कर दी।
वकीलों के विरोध के बाद पुलिस के आला अधिकारियों ने मामले में कार्रवाई करते हुए गांधी नगर के ACP मानस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के SHO अरुण कुमार का तबादला कर दिया। अधिकारियों का यह फैसला भले ही विवाद को शांत करने के मकसद से लिया गया हो, लेकिन पुलिस विभाग के एक वर्ग में इसे लेकर नाराजगी बढ़ गई।
और फिर दिल्ली की सड़कों पर वो नजारा देखने को मिला, जिसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी पुलिस मुख्यालय के बाहर पहुंच गए। करीब 500 पुलिसकर्मियों के जुटने की बात सामने आई। सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कई तरह के दावे भी वायरल हुए। कहीं 500 से ज्यादा अधिकारियों के तबादले की खबरें चलीं, तो कहीं पुलिस विभाग में बड़े फेरबदल की चर्चा होने लगी।
लेकिन प्रदर्शन की असली वजह अपने अधिकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर पुलिसकर्मियों की नाराजगी थी।
प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों का सवाल था कि आखिर पूरी जांच और निष्पक्ष पड़ताल के बिना उनके अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों की गई? उनका कहना था कि अगर किसी अधिकारी की गलती है तो जांच होनी चाहिए, लेकिन एकतरफा कार्रवाई से पूरे पुलिस विभाग का मनोबल प्रभावित होता है।
इस दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे जवानों से बातचीत कर उन्हें शांत कराने की कोशिश की। लेकिन इस घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर जिस पुलिस विभाग में अनुशासन सबसे अहम माना जाता है, वहां हालात ऐसे कैसे बन गए कि जवानों को अपनी बात रखने के लिए मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करना पड़ा?
अब सबकी नजरें दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस कमिश्नर के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी? क्या तबादले के फैसले पर दोबारा विचार किया जाएगा? या फिर पुलिस और वकीलों के बीच शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेगा?
फिलहाल, दिल्ली पुलिस के भीतर उठी इस नाराजगी ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
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