कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा के निर्देशानुसार शिवपुरी जिले में विगत दिनों हुई अधिक वर्षा का फसलों पर प्रभाव जानने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों और कृषि वैज्ञानिकों के दल ने संयुक्त रूप से विभिन्न गांवों का भ्रमण किया। इस दौरान दल ने फसलों का जायजा लेकर किसानों को कीट एवं रोग नियंत्रण के लिए आवश्यक जानकारी और तकनीकी परामर्श प्रदान किया।
कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों के दल ने गतदिवस को जिले के ग्राम कोटा, भागोरा, करई, रायचंदखेड़ी, सिरसौद, राजा की मुढेरी, सेमरी, गुगुरीपुरा, जसराजपुर, रामखेड़ी, रतौर, पिपरसमा, तानपुर सहित कई गांवों का भ्रमण किया। निरीक्षण के दौरान टमाटर, सोयाबीन, धान, मूंगफली, उड़द, तिल आदि खरीफ फसलों की स्थिति देखी गई। निरीक्षण में पाया गया कि सोयाबीन, मूंगफली और तिल की फसल सामान्य स्थिति में है, जबकि उड़द में कहीं-कहीं पीला रोग तथा टमाटर की फसल में जैविक व अजैविक समस्याएं देखी गईं।
*विभिन्न फसलों में कीट-रोग नियंत्रण हेतु जारी परामर्श व सलाह*
फसलों को बीमारियों और कीटों के प्रकोप से बचाने के लिए विशेषज्ञों द्वारा निम्न तकनीकी सलाह जारी की गई है। जिसमें फफूंद जनित रोगों से सुरक्षा हेतु फ्लुक्सायथ्रोक्साइड$पायरोक्लोस्ट्रोबिन (रेडीमिक्स) 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करें। पत्तियों व फलियों को नुकसान पहुंचाने वाली इल्लियों के नियंत्रण के लिए क्लोरएण्ट्रानिलिप्रोल 18.5 एस.सी. (150 मिली प्रति हेक्टेयर) का छिड़काव करें। चक्र भृंग (घेरे वाली इल्ली) के लक्षण दिखने पर थायक्लोप्रिड 21.7 एस.सी. (750 मिली प्रति हेक्टेयर) स्प्रे करें। वहीं बिहार हेयरी कैटरपिलर एवं टस्क मोथ का प्रकोप होने पर प्रारंभिक अवस्था में इल्लियों को पौधे सहित हटा दें और फ्लूबेंडियामाइड 20 डब्ल्यू.जी. (250 ग्राम/हेक्टेयर) या लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 4.90 प्रतिशत सी.एस. (300 मिली/हेक्टेयर) का छिड़काव करें।
उड़द-मूंग में पीला चितकबरा रोग के नियंत्रण हेतु इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एस.एल. (0.4 मिली प्रति लीटर पानी) या डायमेथोएट 30 प्रतिशत ई.सी. (1.5 से 2 मिली प्रति लीटर पानी) का घोल बनाकर छिड़काव करें। उड़द में पत्ती धब्बा एवं मूंगफली में टिक्का रोग दिखने पर मेटीरम 55 प्रतिशत $ पायरेक्लोस्ट्रोविन 5 प्रतिशत डब्ल्यू.जी. (900 ग्राम सक्रिय तत्व 500 लीटर पानी में) का स्प्रे करें। फालआर्मीवर्म कीट के नियंत्रण हेतु इमामेक्टिन बेंजोएट (0.5 मिली प्रति लीटर) या क्लोरएण्ट्राप्रिनिलोप्रोल (0.4 मिली प्रति लीटर पानी) का घोल बनाकर छिड़काव करें। रस सूचक कीटों के नियंत्रण हेतु खेतों में पीला स्टिक ट्रैप लगाएं और 16 कतारों के बाद गेंदा की फसल अंतर्वर्ती रूप से लगाएं। अधिक आर्द्रता से फफूंदजनित रोगों के नियंत्रण हेतु मेटालेक्सिल$क्लोरोथेलोनिल (रेडीमिक्स फफूंदनाशी) का 30 ग्राम प्रति 15 लीटर क्षमता वाले पंप में घोल बनाकर (12 पंप प्रति एकड़) स्प्रे करें। तना छेदक, पत्ती लपेटक एवं अन्य कीटों से बचाव हेतु दानेदार कार्टूप हाइड्राक्लोराइड (18-25 किग्रा/हेक्टेयर) या फिप्रोनिल (16-25 किग्रा/हेक्टेयर) का बुरकाव करें।
*सुरक्षा उपाय और किसानों के लिए आवश्यक निर्देश*
उप संचालक कृषि श्री मुनेश कुमार शाक्य ने किसानों को सलाह दी है कि फसल सुरक्षा रसायनों का छिड़काव करते समय अनुशंसित मात्रा (500 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर) का ही प्रयोग करें। सुरक्षा एवं सावधानी हेतु मुंह पर मास्क लगाएं, हाथों में दस्ताने और पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनकर ही दवाएं डालें। दवा उपयोग करते समय किसी भी खाद्य सामग्री का सेवन न करें और कार्य के पश्चात साबुन से अच्छी तरह हाथ धोएं या स्नान करें। अधिक जानकारी के लिए किसान अपने क्षेत्रीय कृषि अधिकारी एवं विशेषज्ञों से संपर्क कर परामर्श प्राप्त कर सकते हैं।
CM Madhya Pradesh
Jansampark Madhya Pradesh
Department of Agriculture, Madhya Pradesh
Collector Shivpuri
#shivpuri
240 views | Shivpuri, Madhya Pradesh | Sep 10, 2026