नन्हे हाथों ने रंगों से सजाए दीपक, दीपावली के स्वागत में प्राथमिक विद्यालय अमखेड़ा में आयोजित हुई दीपक सजाओ प्रतियोगिता
जालौन। दीपावली का पर्व नजदीक आते ही चारों ओर उत्साह, उमंग और उल्लास का वातावरण दिखाई देने लगा है। इसी क्रम में विकास खंड माधौगढ़ के प्राथमिक विद्यालय अमखेड़ा, जनपद जालौन में बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दीपक सजाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विद्यालय के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने बड़े उत्साह और उमंग के साथ प्रतिभाग किया। बच्चों ने अपने कोमल हाथों से मिट्टी के साधारण दीपकों को विभिन्न रंगों, आकर्षक डिजाइनों और सुंदर कलाकृतियों से सजाकर उन्हें मनमोहक रूप प्रदान किया।
विद्यालय परिसर में आयोजित इस गतिविधि के दौरान बच्चों की कल्पनाशीलता और कलात्मक अभिरुचि देखते ही बन रही थी। किसी बच्चे ने दीपक को आकर्षक रंगों से सजाया तो किसी ने उस पर सुंदर आकृतियां और डिजाइन उकेरे। अपनी मेहनत और कल्पनाशक्ति से तैयार किए गए दीपकों को देखकर बच्चों के चेहरों पर विशेष खुशी और आत्मविश्वास दिखाई दिया। बच्चों के लिए यह प्रतियोगिता केवल एक मनोरंजक गतिविधि नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा को अभिव्यक्त करने और कुछ नया सीखने का भी अवसर बनी।
इस अवसर पर राज्य अध्यापक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक एवं विद्यालय के प्रधानाध्यापक विपिन उपाध्याय ने कहा कि विद्यालय में शिक्षा का उद्देश्य केवल बच्चों को किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के लिए अवसर उपलब्ध कराना भी है। इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों से जोड़ने के साथ-साथ उनकी रचनात्मक सोच, कल्पनाशीलता, एकाग्रता और कलात्मक कौशल को विकसित करती हैं। जब बच्चे अपने हाथों से कोई वस्तु तैयार करते हैं तो उनमें आत्मविश्वास, स्वावलंबन और स्वयं कुछ करने की भावना भी विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि दीपावली केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। मिट्टी के दीपकों को सजाने जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को पारंपरिक कला, स्थानीय शिल्प और मिट्टी से जुड़ी हमारी संस्कृति को समझने का अवसर मिलता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भी अनुभवात्मक, गतिविधि आधारित एवं कला समेकित शिक्षा पर विशेष बल दिया गया है, ताकि बच्चे पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में दक्ष और निपुण बन सकें।
विद्यालय के सहायक अध्यापक श्याम जी ने बच्चों को रंगों की पहचान, उनके संयोजन और दीपावली पर्व के सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बच्चों को समझाया कि दीपक प्रकाश, सकारात्मकता और ज्ञान का प्रतीक है। जिस प्रकार एक छोटा-सा दीपक अंधकार को दूर कर प्रकाश फैलाता है, उसी प्रकार ज्ञान और अच्छे संस्कार हमारे जीवन से अज्ञानता एवं नकारात्मकता को दूर करते हैं।
विद्यालय की शिक्षामित्र सविता कुशवाहा एवं अनु गुप्ता ने भी प्रतियोगिता में सक्रिय सहयोग किया। उन्होंने बच्चों को दीपक सजाने के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने, रंगों के चयन और कलात्मक सजावट में मार्गदर्शन दिया। साथ ही बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें अपनी कल्पनाओं के अनुसार स्वतंत्र रूप से कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय का वातावरण उत्साह, रचनात्मकता और उल्लास से सराबोर रहा। बच्चों द्वारा सजाए गए सुंदर एवं आकर्षक दीपकों ने सभी का मन मोह लिया। इस गतिविधि ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि विद्यालय में पढ़ाई के साथ कला, संस्कृति, परंपरा और व्यवहारिक अनुभवों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
प्राथमिक विद्यालय अमखेड़ा में आयोजित यह आयोजन बच्चों के लिए सीखने, सृजन करने और अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का एक सुंदर अवसर बना।
Orai, Jalaun | Nov 5, 2026