सरगुजा में आदिवासी विकास विभाग के दावों की धज्जियां उड़ गईं, जब शिवपुर एकलव्य आवासीय विद्यालय की छात्राएं हॉस्टल की बदहाली और मनमौजी प्रिंसिपल के खिलाफ बगावत कर सीधे कलेक्टर से मिलने सड़क पर उतर आईं। कई बार गुहार लगाने के बावजूद जब किसी जिम्मेदार के कान पर जूं तक नहीं रेंगी, तो तपती धूप और धूल की परवाह किए बिना ये मासूम बेटियां लगभग 30 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकल पड़ीं। छात्राओं के आक्रोश और अडिग रुख को देखकर अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ललित शुक्ला पसीने-पसीने होकर बच्चियों के पीछे-पीछे दौड़ते और मान-मनौव्वल करते नजर आए, लेकिन बेटियों ने साफ कर दिया कि अब खोखले वादों से काम नहीं चलेगा।
छात्राओं का आक्रोश देखकर बैकफुट पर आए प्रशासन ने जब देखा कि बच्चे किसी भी सूरत में रुकने को तैयार नहीं हैं, तो आनन-फानन में बस की व्यवस्था कर उन्हें रवाना करना पड़ा। यह घटना केवल एक स्कूल का मामला नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी विकास विभाग की संवेदनहीन कार्यप्रणाली पर करारा तमाचा है कि आखिर नौनिहालों को अपने बुनियादी हक के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर क्यों होना पड़ा? अब पूरी जनता की नजरें सरगुजा कलेक्टर पर टिकी हैं। क्या वे लापरवाह अधिकारियों और प्रिंसिपल पर सख्त कार्रवाई करेंगे या फिर हर बार की तरह मामले को जांच की फाइलों में दबा दिया जाएगा?
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